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Monday, November 1, 2021

मनोबल टूटा, विकास अवरुद्ध.............................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

( वरिष्ठ पत्रकार)

............................................ इंसान जैसा मन बना लेगा जैसी उसकी सोच होगी वैसे ही उसके कर्म  होंगे और वह नकारात्मक भी हो सकता है सकारात्मक हो सकता है ,यह उसकी सोच और कर्म पर निर्भर करता है।...मन के हारे हार है, मन के जीते जीत अर्थात् दुःख और सुख तो सभी पर पड़ा करते हैं, इसलिए अपना पौरुष मत छोड़ो; क्योंकि हार और जीत तो केवल मन के मानने अथवा न मानने पर ही निर्भर है, अर्थात् मन के द्वारा हार स्वीकार किए जाने पर व्यक्ति की हार सुनिश्चित है। इसके विपरीत यदि व्यक्ति का मन हार स्वीकार नहीं करता तो विपरीत परिस्थितियों में भी विजयश्री उसके चरण चूमती है। जय–पराजय, हानि–लाभ, यश–अपयश और दुःख–सुख सब मन के ही कारण हैं; इसलिए व्यक्ति जैसा अनुभव करेगा वैसा ही वह बनेगा।मन की दृढ़ता के कुछ उदाहरण हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिनमें मन की संकल्प–शक्ति के द्वारा व्यक्तियों ने अपनी हार को विजयश्री में परिवर्तित कर दिया। महाभारत के युद्ध में पाण्डवों की जीत का कारण यही था कि श्रीकृष्ण ने उनके मनोबल को दृढ़ कर दिया था। नचिकेता ने न केवल मृत्यु को पराजित किया, अपितु यमराज से अपनी इच्छानुसार वरदान भी प्राप्त किए। सावित्री के मन ने यमराज के सामने भी हार नहीं मानी और अन्त में अपने पति को मृत्यु के मुख से निकाल लाने में सफलता प्राप्त की।अल्प साधनोंवाले महाराणा प्रताप ने अपने मन में दृढ़–संकल्प करके मुगल सम्राट अकबर से युद्ध किया। शिवाजी ने बहुत थोड़ी सेना लेकर ही औरंगजेब के दाँत खट्टे कर दिए। द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा किए गए अणुबम के विस्फोट ने जापान को पूरी तरह बरबाद कर दिया था, किन्तु अपने मनोबल की दृढ़ता के कारण आज वही जापान विश्व के गिने–चुने शक्तिसम्पन्न देशों में से एक है। दुबले–पतले गांधीजी ने अपने दृढ़ संकल्प से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला दिया था। इस प्रकार के कितने ही उदाहरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं, जिनसे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि हार–जीत मन की दृढ़ता पर ही निर्भर है।प्राय: देखा गया है कि जिस काम के प्रति व्यक्ति का रुझान अधिक होता है, उस कार्य को वह कष्ट सहन करते हुए भी पूरा करता है। जैसे ही किसी कार्य के प्रति मन की आसक्ति कम हो जाती है, वैसे–वैसे ही उसे सम्पन्न करने के प्रयत्न भी शिथिल हो जाते हैं। हिमाच्छादित पर्वतों पर चढ़ाई करनेवाले पर्वतारोहियों के मन में अपने कर्म के प्रति आसक्ति रहती है। आसक्ति की यह भावना उन्हें निरन्तर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती ,हमन की स्थिरता, धैर्य एवं सतत कर्म–वस्तुत: मन सफलता की कुंजी है। जब तक न में किसी कार्य को करने की तीव्र इच्छा रहेगी, तब तक असफल होते हुए भी उस काम को करने की आशा बनी रहेगी। एक प्रसिद्ध कहानी है कि एक राजा ने कई बार अपने शत्रु से युद्ध किया और पराजित हुआ। पराजित होने पर वह एकान्त कक्ष में बैठ गया। वहाँ उसने एक मकड़ी को ऊपर चढ़ते देखा।मकड़ी कई बार ऊपर चढ़ी, किन्तु वह बार–बार गिरती रही। अन्तत: वह ऊपर चढ़ ही गई। इससे राजा को अपार प्रेरणा मिली। उसने पुनः शक्ति का संचय किया और अपने शत्रु को पराजित करके अपना राज्य वापस ले लिया। इस छोटी–सी कथा में यही सार निहित है कि मन के न हारने पर एक–न–एक दिन सफलता मिल ही जाती है।

