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Wednesday, November 10, 2021

छठ पूजा : तालाब के बाहर खड़े होकर सूर्य को अर्ध्य

बहन छठ माता के साथ भाष्कर की हुई आराधना

फतेहपुर, शमशाद खान । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को महाछठ का पर्व मनाया गया। पूर्वांचल से वास्ता रखने वाले परिवारों ने बहन छठ मैया के साथ उनके भाई भाष्कर की विधि विधान से आराधना की। पूजा अर्चना के दौरान पूर्वांचल के परिवारों की खुशियां तालाब किनारे निहारते बनी। सप्तमी तिथि यह परिवार व्रत का पाराण करेंगे।    

यह व्रत संतान की प्राप्ति, कुशलता और उसकी दीर्घायु की कामना को मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से इसकी शुरुआत हुई। षष्ठी तिथि का भोर से ही उल्लास व उत्साह  झलकने लगा था जो पूरे दिन खुशियों के रूप में देखने को मिलता रहा।  मंगलवार खरना को विधि विधान से पूरा करते हुए पूर्वांचल के परिवारों ने गुरूवार को छठ पूजा का पारण किया। 

पीएसी में छठ पूजा करती महिलाएं

सूर्य की बहन है छठी मैया

छठ देवी भगवान ब्रह्माजी  की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन हैं। उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए ये पर्व मनाया जाता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी ने सृष्टि रचने को स्वयं को दो भागों में बांट दिया था। प्रभू के दाहिने भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति का रूप सामने आया। सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया। इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी या देव सेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है, जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। शिशु के जन्म के छठे दिन भी इन्हीं की पूजा की जाती है। इनकी उपासना करने से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी बताया गया है, जिनकी नवरात्रि की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है।

ऐसे मनाया जाने लगा यह पर्व

पुराण के अनुसार प्रथम मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं हुई। इस कारण वह बहुत दुखी रहने लगे थे। महर्षि कश्यप के कहने पर राजा प्रियव्रत ने एक महायज्ञ का अनुष्ठान संपन्न किया जिसके परिणाम स्वरुप उनकी पत्नी गर्भवती तो हुई लेकिन दुर्भाग्य से बच्चा गर्भ में ही मर गया। पूरी प्रजा में मातम का माहौल छा गया। उसी समय आसमान में एक चमकता हुआ पत्थर दिखाई दिया, जिस पर षष्ठी माता विराजमान थीं। जब राजा ने उन्हें देखा तो उनसे, उनका परिचय पूछा। माता षष्ठी ने कहा कि- मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री हूँ और मेरा नाम षष्ठी देवी है। मैं दुनिया के सभी बच्चों की रक्षक हूं और सभी निःसंतान स्त्रियों को संतान सुख का आशीर्वाद देती हूं। इसके उपरांत राजा प्रियव्रत की प्रार्थना पर देवी षष्ठी ने उस मृत बच्चे को जीवित कर दिया और उसे दीर्घायु का वरदान दिया। देवी षष्ठी की ऐसी कृपा देखकर राजा प्रियव्रत बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने षष्ठी देवी की पूजा-आराधना की।  तभी से छठी माता का यह त्योहार मनाया जाने लगा।


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