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Monday, December 13, 2021

भक्ति से बढ़ कर है निष्काम कर्म : शास्त्री

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। मुख्यालय के जगदीशगंज मोहल्ले में ब्रजगोपाल त्रिपाठी के आवास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य शिवदीप शास्त्री ने बताया कि किसी शास्त्र की शुरुआत की जाती है तो उसमें किसी देवी देवता की स्तुति की जाती है, लेकिन श्रीमद्भागवत में किसी देवी देवता की स्तुति नहीं की गई। बल्कि भागवत ने सत्य का प्रतिपादन किया। भागवत से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन तभी सार्थक है जब ज्यादा से ज्यादा सत्य बोले, क्योंकि सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। असत्य से बढ़कर कोई पाप नहीं है। मनुष्य का भागवत सुनना तभी सार्थक है जब वह अपने जीवन में सत्य बोलने का संकल्प लें। कपिल मुनि का सुंदर

भागवत सुनाते कथा व्यास।

एवं सजीव चित्रण प्रस्तुत करते हुए बताया कि समाज में कपिल मुनि का आदर्श भी प्रस्तुत किया गया। जिसे सुनकर मन से यदि अपने जीवन में अपनाएं तो उसका जीवन आदर्श बन सकता है। मनुष्य को अपने जीवन में चिंतन मनन और अध्ययन के पश्चात प्रभु के चरणों को आत्मसात करना चाहिए। आत्मा से किया गया कार्य ही दूरगामी परिणाम देता है, क्योंकि ज्ञान से बढ़कर भक्ति है और भक्ति से बढ़कर निष्काम कर्म है। मानस चौपाई आई है कि कर से कर्म करहु विधि नाना। मन राखहु जहां कृपा निधाना। काम भी करते रहे, लेकिन मन भगवद चरणों में लगा रहे तो कथा का फल भी देने वाला हूं। कथा के बाद श्रोतागणों के मध्य प्रसाद वितरित हुआ। 


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