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Tuesday, February 22, 2022

राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की सलाह को नहीं माना

चुनाव सुधार युवा संवाद संगोष्ठी में बोले अनिल शर्मा 

छात्र-छात्राओं ने दो प्रस्ताव पारित किए, दागी नेताओं से किनारा कर लेना चाहिए 

नोटा जीते तो उस विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में फिर चुनाव हों 

बांदा, के एस दुबे । सोमवार को तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम दौलतपुर में स्थित एसएम कान्वेंट स्कूल में एडीआर एवं यूपी इलेक्शन वॉच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चुनाव सुधार युवा संवाद विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के तौर पर एडीआर के प्रदेश कोआर्डिनेटर अनिल शर्मा ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट व चुनाव आयोग के निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। 

संगोष्ठी को संबोधित करते कोआर्डिनेटर अनिल शर्मा

श्री शर्मा ने कहा सुप्रीम कोर्ट व चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जो भी राजनीतिक दल दागी प्रत्याशियों को टिकट दे, वे चुनाव आयोग को लिखित तौर पर यह बताएं कि दागी को टिकट देने की उनकी कौन सी मजबूरी थी। इसके अलावा उस क्षेत्र के 2 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में तथा एक टीवी चैनल में दागी प्रत्याशी के मुकदमों का पूरा विवरण विज्ञापन में देकर छपवायें, ताकि मतदाताओं को पता चल सके। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सभी राजनीतिक दलों ने इसका पालन नहीं किया, लेकिन जब एडीआर ने लखनऊ में प्रेस कान्फ्रेंस की तो दूसरे चरण में राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशियों का कम प्रसार संख्या वाले अखबारों में दागी प्रत्याशियों के मुकदमों का प्रकाशन करवाया। लेकिन टीवी चौनलों की जगह टेक्नोलाजी के तरीके से बचने की कोशिश की। श्री शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि कुछ प्रत्याशियों का विवरण हिंदी अखबारों में अंग्रेजी में देकर अपने ऊपर लगे आपराधिक मुकदमों के बारे में छुपाया, जिसके कारण हिंदी बेल्ट के हजारों मतदाता अंग्रेजी भाषा में दागी प्रत्याशी का विज्ञापन होने के कारण उनके आरोपों और मुकदमों के बारे में ठीक से जान ही नहीं पाए। श्री शर्मा ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देशों का ठीक तरह से पालन करना चाहिए और दागी नेताओं से किनारा करना चाहिए। विद्यालय के छात्राओं और छात्र ने क्रमशः संध्या, उपासना, खुशबू, वंदना, नेहा, प्रिंस तिवारी, आकाश, पुनीत यादव, सुभेष वर्मा, अंशुल पाल, प्रांशु वर्मा ने दो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किए। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को सर्वाच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के निर्देशों को मानते हुए दागी नेताओं से अपना पल्ला छुड़ा लेना चाहिए। यह लोकतंत्र और समाज दोनों के हित में है। दूसरे प्रस्ताव में उन्होंने कहा कि यदि नोटा चुनाव जीते तो उस विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र का दोबारा चुनाव होना चाहिए, क्योंकि मतदाताओं ने उन सभी प्रत्याशियों को नकार दिया है। उन्होंने कहा इसके लिए संसद में एक कानून भी बनना चाहिए। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राम बहादुर प्रजापति ने कहा कि अच्छे और सच्चे जनप्रतिनिधियों को लाने के लिए मतदाताओं को सतत जागरूक करना होगा। उन्हें अपने जनप्रतिनिधियों के बारे में पूरी जानकारी रखनी होगी। उसकी विधायक विधि और बुंदेलखंड विकास निधि, जो लगभग चार करोड़ 85 लाख रुपए प्रति वर्ष होती है, इसके बारे में मतदाताओं को अपने ग्राम या मोहल्ले में प्रस्ताव बनाकर अपने मोहल्ले और गांव वालों के प्रस्ताव में हस्ताक्षर करवाकर चुनाव में वोट मांगने पर उन प्रत्याशियों से सहमति लेनी चाहिए। और जब वह विधायक बन जाएं तो उन्हें वहीं रजिस्टर दिखाकर जनदबाव बनाना चाहिए। क्योंकि बिना मांगे मां भी अपने बच्चे को दूध नहीं पिलाती। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक चंद्रभान, सुरेंद्र कुमार, अमित कुमार, श्रीमती सोनम देवी, रूद्र प्रताप सिंह, श्रीराम पाल ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य राम बहादुर प्रजापति ने तथा संचालन चंद्रभान ने किया। कार्यक्रम में एडीआर का साहित्य (पत्रक) भी बांटा गया। 


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