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Friday, December 3, 2021

जो बिके वह प्रसाद नहीं, बांटा जाने वाला है प्रसाद : मोरारी बापू

दीनदयाल परिसर में हुई सातवें दिन की रामकथा

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। सनातन आस्था का केंद्र भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूटधाम में सुप्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने दीनदयाल शोध संस्थान के सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय परिसर मेंं आयोजित 868वीं रामकथा के सातवें दिन कथा रसपान कराया। इसके पूर्व अमेरिका में कोविड के दौरान मानस सीता पर आधारित कथा व स्विट्जरलैंड में सुनाई गई मानस स्वर्ग राम कथा की पुस्तक का विमोचन बापू ने किया।

कथा सुनाते संत मोरारी बापू।

संत मोरारी बापू ने कथा की शुरूआत रामनाम धुन और संगीतमय चौपाइयों के साथ की। उन्होंने मानसिक रूप से कामदनाथ भगवान की परिक्रमा करते हुए यहां उपस्थित प्रकट-अप्रकट चेतना, सभी संत समाज को व्यासपीठ से प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि यात्रा चाहे संत की हो, चाहे भगवंत की या हनुमंत की हो मानस में पांच विघ्न निश्चित है। कहा कि बेचा जाए वह प्रसाद नहीं, बांटा जाए वह प्रसाद है। बापू की कथा सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। गौरतलब है कि संत मोरारी बापू ने 868वीं राम कथा का शुभारंभ 27 नवंबर को कारसेवक पुरम अयोध्या धाम से शुरू किया। अयोध्या धाम के विस्तार में परिक्रमा करते हुए प्रतिदिन अलग-अलग स्थानों पर कथा सुनाई जा रही है। छठवें दिन की राम कथा बाल्मीकि आश्रम लालापुर में हुई। सातवें दिन दीनदयाल शोध संस्थान के परिसर में आयोजित की गई। कथा का समापन पांच दिसंबर को नंदीग्राम अयोध्या में किया जाएगा।


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