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Friday, December 17, 2021

सिमौनीधाम भण्डारा : आखिरी दिन तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने छका प्रसाद

साधु-संतों को भोजन कराने के बाद कंबल और अचला भेंटकर दी गई विदाई 

बजरंग बली और बाबा अवधूत के जयकारों से गूंजती रही अवधूत नगरी 

बबेरू (बांदा), के एस दुबे । बजरंगी के दूत बाबा अवधूत की कृपा से सिमौनीधाम भण्डारे के तीसरे और आखिरी दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह पूजा-अर्चना के बाद साधु-संतों को भोजन कराया गया। इसके बाद उन्हें कंबल और अचला भेंट करते हुए अवधूत महाराज से विदाई दी। इसके बाद श्रद्धालुओं के भोजन ग्रहण करने का सिलसिला शुरू हुआ। आखिरी दिन तकरीबन तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भंडारे में पूड़ी, सब्जी, मालपुआ का भरपेट प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही भण्डारा और मेला परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी में लोगों ने खरीददारी की। खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया और विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। 

सिमौनीधाम भण्डारे में आखिरी दिन प्रसाद ग्रहण करते साधु संत

बबेरू क्षेत्र के ग्राम सिमौनी पर मौनीबाबा धाम में तीन दिवसीय विशाल भंडारा एवं राष्ट्रीय मेला प्रदर्शनी के आखिरी दिन सोमवार को स्वामी अवधूत महाराज ने हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के बाद साधु संतों को पहली पंगत में
भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु

भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को पंगत में बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराने का सिलसिला शुरू हुआ। जिस तरह से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड पडा है, लोगो की श्रद्धा देखने लायक थी। आसपास गांवों सहित सुदूर क्षेत्र के आस्थावान श्रद्धालु दोपहिया, चौपहिया वाहनों व ट्रैक्टरों से सिमौनी धाम की ओर बढ़ रहे थे। भंडारे के आखिरी दिन तकरीबन तीन लाख श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही रामलीला मैदान से लेकर
साधु संतों की कंबल वितरण श्रमदानी सेवक

मेला प्रदर्शनी, भंडारा स्थल में इस कदर भीड बढी कि जहां देखो वहां भीड़ ही दिखाई दे रही थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल होते हुए भी स्वयंसेवी एनसीसी, स्काउट के छात्रों ने व्यवस्था को कहीं डगमगाने नही दी। महिलाओं एवं पुरूषो के लिए अलग-अलग बने भोजन प्रसाद पंडालों में सुबह से लेकर देर रात तक खालीपन नही दिखा। श्रमदानी सेवको का उत्साह भी देखने लायक था। प्रसाद की आपूर्ति करने वाले स्वयंसेवक रेल की तरह
उपदेश देते बाबा अवधूत

सरपट दौड़ लगाते हुए काउण्टरों में पहुंचाते रहे। इधर प्रसाद ग्रहण कर चुके श्रद्धालुओं की पंगत उठी नही कि सफाई कर्मी तुरंत सफाई करते थे और पंडाल साफ होते ही श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाते थे। दोपहर बाद फिर से साधु सन्यासियो ंको पंगत में बैठाकर प्रसाद ग्रहण कराया गया और उन्हे विदाई के रूप में कंबल एवं अचला देकर विदा किया गया। दिन भर चले भंडारे में किसी को प्रसाद मिल पाता था किसी तक प्रसाद नही पहुंच पाता
रामलीला मंचन करते कलाकार

था। इस कदर भीड को प्रसाद परोसने में श्रमदानी सेवक भी थक जाते थे। महिलाएं पूडी बेलने का श्रमदान करने के बाद प्रसाद ग्रहण करती रहीं। भंडारें के आखिरी दिन पूडी सब्जी, मालपुआ, नमकीन, पेठा का प्रसाद अनुमान से अधिक श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। 


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