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Thursday, December 2, 2021

जन्मजात विकृति क्लब फुट से मिल सकती है मुक्ति : डा. बलेठिया

आरबीएसके के तहत मुफ्त इलाज से ठीक हो रहे बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैर 

तीन बच्चों को चढ़ाया  प्लास्टर, तीन  को पहनाए गए विशेष जूते

जिला अस्पताल में आयोजित हुआ शिविर 

बांदा, के एस दुबे । कुछ बच्चों के पैर जन्म से  मुड़े होते हैं और उम्र बढ़ने के साथ ही उनकी यह  विकृति बढ़ती जाती है। ऐसे बच्चों के इलाज के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) व  मिरेकल फीट इंडिया संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जिला अस्पताल में शिविर आयोजित हुआ। इसमें नौ  बच्चों के अभिभावक इलाज कराने पहुंचे, जिनमें तीन  बच्चों को प्लास्टर चढ़ाया  गया। तीन  बच्चों को विशेष जूते पहनाए गए। 

जिला अस्पताल में बच्चे के पैरों पर प्लास्टर करते चिकित्सक।

जिला अस्पताल में आर्थापैडिक  डा. विकास दीप बलेठिया ने बताया कि क्लब फुट ( मुड़े हुये पैर) एक  जन्मजात विकृति है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के दोनों या एक पैर या पैर के पंजे  मुड़े  होते हैं। इस वजह से बच्चे को चलने व खड़े होने में दिक्कत होती है, लेकिन परिजनों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर पहचान होते ही बिना ऑपरेशन के क्लब फुट का इलाज संभव है।  

 मिरेकल फीट इंडिया के जिला समन्वयक आशीष मिश्रा ने कहा कि यह  विकृति इतनी भी सामान्य नहीं हैं। जागरूकता के अभाव के कारण आसानी से सही होने वाली यह विकृति स्थाई दिव्यांगता का कारण बन जाती हैं। ऐसे में बच्चों का जितनी जल्दी हो सके उपचार कराया जाना चाहिए। बच्चे के जन्म के तीन सप्ताह के भीतर यदि इलाज शुरु हो जाए तो अच्छा रहता है। इस अवधि में मांसपेशियां ज्यादा लचीली होती हैं और उनके ठीक होने की संभावना भी ज्यादा रहती हैं। उन्होनें कहा कि उपचार,सहायता या परामर्श के लिए मोबाइल नंबर- 7208820487 पर संपर्क कर सकते हैं। जिला अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को ऐसे बच्चों का स्क्रीनिंग व इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी से अब तक 20 बच्चों का इलाज कर ठीक किया जा चुका है।  

शिविर में बच्चों संग मौजूद महिलाएं और चिकित्सकगण

हमीरपुर जनपद के सिसोलर अंतर्गत भैंसमरी गांव की रहने वाली विनीता ने बताया कि उनकी  ससुराल कन्नौज है,  लेकिन वह मायके में ही रह रही हैं। उन्होने बताया कि डेढ़ माह पूर्व उन्होंने पुत्र को जन्म दिया है। बेटे के दोनों पैर मुड़े देखकर वह परेशान हो गई। हमीरपुर अस्पताल में दिखाने पर उन्होंने मंडल मुख्यालय बांदा में इसके इलाज की बात कही। वह अपने बेटे को लेकर 17 नवंबर को आई थी। यहां पर बच्चे के पैरों में प्लास्टर चढ़ाया गया था। अब दूसरा प्लास्टर किया गया है। पहले से अब बच्चे के पैरों में काफी सुधार देखने को मिला है। अब पूरी उम्मीद है कि मेरा बच्चा औरों की तरह अपने दोनों पैरों पर ठीक से चल सकेगा। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संपूर्णानंद मिश्रा, डीईआईसी मैनेजर वीरेंद्र प्रताप सहित स्वास्थ्य कर्मी व आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।


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