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Saturday, February 19, 2022

महाशिव रात्रि 1 मार्च

महाशिव रात्रि व्रत का पालन फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस बार यह पावन पर्व 1 मार्च  को मनाया जाएगा। 1 मार्च मंगलवार  होने से इस बार महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस साल चतुर्दशी तिथि 1 मार्च  को प्रात: 3 :16   से शुरू होकर अगले दिन यानी 2  मार्च  दिन बुधवार  को प्रात: 01 :00  तक रहेगी उसके बादअमावस्या तिथि  लग जाएगी ।  महाशिवरात्रि पर विशेष योग बन रहा है, जो साधना-सिद्धि के लिए शश योग है। इस दिन पांच ग्रहों की राशि पुनरावृत्ति भी होगी। शुभ संयोग - धनिष्ठा नक्षत्र में परिधि योग रहेगा धनिष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा प्रीति के बाद शिवयोग रहेगा इस साल की महाशिवरात्रि शिव योग में है. 01 मार्च को शिव योग दिन में 11:18 बजे से प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा. शिव योग 02 मार्च को प्रात: 08:21 बजे तक रहेगा.  मकर राशि में पंच ग्रही योग रहेगा मंगल शुक्र बुध और शनि के साथ चंद्र है  कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति रहेगी  राहु वृषभ  में  केतु  वृश्चिक राशि में रहेगा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। इसलिए इस दिन उनके विवाह का उत्सव मनाया जाता है  भगवान शिव कल्याण करने वाले औढरदानी कहलाते है। ये शीघ्र प्रसन्न हो जाते है। यह व्रत सभी वर्णो की स्त्री- पुरूश और बाल, युवा, वृद्ध के लिए मान्य है। शिवरात्रि व्रत सब पापों का शमन करने वाला है। इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव पूजन में स्नान के उपरान्त शिवलिंग का अभिशेक जल, दूध,दही घृत, मधु, शर्करा (पंचामृत) गन्ने का रस चन्दन, अक्षत, पुश्पमाला, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा इत्यादि  द्रव्यों से अभिशेक विशेश मनोकामनापूर्ति हेतु किया जाता है एवं ‘‘ऊँ नमः शिवाय’’ मंत्र का जाप करना चाहिए। शिवरात्रि में प्रातः एवं रात्रि में  चार प्रहर की शिव पूजन का विशेश महत्व है।


चार प्रहार की पूजा प्रारम्भ समय-प्र्रथम प्रहर सायंकाल 06ः07 , द्वितीय प्रहर रात्रि 09ः13 , तृतीय प्रहर मध्यरात्रि 12ः18  से चतुर्थ प्रहर प्रातः 03ः24  से प्रारम्भ होगा। निशिथ काल पूजा समय- रात 11ः54  से रात 12ः43  तक।


महाशिव रात्रि पर शिव अराधना से प्रत्येक क्षेत्र में विजय, रोग मुक्ति, अकाल मृत्यु से मुक्ति, गृहस्थ जीवन सुखमय, धन की प्राप्ति, विवाह बाधा निवारण, संतान सुख, शत्रु नाश, मोक्ष प्राप्ति और सभी मनोरथ पूर्ण होते ह्रै कुंडली में अशुभ ग्रह शान्त होते है।

महाशिवरात्रि कालसर्पदोष, पितृदोष शान्ति का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। जिन व्यक्तियों को कालसर्पदोष है उन्हें 8 और 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ मिलता है । राशि अनुसार अभिषेक 1. मेष- शहद और गन्ने का रस  2. वृषभ- दुग्ध, दही 3. मिथुन- दूर्वा से 4. कर्क- दुग्ध, शहद 5. सिंह- शहद, गन्ने के रस से 6. कन्या- दूर्वा एवं दही 7. तुला- दुग्ध, दही  8. वृश्चिक- गन्ने का रस, शहद, दुग्ध 9. धनु- दुग्ध, शहद  10. मकर- गंगा जल में गुड़ डालकर मीठे रस से 11. कुंभ- दही से  12. मीन- दुग्ध, शहद, गन्ने का रस

                   
ज्योतिषाचार्य एस. एस. नागपाल,  स्वास्तिक ज्योतिष केन्द, अलीगंज

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