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Saturday, December 18, 2021

पंचतत्व में विलीन हुए कैप्टन बाबा

जिले में सबसे पहले उठाई थी बुंदेलखंड अलग राज्य की आवाज

बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड अलग राज्य की आवाज को मुखरता से उठाने वाले कैप्टन सूर्यप्रकाश मिश्र उर्फ कैप्टन बाबा का शुक्रवार की दोपहर लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके परिजनों और ईष्टमित्रों के साथ समर्थको में कोहराम मच गया। कैप्टन बाबा का नाम बुंदेलखंड पृथक राज्य की आवाज के रूप में सदैव जाना जाएगा। 

कैप्टन बाबा (फाइल फोटो)

शुक्रवार को कैप्टन बाबा की सांसों के साथ ही जिले में बुंदेलखंड पृथक राज्य आंदोलन की आवाज भी थम सी गई। उनके निधन से शोक लहर दौड़ गई। कैप्टन बाबा ने ही जिले के युवाओं को एकत्र कर सबसे पहले बुंदेलखंड राज्य के आंदोलन की अलख जगाई थी। वह लंबे समय से बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष और केंद्रीय उपाध्यक्ष थे। उनकी एक आवाज पर जिले के युवा सड़क पर उतर जाते थे। वर्ष 2019 में प्रयागराज के महाकुंभ में उन्हें सार्वभौम सतानत धर्म महासभा के तत्वावधान में वामदेव पीठाधीश्वर जगद्गुरु की उपाधि से नवाजा गया था। कैप्टन बाबा का शिक्षा के क्षेत्र में भी खासा जुड़ाव था। वह बच्चों को सस्ती शिक्षा मुहैया कराने के लिए चिंतित रहते थे। हाल ही में वह लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गए और उपचार के दौरान उन्होंने शुक्रवार को अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज संगम तट पर किया गया। उनके सुपुत्र प्रभात मिश्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनके साथ आंदोलन से जुड़े साथियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सपने के रूप में बुंदेलखंड पृथक राज्य की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।


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