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Tuesday, December 14, 2021

कलश यात्रा के साथ हिन्दू एकता महाकुंभ का शुभारंभ

जगदगुरु के नेतृत्व में निकली विशाल शोभा यात्रा

जय जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजी धर्मनगरी, जगह-जगह हुई पुष्प वर्षा

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान श्रीराम की वनवास स्थली चित्रकूट में तीन दिवसीय हिंदू एकता महाकुंभ की शुरूआत मंगलवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हुई। जिसमें बड़ी संख्या में साधू संत सहित महिलायें मौजूद रहीं। मंदाकिनी के जल का अर्पण कर यात्रा में शामिल पदमविभूषित जगदगुरु रामभद्राचार्य के नेतत्व में चित्रकूटधाम की जय, जय श्री राम के उच्चारण के साथ सभी का उत्साह देखते ही बना।  यात्रा का समापन बेडीपुलिया के पास स्थित कार्यक्रम स्थल पर हुआ। जहां पर जगद्गुरू ने महाकुंभ को कई मायनों में एतिहासिक बताया। कहा कि महाकुंभ में पहले ही दिन से मातृशक्ति हिंदू समाज को एक होने के लिए संदेश देने का काम किया है।

कलश यात्रा का नेतृत्व करते जगदगुरु

धर्मनगरी स्थित रामघाट के निर्मोही अखाड़ा के पास से ढोल नगाड़ों के साथ कलश यात्रा निकली जो लगभग तीन किमी के दायरे में फैली रही। जिसमें कालेज के छात्र-छात्राएं शामिल रहे। आगे आगे साधू संत चल रहे थे। उनके पीछे हजारों की संख्या में महिलायें व छात्राएं कलश लेकर चल रही थी। बीच बीच में नृत्य भी कर रही थीं। कलश यात्रा के साथ कई देवताओं के अलावा गोस्वामी तुलसीदास, महर्षि वाल्मिकि की कई झांकियां भी शामिल रहीं। खुद जगदगुरु ट्रैक्टर पर बैठकर यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ जानकीकुंड अस्पताल के निर्देशक डा. बीके जैन भी मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक आचार्य रामचंद्र दास ने शोभा यात्रा में शामिल भक्तों का हौसला बढ़ाया। शोभा यात्रा का कई स्थानों पर भक्तों ने रोककर स्वागत किया। कई जगह पुष्प वर्षा भी की गई।

ऐतिहासिक होने जा रहा महाकुंभ : जगद्गुरू

-मातृ शक्ति की तादाद ने कराया एहसास

चित्रकूट। तीन दिवसीय महाकुंभ कार्यक्रम की शुरूआत होने पर जगद्गुरू रामभद्राचार्य ने कहा कि हिंदू एकता महाकुंभ ऐतिहासिक होने जा रहा है। जिसमें पहले ही दिन मातृ शक्ति की संख्या ने इसका एहसास करा दिया है। राजनीतिक दलों के नेताओं को भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इतना बड़ा महाकुंभ कैसे संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में देश के प्रमुख संतों के साथ राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सहित कई हस्तिया शामिल होने जा रही है। जिनके विचार सुनने के लिए सभी हिंदू समाज के लोग शामिल हों।

शामिल मातृशक्ति।

निशानों के साथ शामिल हुए साधू संत

चित्रकूट। तीन दिवसीय मेला में निर्मोही अखाड़ा के साथ अपने अपने निशान के साथ बड़ी संख्या में साधू संत शामिल हुए। जिन्होंने कई स्थानों पर करतब दिखाये। इसके साथ ही बांदा जिले की देवारी टीम भी आकर्षण का केंद्र रही। जिन्होंने अपने खेल का प्रदर्शन किया। एनसीसी व आजाद हिंदू फौज के गाइडों के साथ कालेजों के छात्र-छात्रायें भी शामिल रहीं।


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