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Tuesday, January 18, 2022

मासूम की हत्या व दुष्कर्म के दोषी पड़ोसी को फांसी

पॉक्सो एक्ट की अदालत ने महज 70 दिन में सुनाया जघन्य वारदात पर फैसला

अर्थ दंड की आधी राशि पीड़ित परिवार को देने के भी अदालत ने दिए निर्देश 

फतेहपुर, शमशाद खान । तीन साल की मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में मंगलवार पॉक्सो एक्ट की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। वारदात के दोषी पड़ोसी को फांसी की सजा सुनाते हुए अर्थंदंड की आधी राशि, पीड़ित परिवार को देने के आदेश दिए।  महज 70 दिन के अंदर सुनाए गए इस फैसले को जानने के लिए सारा दिन न्यायालय परिसर मेंं गहमागहमी का माहौल रहा।

सजा के बाद न्यायालय से दोषी को ले जाते पुलिसकर्मी।

15 अक्टूबर 2021 को खागा कोतवाली क्षेत्र मेंं इस वारदात को अंजाम दिया गया था। जिस पर इलाकाई पुलिस ने 22 अक्टूबर को पास्को एक्ट की अदालत में आरोप पत्र पेश किया था। इस पर अदालत ने अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाहों के बयान इंद्राज किए थे। इससे पीड़ित परिवार के न्याय की आस पूरी होने में मदद मिली। मंगलवार इस मामले की सुनवाई पॉस्को एक्ट अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खान ने की। अदालत ने तीन साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पड़ोसी दिनेश पासवान को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने मासूम के साथ दुष्कर्म व हत्या के साथ ही अपहरण और शव को छुपाने को जघन्य अपराध की श्रेणी में माना। जिसमें न्यायाधीश ने दोषी पड़ोसी को फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाने के साथ 75 हजार रूपए अर्थदंड के रूप में देने का आदेश ि दिए। विशेष लोक अभियोजक सहदेव गुप्ता ने बताया कि अभियुक्त दिनेश के लिए फांसी की सजा की अपील की थी। अदालत ने मासूम बच्ची के साथ जघन्य अपराध को क्रूरतम अपराध मानकर फांसी की सजा सुना करके पीड़ित परिवार को इंसाफ दिया। 

लगातार हुई सुनवाई

फतेहपुर। पॉक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक सहदेव गुप्ता ने बताया कि मासूम से दरिंदगी और हत्या मामले की सुनवाई लगातार की गई। विशेष अदालत में 22 अक्टूबर को आरोप पत्र पेश होने के बाद मामले की सुनवाई रिकॉर्ड 70 दिन में पूरी की गई। अदालत ने लगातार सुनवाई कर गवाह के बयान कराए। आखिरकार मंगलवार सजा के प्रश्न पर बहस के बाद अभियुक्त दिनेश पासवान को फांसी की सजा सुना दी गई। 

पुलिस की पैरवी से तीन महीने में सजा-एसपी

फतेहपुर। एसपी राजेश कुमार सिंह ने 70 दिन के अंदर आए फैसले में पुलिस की भूमिका की सराहना की। कहा कि पुलिस के लिए यह केस बड़ा चैलेंज था। पर्याप्त साक्ष्य इकट्ठा किए गए। अच्छी विवेचना हुई। सात दिन के अंदर चार्ज सीट पेश की गई। डीएनए से भी वारदात के खुलासे में मदद मिली। न्यायालय के फैसले से बच्ची की आत्मा को शांति मिलेगी। 


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