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Wednesday, November 3, 2021

अन्ना प्रथा अभिशाप नहीं, वरदान बनेगी : कुलपति

सार्थक प्रयास से दूर होगा बुंदेलखंड का पिछड़ापन 

बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास किए बिना ‘उत्तम प्रदेश’ की कल्पना असंभव है। सभी के सार्थक प्रयास से ही बुंदेलखंड का पिछड़ापन दूर किया जा सकता है।  क्षेत्र के विकास को श्रमिक बन कर वह नेतृत्व करेंगे और बुंदेलखंड का पिछड़ापन दूर करने का भरसक प्रयास करेंगे। जैविक खाद के लिए बुंदेलखंड हब बनेगा। यह बात कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय नवागंतुक कुलपति डा.नरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से रूबरू होते हुए कही। 

नवागंतुक कुलपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्वविद्यालय का विधिवत कार्य भार ग्रहण करने के दूसरे दिन मंगलवार को मीडिया से रूबरू हुए। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में मीडिया वार्ता के दौरान

मीडिया से रूबरू कुलपति डा. नरेंद्र प्रताप सिंह

कुलपति ने कहा कि देश मे बुंदेलखंड की पहचान पिछड़ेपन और पलायन से है। प्रमुख समस्याओं में अन्ना प्रथा है। अन्ना प्रथा किसानों के लिए लिए लगातार अभिशाप बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में हो रहे विभिन्न शोध के परिणामों से किसी भी कृषि जनित समस्या का समाधान अवश्य संभव है। अन्ना प्रथा इस क्षेत्र के लिये अभिशाप नहीं वरदान साबित हो सकती है। देश और विदेश मे जैविक खाद का उत्पादन करके इस अभिशाप से मुक्ति दिलाने का मार्ग प्रश्स्त कर सकता है। बुंदेलखंड जैविक खाद के हब के रूप में विकसित होगा तो क्षेत्र के लिये वरदान साबित होगा। कृषि विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों के सहयोग से दलहन और तिलहन के उत्पादकता के साथ ही उत्पादन में वृद्धि संभव है। तिलहन-दलहन उत्पादन के क्षेत्र में बुंदेलखंड अग्रणी भूमिका निभायेगा। देश के विख्यात 75 विश्वविद्यालय की टाप-10 श्रेणी में विश्वविद्यालय को नाम शामिल कराने के सभी को मिलजुलकर प्रयास करना होगा। अन्ना प्रथा को देखते हुए पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय को शुरू कराने का वह प्रयास करेंगे। 


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