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Tuesday, November 2, 2021

आभूषण-बर्तन की खरीददारी में दिखा उत्साह

मंहगाई के चलते अर्थ व्यवस्था डगमगाई

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। धनतेरस पर्व पर मंहगाई का असर देखने को मिला। बावजूद इसके लोगों ने जमकर खरीददारी की। बाजार में सोने-चांदी व बर्तन के अलावा इलेक्ट्रानिक दुकानों को विधिवत सजाया गया। विविध सामानों के लिये बाहर स्टाल लगे रहे। धनतेरस के चलते धातुओ के खरीददार दुकानों में देखने को मिले। सर्राफा व्यवसायियों के यहां चांदी के सिक्के, मूर्तियां व सोने के आभूषणों की खरीददारी की।

बर्तन खरीदते लोग।

मंगलवार को धनतेरस पर बर्तन की दुकानों को दुकानदार बाहर तक आकर्षक ढंग से सजाये रहे। बेहतरीन सामानों के विविध स्टाल लगाये गये। बर्तन के खरीददार तो नजर आये, लेकिन महज औपचारिकता पूर्ण की गई। किसी ने तांबे का लोटा तो किसी ने चम्मच आदि छोटे सामान ही क्रय किये। मंहगाई के चलते धनतेरस के त्योहार पर बड़ी खरीददारी धातु के बर्तनों की नहीं हो सकी। वहीं मध्यम एवं धनाढ्य लोगों ने सर्राफा व्यवसायियों की दुकानों में पहुंचकर चांदी के सिक्के व मूर्तियां तथा सोने के आभूषणों की खरीददारी की। पुराने चांदी के सिक्को में महारानी बिक्टोरिया और जार्ज किंग के चांदी के सिक्के एक हजार में बिके। नए गणेश-लक्ष्मी के चांदी के सिक्के पांच सौ में बिके। धनतरेस पर्व की मान्यता है कि धातुओं के नये सामान आज के दिन क्रय किये जाने चाहिये। इसके अलावा मोटरसाइकिल एजेंसियों में क्रयकर्ताओं की भीड रही। अधिकांश नवयुवक खरीददार धनतेरस का मुहूर्त शुभ मानते हुये बाइकें खरीदी। इसके अलावा इलेक्ट्रानिक दुकानों में भी खरीददारों की भीड़ देखी गई। दुकानदारों ने तरह-तरह के इलेक्ट्रानिक सामानों को बाहर लगाकर खरीददारों को आकर्षित किया। दामों में भारी गिरावट के चलते तथा बम्पर धमाका के चलते जमकर खरीददारी की। विभिन्न प्रकार के मोबाइल भी खरीदे गये। कई दुकानदारों ने बताया कि दुकानदारी केवल सही ग्राहकों के सहारे हुई है। 

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बर्तन व आभूषण खरीददारी का बताया महत्व

चित्रकूट। धनतेरस के बारे में अंर्तराष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि एक बार भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के साथ भूमण्डल भ्रमण के लिये निकले। एक स्थान पर रुक कर भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से कहा कि मै दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, उधर न देखना। जैसे ही भगवान इतना कहकर आगे बढे तो लक्ष्मी जी भी पीछे-पीछे चल दी। रास्ते में सरसों व गन्ने का खेत दिखाई दिया तो माता लक्ष्मी वहीं बैठकर अपना श्रंगार कर गन्ने तोडकर खाने लगीं। इतने में भगवान विष्णु आ गये और लक्ष्मी जी को ऐसा करता देख क्रोधित होकर किसान के घर में 12 वर्ष तक रहने का श्राप दे दिया। 12 वर्ष बाद जब भगवान विष्णु लक्ष्मी जी को लेने किसान के घर पहुंचे तो किसान ने लक्ष्मी जी को जाने नहीं दिया। तब भगवान ने कहा कि गंगा स्नान करने जाओ तब तक वह घर में रुके हैं। किसान गंगा स्नान करने गया। वहां जैसे ही चार कौडिया डाली तो गंगा माता ने कहा कि ये कौडिया किसने दी। तब किसान ने बताया। इस पर गंगा जी ने कहा कि जो स्त्री घर में है वह साक्षात लक्ष्मी है और मर्द पुरुष साक्षात नारायण हैं। यह सुन किसान घर पहुंचकर लक्ष्मी को न जाने का हठ करने लगा। तब लक्ष्मी जी बोलीं कि अगर तुम मुझे अपने पास रखना चाहते हो तो कार्तिक मास की तेरस को घर स्वच्छ रखना तथा रात्रि में घी का दिया जलाना। मै तुम्हारे घर आऊंगी, परन्तु दिखाई नहीं दूंगी। तब से लोग धनतेरस पर्व विधिविधान से मनाते हैं। इसीके चलते लोग विभिन्न प्रकार के धातुओं की खरीददारी करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन जो सामग्री खरीदी जायेगी उससे लक्ष्मी जी घर में प्रवेश करेंगी।


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