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Wednesday, November 10, 2021

अपने नाटक का पाठ कर लेखक ने कृति को किया जीवंत

फतेहपुर, शमशाद खान । हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार डॉ असगर वजाहत ने अपने नए नाटक अरिस्तोपोलिस का पाठ कर कृति को जीवंत कर दिया। नाटक प्रस्तुति भी अद्भुत रही और श्रोताओं को बेहद प्रभावित किया। जिन लाहौर नई देख्या, कैसी आगी लगाई समेत दर्जनों कालजई उपन्यास, कहानी, नाटकों के लेखक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात साहित्यकार डा. असगर वजाहत ने किला स्थित सभागार में अपने नाटक का पाठ कर कृति को जीवंत कर दिया। इस दौरान उन्होंने नाटक के बारे में मीडिया को भी संबोधित किया। नाटक अरिस्तोपोलिस के बारे में जानकारी देते हुए नाटककार असगर वजाहत ने बताया कि लिसिस्त्राटा प्राचीन ग्रीक नाटककार अरिस्टोफेंस द्वारा एक युद्ध विरोधी कॉमेडी है। यह मूल रूप से एक हास्य नाटक माना जाने वाला नाटक है जो कुछ बहुत गंभीर सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय प्रसंगों को दर्शाता है। इस नाटक का मुख्य प्रस्थान बिंदु महिलाओं द्वारा युद्ध

नाटक का पाठ करते साहित्यकार डा. असगर वजाहत।

रोकने के लिए पुरुषों को संभोग से वंचित कर देने की रणनीति को आधार बनाकर उन्होंने एक नए कथानक की संरचना की है। यह कथानक हास्य प्रधान नहीं है। नाटक में तीन प्रमुख मुद्दे सामने आते हैं। पहला युद्ध के कारण समाज और मुख्य रूप से स्त्रियों पर पड़ने वाले भयानक प्रभाव दूसरा मुद्दा स्त्रियों के अधिकारों से संबंधित है स्त्री और पुरुष के समान अधिकारों के मुद्दों को भी उठाया गया है। नाटक के पात्र सम्राट अरिस्तोनिमोस की अपार, अनंत धन लोलुपता और युद्ध प्रेम के माध्यम के कुछ सार्वभौमिक मुद्दों को भी उठाया गया है। अरिस्तोपोलिस का सम्राट अरिस्तोंनिमोस एक क्रूर और बेहद लालची शासक है। वह सारे संसार का सोना अपने खजाने में जमा कर लेना चाहता है। इस दौरान उनसे नाटक का फतेहपुर में पाठ करने के उद्देश्य के बारे में पूछा गया तो बताया कि उन्होंने इसके पहले अपने पिछले नाटक महाबली का पाठ ओम घाट भिटौरा में किया था। उनके नाटकों का पहला पाठ उनकी जन्मभूमि फतेहपुर से ही होता है। यह लगाव की बात है। नाटक प्राचीन यूनानी नाटक से प्रेरित होकर लिखा गया है, इसकी उपयोगिता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया नाटक का कथानक सूत्र प्राचीन है पर उसमें हमारे वर्तमान समाज की बड़ी समस्याओं जैसे नारी सशक्तिकरण, शांति और सौहार्द्र जैसे सार्वभौमिक विषयों को समाहित किया गया है। इस कारण नाटक बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है। नाटक का मंचन कहां-कहां हुआ, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि नाटक अभी कोरोना काल में लिखा गया है इसलिए अब तक इसका कहीं मंचन नहीं हो पाया लेकिन उन्हें विश्वास है कि निकट भविष्य में यह मंच पर प्रस्तुत होगा फतेहपुर में नाटकों के प्रदर्शन कैसे शुरू किए जा सकते हैं, इस महत्वपूर्ण सवाल पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की नाटक संस्थाएं नाटक प्रशिक्षण के कार्यक्रम चलाती हैं, उनसे अनुरोध किया जा सकता है कि फतेहपुर में नाटक प्रशिक्षण का कोई कार्यक्रम आयोजित करें। फतेहपुर के साहित्यिक परिदृश्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनके विचार से फतेहपुर में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यह जरूर है कि फतेहपुर के रचनाकारों को जितना स्पेस मिलना चाहिए,उतना नहीं मिल रहा। जनपद के कवि, लेखक और कलाकार अपना महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध कर सकते हैं यदि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर दिया जाए। इस अवसर पर,शायर कमर सिद्दीकी, सय्यद अब्दुल्ला, जर्गाम ज़ैदी, शिवशरण बंधु हथगामी, मंज़र ज़ैदी, केके त्रिपाठी, प्रेम नंदन, नदीम कमर, वासीक सनम आदि अनेक साहित्य कर्मी मौजूद रहे।


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