मन को शक्तिसम्पन्न कैसे किया जाए?–प्रश्न यह उठता है कि मन को शक्तिसम्पन्न कैसे किया जाए? मन को शक्तिसम्पन्न बनाने के लिए सबसे पहले उसे अपने वश में रखना होगा।अर्थात् जिसने अपने मन को वश में कर लिया, उसने संसार को वश में कर लिया, किन्तु जो मनुष्य मन को न जीतकर स्वयं उसके वश में हो जाता है, उसने मानो सारे संसार की अधीनता स्वीकार कर ली।मन को शक्तिसम्पन्न बनाने के लिए हीनता की भावना को दूर करना भी आवश्यक है। जब व्यक्ति यह सोचता है कि मैं अशक्त हूँ, दीन–हीन हूँ, शक्ति और साधनों से रहित हूँ तो उसका मन कमजोर हो जाता है। इसीलिए इस हीनता की भावना से मुक्ति प्राप्त करने के लिए मन को शक्तिसम्पन्न बनाना


आवश्यक है।आज हम आपको वर्ष 1995 की वो बात बताना चाहते जिसमें भाजपा के समर्थन से बसपा प्रमुख प्रथम बार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनी और उन्होंने चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय की नेम प्लेट हटाने पर एक पत्रकार ने कहा था माननीया महोदया यह भारत के आजादी के कर्णधार शहीद चंद्रशेखर आजाद  के नाम कॉलेज में  तो बसपा प्रमुख ने कहा चंद्रशेखर आजाद वह आतंकवादी है इस बार जनसत्ता के एक लेखक ने पूरे हिंदुस्तान में लेख लिखें और डॉ हरिओम पवार जो बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय कवि हैं उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई और आडवाणी जी से मुलाकात जी और आडवाणी जी से जब डॉक्टर हरिओम पवार मिले उन्होंने कहा देश की आजादी के मुख्य कर्ताधर्ता चंद्रशेखर आजाद को आतंकवादी आपकी गठबंधन की पार्टी सरकार बनी आपकी मुख्यमंत्री कह रही हैं। डॉ हरिओम पवार जी लालकृष्ण आडवाणी से मिले  चुप रहे कवि हरिओम पवार अटल बिहारी वाजपेई जी के पास गए उन्होंने भी चुप्पी साध रखी थी , देश के सच्चे सपूत और देश के सच्चे राष्ट्रभक्त  डॉक्टर हरिओम पवार जो बहुत बड़े कवि हैं उन्होंने अपनी कविता के द्वारा अपनी गुस्सा का इजहार किया और देश को बताया कि राजनीतिक दल की मजबूरी हो सकतीहैं लेकिन डॉक्टर हरिओम पवार जैसे लोग  की नहीं अपनी कविताओं के माध्यम से अपना विरोध व्यक्त किया।

डाक्टर हरिओम पवार कविता आपके इस समाचार के साथ संलग्न करके आप तक पहुंचाने की हर जनमानस को जानने की जरूरत है।भारत देश का वीर भारत माता के लाल चंद्रशेखर आजाद को जो आतंकवादी कहा है। भारत देश की 130 करोड़ जनता कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती है,परंतु क्षेत्रीय दल और उनकी राष्ट्रीय पार्टियां अपनी सीट की राजनीतिक पहलुओं को बचाने के लिए देश के क्रांतिकारी आजादी फेसबुक कर्ता-धर्ता शेखर आजाद जैसे वीर सपूतों को राजनीति के हक के लिए कुछ भी कह देते हैं राजनीति दल, ऐसे समय पर देश की जनता ऐसे लोगों को चुनाव के समय अपने मत का प्रयोग करते हुए बताएगी हमारे वीर सपूतों को गलत धारणाएं रखने वाले पार्टियां सत्ता विहीन हो जाती है। क्योंकि देश की जनता आजादी के शहीद  वीर महापुरुषों को कभी भूल नहीं सकती है।

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