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Sunday, November 7, 2021

धर्मवान वही जो परमात्मा के बताये रास्ते पर चले

श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन

बांदा, के एस दुबे । संपूर्ण जगत में परमात्मा तो एक ही है। हमने अपनी भावना के अनुसार नाम और रूप की परिकल्पना कर उसे ईश्वर, अल्लाह, गॉड, अहुरमज्द, जेहेवा और टिनीट नाम दिया। उस परम पिता का अवतार धर्म की स्थापना और मानव को आचरण सिखाने के लिये होता है। वास्तव में धर्मवान वही है जो परमात्मा और श्रेष्ठ जनों के द्वारा बताये मार्ग पर चले।

पंडित भरत वाजपेयी

आवास विकास कॉलोनी के कुआं मंदिर पार्क में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पं. भरत बाजपेयी ने कहा कि ईश्वर की अदृश्य शक्ति के द्वारा ही सृष्टि का निर्माण होता है। उस एक परमात्मा को लोगों ने अपनी-अपनी भावना के अनुसार नाम और रूप की परिकल्पना की। सनातन धर्म के अनुयाइयों ने उसे ईश्वर तो इस्लाम को मानने वालों ने उसे अल्लाह का नाम दिया। इसी तरह इसाइयों ने उसे गॉड माना तो पारसियों अहुरमज्द। यहूदियों ने जेहेवा नाम दिया तो चीनियों ने उसे टिनीट कहा। श्रीहरि विष्णु के चौबीस अतवतारों पर प्रकाश डालते हुए विद्वान वक्ता श्री बाजपेयी ने कहा कि उनका अवतार धर्म की स्थापना और मानव को आचरण सिखाने के लिये होता है। वास्तविक धर्मवान व्यक्ति वही है जो परमात्मा और श्रेष्ठ जनों के द्वारा बताये मार्ग पर चले। ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक बालक को अपनी मां से अधिक श्रेष्ठ कुछ और नहीं लगता। श्रेष्ठ मां वही है जो अपने बालक को सांसारिक माया मोह के जंजाल से मुक्ति दिलाने के लिये बचपन में ही ऐसे संस्कार दे, ताकि बालक का मन परमात्मा में लग सके। ध्रुव की मां सुनीति भी वही किया। पिता उत्तानपाद के तिरस्कार को लेकर सुनीति ने ध्रुव के मन में सौतेले भाई और मां के प्रति बदले की भावना हो हवा देने के बजाय ईश्वर से जुड़ने और साक्षात्कार कर मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने का काम किया। ध्रुव ने अपनी माता सुनीति की आज्ञा मानकर गृहस्थ जीवन का त्याग मात्र पांच वर्ष की अवस्था में ही कर दिया और सिर्फ पांच माह में ही नारायण का दर्शन प्राप्त कर लिया। कहा कि मन की लगन और दृढ़संकल्प हो तो व्यक्ति बड़ा से बड़ा लक्ष्य भी आसानी से प्राप्त कर सकता है। कहा कि संसार में मनुष्य ही मात्र ऐसा प्राणी है, जिसे कर्म के बल पर सब कुछ प्राप्त हो सकता है। कर्म प्रधान विश्व करि राखा, अर्थात जो जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल मिलता है। इससे पहले श्रीमद् भागवत कथा का शुभाररंभ शनिवार को भव्य कलश यात्रा से हुआ। प्रथम दिन कथा व्यास ने कथा का महात्म्य बताते हुए श्रीमद् भागवत पुराण को सभी 18 पुराणों में सर्वश्रेष्ठ बताया। 


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