10 दिवसीय रासलीला महोत्सव का शुभारंभ - Amja Bharat

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Thursday, December 16, 2021

10 दिवसीय रासलीला महोत्सव का शुभारंभ

बदौसा, के एस दुबे । कस्बा स्थित प्रो. दीनानाथ महाविद्यालय के ग्राउंड में भव्य 10 दिवसीय श्री कृष्ण रास लीला का शुभारंभ भारतीय उद्योग व्यापार मंडल बदौसा तथा भारतीय युवा व्यापार मंडल बदौसा के द्वारा किया जा रहा है। यह 15 से 24 दिसेंबर  तक चलेगा। इस दौरान श्रीधाम वृंदावन की करुणामई रासलीला संस्थान द्वारा मंचन किया जाएगा। शाम 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक राधा-कृष्ण की लीलाओं की मनमोहक झाकियों व नृत्य कला के द्वारा मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। मुख्य अतिथि भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रविकांत गर्ग एवं प्रदेश अध्यक्ष भारतीय उद्योग व्यापार के अरुण अग्रवाल, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राज कुमार राज, उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज जैन, जिले के अध्यक्ष अमित सेठ भोलू व जिला उपाध्यक्ष शिव प्रसाद शिवा, बदौसा नगर अध्यक्ष धीरज श्रीवास्तव, नगर उपाध्यक्ष शत्रुघन श्रीवास्तव, नगर अध्यक्ष विनय गौतम आदि पदाधिकारियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत गर्ग ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 

कार्यक्रम के दौरान अतिथि का स्वागत करते पदाधिकारी

भगवान श्रीकृष्ण की रास लीलाओं का आनंद लेने के लिए सैकड़ों की तादाद में श्रोताओं का हुजूम उमड़ पड़ा पंडाल में काफी तादाद में लोगों की भीड़ थी जैसे ही भगवान श्री राधा कृष्ण की लीलाओं का शुभारंभ किया गया पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं ने जय श्री राधे कृष्ण राधे कृष्ण के जयकारे से गूंज उठा। पुराणों के अनुसार एक बार गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने रास का आयोजन
राधाकृष्ण की भव्य झांकी

किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धज कर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गई। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई जितनी गोपियां थीं, उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य एवं प्रेमानंद शुरू हुआ। माना जाता है कि आज भी शरद पूर्णिमा की रात में भगवान श्री कृष्ण गोपिकाओं के संग रास रचाते हैं।


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