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Friday, January 14, 2022

प्रभु श्रीराम के वनवास काल का सुनाया मार्मिक प्रसंग

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। ग्राम पंचायत बिहारा में पेरातीर के हनुमान मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन कथा व्यास भागवतरत्न नवलेश दीक्षित ने कहा कि भगवान श्रीराम जब वनवास को निकले तो भैया भरत बड़ी सेना लेकर चित्रकूट पहुंचे। भरत जी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अयोध्या लौट चलो, मैं वन को चला जाता हूं। रामजी ने कहा पिता के वचनों का आदर करो। 14 वर्ष के बाद अयोध्या लौट आएंगे। प्रभु श्रीराम ने भरत जी के पांव के छाले देखे तो उन्होंने अपनी पावड़ी भरत जी को दे दी और भरत जी ने वह पावड़ी पहनने के बदले प्रसाद बाटकर सिर पर रख लिया। उन्होंने अयोध्या लौटकर राज गद्दी पर प्रभु राम की पावंड़ी रख दी। वह भी राजमहल छोड़कर कुटिया में रहने चले गए। चित्रकूट में जहां श्रीराम, भरत से मिले हैं वहां आज भी प्रभु श्रीराम के चरणों के निशान बने है।

कथा प्रवक्ता नवलेश दीक्षित।

आचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि चित्रकूट से भगवान श्रीराम सबरी के यहां पहुंचे। वहां सबरी जो वर्षों से प्रभु राम का आने का इंतजार कर रही थी वह इंतजार खत्म हुआ और सबरी ने अपने अश्रुओं से प्रभु श्रीराम के चरण धो डाले। चख-चख कर मीठे बेर खिलाए। अयोध्या कांड, अरण्य कांड, सुंदर कांड, किष्किंधा कांड, लंका कांड विस्तार से वर्णन कर सुनाया। माता सीता से हनुमान जी मिलने लंका पहुंचे और प्रभु राम का संदेश माता सीता को सुनाया और माता सीता की अंगूठी लेकर श्रीराम के पास पहुंचे। आचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि रामायण, धर्म शास्त्रों, माता पिता के प्रति श्रद्धा है तो बहुत ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। श्रीराम कथा के आयोजक भोलेराम शुक्ला, मुख्य यजमान रमेश शुक्ला उनकी धर्मपत्नी हीरामणि व श्रोतागण मौजूद रहे।


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