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Monday, December 13, 2021

रातों रात नहीं बने मकान, फंसेंगी कई अफसरों की गर्दन!

बहादुरपुर खागा में वन विभाग की भूमि पर कब्जा का मामला

बीते दो साल से चला आ रहा वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा  

खागा/फतेहपुर, शमशाद खान । तहसील क्षेत्र के बहादुरपुर में वन विभाग की दो हेक्टेयर से अधिक जमीन पर कब्जा करके घर बनाने वालों से जमीन खाली कराने का आदेश आने के बाद से वन विभाग के अधिकारी सकते में हैं। वन विभाग के अधिकारी हो या फिर तहसील प्रशासन के अफसर किसी के पास इतनी बड़ी धांधली कैसे हुई, इस बारे में कोई सही जवाब नहीं है। विभागीय कर्मचारी इस मामले में किसी प्रकार की बयानबाजी से बच रहे हैं। वहीं सूत्रों का कहना था रातों रात सैकड़ों मकान नहीं बन सकते हैं। दबाव व प्रभाव में आकर यह खेल हुआ है। जिसमे निष्पक्ष जांच हो तो कई जिम्मेदारों की गर्दन फंसेंगी। 

वन विभाग की भूमि पर बने मकान।

वर्ष 2019-2020 से वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण का मामला चला आ रहा है। विधान परिषद में 17 दिसंबर 2019 में अवैध कब्जा का मामला उठाए जाने के बाद से जिला प्रशासन हरकत में आया था। तहसील प्रशासन के निर्देश पर राजस्व, नगर पंचायत व वन विभाग की संयुक्त टीमों ने जमीन खोजने के लिए अलग-अलग गाटा संख्या की पैमाइश की। राजस्व कर्मियों ने वन भूमि की पैमाइश करते हुए अवैध कब्जेदारों को चिन्हित करके उनके नाम समेत सूची दे दी। वन विभाग द्वारा एक साल पहले 135 भवन स्वामियों को नोटिस भेजकर अभिलेख समेत साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। नोटिस प्राप्त होने के बाद लोगों ने वन विभाग कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों का घेराव किया। क्षेत्रीय विधायक, राज्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व तत्कालीन जिलाधिकारी के पास पहुंचकर लोगों ने अपनी बात रखी। लोगों का कहना था कई पीढ़ियों से जिस घर में रहते हैं, अचानक उसे खाली करने का निर्देश दिया गया है। कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके पास भवन से संबंधित कोई अभिलेख नहीं बचा है। सियाराम साहू, प्रमोद कुमार यादव, रामसजीवन आदि लोगों ने बताया कि वर्ष 1970 में आई बाढ़ के दौरान लोगों के घर ढह गए। जिनके पास जो अभिलेख रहे, वह भी बाढ़ की विभीषिका में बह गए। उच्च न्यायालय प्रयागराज द्वारा तीन माह के अंदर अतिक्रमण हटाए जाने का आदेश आने के बाद से नई बाजार उत्तरी व नई बाजार मध्य के वाशिंदों में अफरा-तफरी मची है। लोग एक-दूसरे से राय-मशविरा करने में लगे हैं। प्रबुद्धजीवियों से सलाह लेकर अतिक्रमण की जद में आने वाले लोग बचाव का रास्ता निकालने में लगे हैं। 


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