भाकियू ने मनाया विश्वासघात दिवस, सौपा ज्ञापन - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Monday, January 31, 2022

भाकियू ने मनाया विश्वासघात दिवस, सौपा ज्ञापन

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। संयुक्त किसान मोर्चा के आवाहन पर भारतीय किसान यूनियन ने जिलाध्यक्ष राम सिंह राही के नेतृत्व में विश्वासघात दिवस मनाया। इस दौरान राष्ट्रपति संबोधित ज्ञापन सदर उप जिलाधिकारी पूजा यादव को सौपा है। 

जिलाध्यक्ष ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के किसानों ने केंद्र सरकार के काले कृषि कानूनो को रद्द करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित अन्य किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाया। जिसके चलते कृषि कानूनों को रद्द किया गया। 21 नवंबर को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर बकाया छह मुद्दों की तरफ  ध्यान आकृष्ट कराया। जिसके जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव ने नौ दिसंबर को पत्र के माध्यम से कुछ मुद्दों पर सरकार की ओर से आश्वासन, आंदोलन को वापस लेने का आग्रह किया। जिस पर भरोसा कर मोर्चा ने 11 दिसंबर से आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया। बताया कि देश के किसानों के साथ धोखा हुआ है। सरकार ने उनमें से कोई वादा पूरा नहीं किया है। इसलिए विश्वासघात दिवस मनाने का फैसला लिया है। सौपे गए ज्ञापन में माग की है कि अन्नदाता के हितों की रक्षा करते हुए सरकार के किए गए वादे को पूरा कराया जाए। किसानों का विश्वास सरकार न तोड़ें। कहा कि मांगें पूरी न होने पर किसान आंदोलन दुबारा शुरू करने को बाध्य होंगें। इस मौके पर तहसील अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह, राजकिशोर सिंह, तीरथ प्रसाद सिंह, विनय कुमार त्रिपाठी, उदय नारायण सिंह, ओम नारायण गर्ग, नरेश सिंह, रामेश्वर सिंह, जसवंत चौहान, अर्जुन सिंह, कमलेश कुमार, रमेशचंद्र पाठक, नरेश तिवारी, बद्री सिंह, सन्तगोपाल, भारतिया, शिव सिंह, छेदीलाल सिंह, अमित कुमार आदि मौजूद रहे।

ज्ञापन सौपते पदाधिकारी।

कथनी और करनी में है अंतर : मिश्र

चित्रकूट। उप्र किसान सभा कार्यकर्ताओं ने कार्यकारिणी सदस्य रुद्रप्रसाद मिश्र एड की अगुवाई में राष्ट्रपति संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा है। ज्ञापन में कहा कि प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर विश्वासघात दिवस मनाया जा रहा है। किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन में किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। जिन्हें वापस किया जाए। आश्वासन के बावजूद वादे पूरे नहीं किए गए। कथनी और करनी में अंतर है। लखीमपुर खीरी में रिपोर्ट में षडयंत्र करने की बात स्वीकार करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। किसानों को ही फंसाने का कार्य किया जा रहा है। अस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते से डेयरी किसान के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। जैविक सम्पदा को खतरा है। नए कानून से किसानों को नुकसान है। इस मौके पर उमादत्त तिवारी, शिवमोहन यादव, शिवम, पूनम, शिव प्रसाद विश्वकर्मा, अजय सिंह, राम प्रसाद विश्वकर्मा, लल्लूराम, बिटटी आदि मौजूद रहे।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages