नटबली मजार पर लगा आशिकों का मेला - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Friday, January 14, 2022

नटबली मजार पर लगा आशिकों का मेला

मोहब्बत की लंबी उम्र के लिए नटबली समाधि पर प्रेमी जोड़ों ने टेका मत्था, चढ़ाई रेवड़ी 

अपनी प्रेमिका को पाने के लिए कुर्बान हो गया था नट, उसकी समाधि पर लगता है मेला 

शनिवार को भी नटबली समाधि पर लगाया जाएगा मेला 

बांदा, के एस दुबे । भूरागढ़ स्थित नटबली समाधि पर शुक्रवार को मेले का आयोज हुआ। इसे आशिकों का मेला भी कहा जाता है। मेले में पहुंचे प्रेमी जोड़ों ने नटबली समाधि पर मत्था टेका और रेवड़ी चढ़ाने के बाद हाथ जोड़कर अपनी मोहब्बत की लंबी उम्र मांगी। इसके पूर्व मकर संक्रांति के मौके पर सुबह लोगों ने नदी में स्नान किया और पूजा अर्चना करने के बाद खिचड़ी का दान भी किया। मेले में उमड़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए पुलिस की ड्यूटी भी लगाई गई थी और तमाम इंतजामात भी किए गए थे। 

नटबली समाधि पर बैठा पुजारी

अबकी बार मकर संक्रांति का पर्व दो दिन मनाया गया है। पहले दिन शुक्रवार को लोगों ने त्योहार मनाया और मेले का लुत्फ उठाया। लेकिन ज्यादातर लोग शनिवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे। पहले दिन शुक्रवार को कुछ लोगों ने केन नदी में पहुंचकर श्रद्धा की डुबकी लगाई और पूजा पाठ किया। मेला देखने के लिए शहर समेत दूर दराज से लोग जुटे। लोगों ने प्राचीन भूरागढ़ किला घूमकर आनंद उठाया। महिलाओं और बच्चों ने मेले का जमकर
मेले में उमड़ी लोगों की भीड़

लुत्फ उठाया। उधर मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। मटौंध व भूरागढ़ समेत आसपास थानों की फोर्स तैनात रही। वहीं शहर के प्रमुख बामदेवेश्वर मंदिर, संकट मोचन मंदिर, महेश्वरी देवी, काली देवी, चौसठ जोगिनी मंदिर के अलावा जिले भर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही। लोगों ने मंदिरों में बैठे गरीबों को खिचड़ी दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। उधर केन नदी तट पर बने नटबली मंदिर में भी
नौका विहार करते लोग

मेला लगा रहा। लोगों ने श्रद्धा से माथा टेक कर मंगलकामना की। युवा नटबली प्रेमी की कहानी से जुड़े इस मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग शरीक होते हैं। यहां दो मंदिर हैं। बुजुर्ग बताते हैं किएक प्रेमी नटबली की और दूसरा मंदिर उसकी प्रेमिका किलेदार नोने अर्जुन सिंह की पुत्री का है। वर्ष 1850 में मकर संक्रांति के दिन प्रेमिका के पिता की शर्त पूरी करते समय सूत की रस्सी पर नदी पार कर रहे नटबली प्रेमी की गिरकर मौत हो गई थी। मेले में उमड़ी भीड़ की सुरक्षा को लेकर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। इस मेले में नवविवाहित जोड़ों के अलावा प्रेमी-प्रेमिकाओं की ज्यादा भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा यूपी और एमपी के तमाम गांवों के सैकड़ों लोग मेले में नट समाधि पर मत्था टेकते हैं और अपने प्यार की लंबी उम्र की कामना करते हैं। समाधियों में प्रसाद के तौर पर रेवड़ी चढ़ाई जाती है। 

केन नदी में मकर संक्रांति पर्व पर स्नान करते हुए लोग

1857 के शहीदों को समाजसेवियों किया नमन

बांदा। भूरागढ किले में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में देश के लिये प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के स्थल में मोमबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजलि अर्पित की गई। जिससे वहां का पूरा वातावरण भाव विभेर हो गया। शहर के तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि समेत समाजसेवियों ने शुक्रवार को जनपद के एतिहासिक


दुर्ग भूरागढ़ में 1857 के प्रथम युद्ध में हुये शहीदो की याद में श्रद्धाजलि दी। इस दौरान समाजसेवियों ने शहीदो को पुष्पाजलि देकर उनकी कृतज्ञता ज्ञापित की। 


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages