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Thursday, January 13, 2022

साधन से नहीं मिलता सुख : नवलेश

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। श्रीराम की तपोस्थली कामतानाथ पर्वत में बिहारा ग्राम पंचायत स्थित पेरातीर के हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित कथा मैं कथा व्यास नवलेश दीक्षित ने कहा कि भगवान संदेश देते हैं कि सदैव बड़ों से पूछ कर आगे बढ़ें। तुलसीदास कहते हैं कि भगवान ने वनवास को आत्मसात कर लिया है। देवलोक की तरह कुटी में रहे हैं। जीवन मे साधन से सुख नही मिलता है। बताया कि निषादराज गुह से भगवान यमुना तट से विदा लेते हैं। वापस आकर देखते हैं कि सुमंत गंगा किनारे बैठे एकटक दक्षिण दिशा को निहार रहे हैं। समझाकर उन्हें अयोध्या भेजते हैं। सुमंत विलखते हुए अयोध्या पहुंचते हैं। सोचते हैं कि कैसे महाराज को मुह दिखाऊंगा। इधर महाराज दशरथ की दशा

आचार्य नवलेश दीक्षित।

खराव है। प्राणहीन जैसे पड़े हैं। सुमंत के आने की सूचना पाकर महाराज उठ बैठे। मेरे राम कहां हैं। सुमंत पूरी बात बताते हैं। दशरथ के प्राण कंठ में अटक जाते हैं। कौशल्या संभालती हैं। दशरथ श्रवण की मृत्यु और शाप की बात रानियों से बताते हैं। दशरथ छह बार राम कह प्राण त्याग दिए। कथा प्रवक्ता ने बताया कि जीयत मरत दशरथ जस, जीयत राम, राम विरह करि। यही मनुष्य के जीवन का परम लक्ष्य है। सब कुछ भगवान को सौंप दीजिए। अर्थात कर्तव्य का पालन किया जाये। धर्म सम्मत कर्तव्य का परिणाम अच्छा ही होगा। इस मौके पर कथा के आयोजक भोलेराम शुक्ला, मुख्य यजमान रमेश शुक्ला, धर्मपत्नी हीरामणि सहित बाबूलाल पांडेय, अरुण त्रिपाठी, श्यामलाल दुबे आदि श्रोतागण मौजूद रहे।


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