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Monday, November 22, 2021

बाँदा में पूरब से दक्षिण तक चल रहा बेखौफ मोरम खनन

खपटिहा, अमलोर, मरौली, बिल्हारका, महुटा में एनजीटी के नियमो की उड़ रही धज्जियां

खनिज विभाग सलाहकार और पुलिस विभाग पहरेदार की भूमिका में

मीडिया मैनेज के नाम लाखो की रकम डकार रहे चिंदीचोर

बाँदा, के एस दुबे - जनपद की सीमा से होकर गुजरी केन और बागे नदियों में मोरम खनन का कार्य शुरू होते ही बड़े पैमाने पर अवैध व बेखौफ खनन की शुरुआत हो चुकी है।नदी जलधारा के भीतर और भारी मशीनों की मदद से नदी की तलहटी से मोरम निकालने का खेल देखकर ऐसा जान पड़ता है कि खनन धारकों को न तो नियम कानून की चिंता है और न ही भारतीय पर्यावरण विभाग द्वारा दिये गए दिशा निर्देशों की,कुल मिलाकर बाँदा जिले के पूरब से लेकर दच्छिन तक चौतरफा हो रहे अंधाधुंध खनन को लेकर यह बात साबित होती है कि खनन धारक सरकार को राजस्व देने के नाम पर नदियों का किस कदर दोहन करते है।

बाँदा जिले के पूरब अर्थात बदौसा थाने के महुटा, से नरैनी के बिल्हारका, बाँदा तहसील के मरौली के खंड 2-3-4-6 से लेकर पैलानी तहसील के खपटिहा,अमलोर आदि खदानों में दिन रात हो रहे खनन व नियमो की अनदेखी कर रहे खनिज विभाग की नीयत भी शक के दायरे में सिमट जाती है।जानकारों की माने तो जिले में हो रहे खनन ब्यवसाय को लेकर खनिज विभाग सलाहकार व पुलिस प्रसाशन पहरेदार की भूमिका में है।नियमो की बात करे तो प्रदेश शासन द्वारा मोरम खनन स्थलों में वीडियो कैमरे व धर्मकांटा लगाने की अनिवार्यता केवल कागजी खानापूरी और शोपीस बनकर रह गए है।बताते चले की मोरम खदानों में चल रहे अवैध तौर तरीकों को दफन करने के लिए मीडिया को साधने व उन्हें वश में रखने का जिम्मा ऐसे ऐसे चिंदीचोरो को दिया गया है जो बैठे बिठाए लाखो की रकम डकार रहे है।पते की बात यह है कि मोरम खनन के तौर तरीको पर गौर करने के लिए यदि कोई प्रशासन य पुलिस का बड़ा अफसर देखने की कोशिश करता है तो खनिज विभाग व लोकल पुलिस के लोग खनन धारकों को अफसरों के आने की सूचना व लोकेशन बताकर अपना हक अदा करते है।

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