मेला में गधे-खच्चरों की जमकर हुई सौदेबाजी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Saturday, November 6, 2021

मेला में गधे-खच्चरों की जमकर हुई सौदेबाजी

फिल्मी हस्तियों के नाम के गध, खच्चर रहे आकर्षण का केन्द्र

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। देश के गिने-चुने स्थानों पर लगने वाला गधों एवं खच्चरों का मेला इस बार भी परम्परागत ढंग से चित्रकूट के नया गांव सतना क्ष्ोत्र में मन्दाकिनी तट पर लगा। जिसमें गधों की खूब मांग रही। इस बार मादा गधों व नर खच्चरों की खासी मांग रही। नर खच्चर 30 से 60 हजार रूपये में बिके।

गधा मेला में इस वर्ष हजारों की तादाद में गध्ो एवं खच्चरों को लेकर व्यापारी फतेहपुर, लखनऊ, ग्वालियर, सागर, पन्ना, मथुरा, धौलपुर, पट्टी प्रतापगढ़, रायबरेली व ऊंचाहार से आये। इस मेले में सबसे खास बात होती है कि सौदागर अपने जानवरों को यहां दो दिन पहले तो बाजार में ले आते है, लेकिन सौदेबाजी परीवा के ही दिन करते है। इस दिन को सौदागर व जानवरों के मालिक खासतौर पर शुभ मानते है। उल्लेखनीय बात यह है कि गधां का यह

बाजार में खड़े खच्चर व गधे।

मेला देश में उज्जैन, धौलपुर व चित्रकूट में ऐतिहासिक माना जाता है लेकिन बदलते समय तथा जरूरत के चलते अब यह मेला अन्य स्थानों पर भी लगने लगा है। मन्दाकिनी तट पर इन जानवरों की सौदेबाजी का अन्दाज भी खासा जुदा है। यह लोग परम्परागत ढंग से मन्दाकिनी का जल हाथ में लेकर व एक रूपये का सिक्का कपड़े में छुपाकर परीवा को दिनभर सौदा पक्का करते रहते है। परीवा के दिन जानवरों को खूंटे से खोलकर नये सौदे के मुताबिक खरीददार अपने गन्तव्य को ले जाते देख्ो गये। मेला में कुछ अवांछनीय तत्व भी नजर आये जो सौदागरों को गुमराह कर उनसे अपना उल्लू सीधा करते रहे। नगर पंचायत नया गांव से मप्र से इस सौदेबाजी केन्द्र का प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी ठेका हुआ था। यहां लोग निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि खरीददारों व सौदागरों से वसूल करते देख्ो गये। मेला में शनिवार को फतेहपुर के व्यापारी ने 60 हजार में खच्चर का सौदा किया। मेले में फिल्म अभिनेताओं के नाम के खच्चरों की खासी मांग रही। फिल्मी हस्तियों के नामों के गधे खासा आकर्षण का केन्द्र रहे। हालांकि मेला में इस बार राजस्थानी तथा पूर्वांचल के मादा गधों व नर खच्चर की खासी मांग देखी गयी। गधों के स्थानीय व्यापारी ने बताया कि मेले में गधा और गधी की शादी का भी रिवाज है। यह मेला ऐतिहासिक है, जो देश के गिन्ो-चुने गधा मेलों में शुमार है। इस मेला का गधा व खच्चरों के खरीददार सालभर इंतजार करते हैं।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages