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Thursday, November 18, 2021

'तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुझे आज़ादी दूंगा' - यह नारा नहीं, आज़ादी का मंत्र है

तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुझे आज़ादी दूंगा......  

हमारे नेता सुभाष चंद्र बोस का नारा।               

(देवेश प्रताप सिंह राठौर, वरिष्ठ पत्रकार)

हिन्दुस्तान में जो नारा सबसे ज्यादा लोगों को आकर्षित करता आया है, जिसमें कुर्बानी के लिए प्रेरणा है, सर्वस्व न्योछावर करने का संदेश है और आज़ादी हासिल करने का संकल्प है- वह एक मात्र नारा है- 'तुम मुझे ख़ून दो, मैं तुझे आज़ादी दूंगा'। सुभाष चंद्र बोस का दिया यह नारा नहीं, आज़ादी का मंत्र है। एक ऐसा मंत्र, जिसने बर्मा को अंग्रेजों से आज़ाद कराया था, एक ऐसा मंत्र जिसने तब भारतीयों के ख़ून में उबाल ला दिया था जब 'करो या मरो' का नारा अंग्रेजी दमनचक्र के सामने अपना असर को रहा था। आपको बताना चाहते हैं हिंदुस्तान आजादी के बाद सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सुखदेव ,राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद,और लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और बहुत से वीर लोग हैं जिनको सम्मान वह नहीं प्राप्त हुआ जो नेहरू परिवार को प्राप्त हुआ ऐसा क्यों यह एक प्रश्न


हिंदुस्तान के सच्चे नागरिक के मन में हर समय रहता है। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत रत्न कब मिला आजादी के 70 वर्षों के बाद जब भाजपा की सरकार आई और देश के प्रिय नेता सुभाष चंद्र बोस इनके बारे में कुछ कहना तो सूरज को दिया दिखाने के बराबर है, ऐसे व्यक्ति को हमेशा नकारा गया है क्यों देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान इन लोगों का रहा है, लेकिन इस देश की विडंबनाए हैं कुछ लोग अपनी तानाशाही के तहत जनता को गुमराह करते रहे और हमारे वीर महापुरुष सम्मान से वंचित रह गए आज भाजपा की सरकार में जो आजादी के मुख्य कर्ता-धर्ता और वीरगति को प्राप्त हुए उन लोगों को आज सम्मान प्राप्त हो रहा है ,इस पर मैं किसी दल का नहीं हूं लेकिन सत्य लिखने का काम हर पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यक्त को होने का अधिकार है, और करना भी चाहिए।  प्रश्न है सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य क्यों बना हुआ है पूर्व की सरकारों ने आजादी के बाद प्रयास क्यों नहीं किया हमारे नेता जी के बारे में दूसरा सवाल है सुखदेव राजगुरु ,भगत सिंह की फांसी टाली जा सकती थी अगर  चाहते तो, आखिर क्यों नहीं उचित कदम उठाए गए यह बहुत सारे प्रश्न है जो इस देश के सच्चे सपूतों को विचलित करते हैं। और प्रश्न उठते हैं आखिर क्यों भारत रत्न इन  लोगों ने प्राप्त नहीं हुआ वैसे भारत रत्न के भूखे नहीं है भारत के रत्न से भी बड़े भारत के हर देशवासियों के लिए वह महारत्न हैं , इनको इस देश की जनता कभी भूल नहीं सकती है।

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