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Monday, November 8, 2021

प्रभु नाम सुमिरन से पार लगती जीवन नैया

श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन 

बांदा, के एस दुबे । मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है, जिसके लिये देवता भी तरसते हैं। अजामिल की कथा सुनाते हुए पं.भरत बाजपेयी ने कहा कि अधम पापी भी पापों का प्रायश्चित करते हुए यदि अंत समय भी भगवान नाम का सुमिरन कर लेता है तो वह भवसागर से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।

‘दुर्लभो मानुषो देहो’ की व्याख्या करते हुए कहा कि मानव तन पाने के लिये देवता भी लालायित रहते हैं। तुलसी ने भी मानस में लिखा ष्बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सद् ग्रंथन गावाश् जड़ भरत और अजामिल का प्रसंग

कथा सुनाते पंडित भरत वाजपेयी

सुनाते हुए विद्वान वक्ता ने कहा कि अजामिल जैसा पापी भी जीवन के अंतिम दिनों में अपने पापों का प्रायश्चित करके भगवान का ही नाम जपता है। परिणाम स्वरूप प्रभु का ध्यान करके भवसागर से मुक्त हो जाता है। उन्होंने भगवत गीता के श्लोक का प्रमाण दिया। ष्सर्व धर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रजश् भगवान कहते हैं कि सभी धर्मों का त्याग करके बस मेरी शरण में आ जाओ, तुम्हारा कल्याण हो जायेगा। 

कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य के भाग्य को बदलने की क्षमता सिर्फ परमात्मा में ही है। इसलिये हर प्रकार से उन्हीं की शरण में जाने में भलाई है। प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि कोई बच्चा हो या फिर पौधा उसके विकास में अनुवांशिकता और वातावरण का सबसे अधिक प्रभाव होता है। प्रहलाद है तो दैत्य का पुत्र, लेकिन उनकी मां गर्भावस्था में ही एक आश्रम आ गई थी। बालक का लालन-पालन भी वहीं हुआ। मां के दिये संस्कारों से प्रहलाद भगवान के भक्त हो गये।


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