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Wednesday, January 12, 2022

मकर संक्रान्ति 14 और 15 जनवरी

सूर्य के मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण कहलाता है। शास्त्रानुसार उत्तरायण देवताओं का दिन है। सूर्य के मकर राशि के प्रवेश को मकर संक्रान्ति कहते है। मकर संक्रान्ति प्रातः सूर्योदय के बाद पुन्यकाल में पवित्र स्थानों पर स्नान दान का महत्व होता है। इस पुन्यकाल में स्नान, सूर्य उपासना , जप , अनुष्ठान, दान-दक्षिणा करते है। इस अवसर पर काले तिल, गुड़ , खिचड़ी, कम्बल, लकड़ी अािद का दान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर पवित्र नदियों एवं गंगा सागर में  मेला लगता है। मकर संक्रांति के बाद खरमास के कारण रूके हुए मांगलिक कार्य प्रारम्भ होते है, इस बार कुछ पंचागों के अनुसार 14 जनवरी तो कुछ के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना शुभ है। इसलिए कुछ लोग शुक्रवार तो कुछ लोग शनिवार को पूजा-पाठ व दान-पुण्य करेंगेे । मार्तण्ड, शताब्दी पंचाग के अनुसार 14 जनवरी और हृषिकेश और महावीर के अनुसार 15 जनवरी को मनाना शुभ है  महावीर पंचांग के अनुसार 14 जनवरी की  रात्रि 8 :49 पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो संक्रांति होने पर  पुण्यकाल  अगले दिन मान्य होता है इस कारण मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, मार्तण्ड, शताब्दी पंचाग के अनुसार 14 जनवरी को सूर्य दिन में 2:43 उत्तरायण होंगे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, । पुण्यकाल 14 जनवरी को दिन में  2:43 से सांयकाल 5:34 तक रहेगा.



  • मकर राशि के सूर्य के साथ ही पुण्यकाल में स्नान व दान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होता है  पुण्यकाल में स्नान के बाद तिल का होम करने और चूड़ा, तिल, मिठाई, खिचड़ी सामग्री, गर्म कपड़े दान करने व इसे ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

  • मकर संक्रांति के दिन रोहणी नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है। यह खास संयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा।  सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन 29 वर्ष बाद 3 ग्रहों का संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध और शनि तीन ग्रहों की युति से त्रिग्रही योग बनेगा।

  • मकर संक्रान्ति के साथ अनेक पौराणिक तथ्य जुड़े हुए हैं जिसमें  महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का दिन ही चुना था। कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है।

  • मकर संक्रान्ति पर्व उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के नाम से , तमिल में पोंगल , राजस्थान और गुजरात में उत्तरायण , हरियाण, पंजाब में माघी और पूर्वी भारत में भोगाली बिहू  के नाम से मनाया जाता है।

  • ज्योतिषानुसार अगर कंुडली में सूर्य शनि का दोष है तो  मकर संक्रान्ति पर्व पर सूर्य उपासना से पिता पुत्र के खराब संबंध अच्छे होते है । सूर्य के अच्छे प्रभाव से यश, सरकारी पक्ष और पिता से लाभ ,आत्मविश्वास में वृद्धि , सिर दर्द, आँखों के रोग, हडड्यिों के रोग , हृदय रोग आदि रोगों से भी आराम मिलता है-

मकर सक्रान्ति में राशि अनुसार दान

मेषः- गुड़, मूंगफली दाने, तिल     वृषः- दही, तिल, सफेद वस्त्र     मिथुनः- मूंग दाल, चावल, कम्बल   कर्कः- चावल, चांदी, सफेद तिल   सिंहः- तांबा, गुड़, सोना

कन्याः- खिचड़ी, कंबल, हरा वस्त्र   तुलाः- शक्कर, कंबल, सफेद वस्त्र   वृश्चिकः- मंूगा, लाल वस्त्र, तिल    धनुः- पीला वस्त्र , खड़ी हल्दी, सोना

मकरः- काला कंबल, तेल, काला तिल   कुंभः- काला वस्त्र, काली उड़द, खिचड़ी , तिल    मीनः- चने की दाल, चावल, तिल, पीला रेश्मी वस्त्र

- ज्योतिषाचार्य एस0एस0 नागपाल , स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ


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