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Thursday, November 25, 2021

सेवा में कमी पर उपभोक्ता आयोग ने किया 5 हजार का जुर्माना

परिवाद में जल संस्थान को पाया दोषी,सुनाया फैसला

बाँदा, के एस दुबे  - जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने जल संस्थान द्वारा जारी आरसी  10126 को निरस्त कर दिया और परिवादी के साथ सेवा में कमी को लेकर ₹5000 जुर्माना भी जल संस्थान के ऊपर किया गया।
मामला इस प्रकार था कि बांदा शहर के बंगालीपुरा निवासी राम कुमार यादव पुत्र फकड़ के द्वारा मार्च 2011 में अधिशासी अभियंता जल संस्थान बांदा ,तहसीलदार बांदा, उत्तर प्रदेश सरकार जरिए कलेक्टर बांदा को पक्षकार बनाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी कि परिवादी के यहां विपक्षी संख्या 1 जल संस्थान के द्वारा जला  आपूर्ति नहीं की गई है और मुख्य रास्ते पर रास्ता निर्माण करते समय पाइपलाइन उखाड़ दी गई थी जिससे जल आपूर्ति

बाधित हो गई थी और जल संस्थान के द्वारा ना ही दूसरी लाइन डलवाई गई जिस कारण 15 वर्षों से कोई जल मूल का बीजक भी वादी को नहीं भेजा गया। जिस कारण परिवादी है समझ पा रहा था की पाइपलाइन उखाड़ जाने से जल आपूर्ति नहीं हुई है इसलिए जल बीजक  वसूली हेतु नही  जारी किया गया। लेकिन जल  संस्थान के द्वारा वादी के विरुद्ध वसूली के लिए 4 मार्च 2011 को ₹10126 की  आर सी जारी कर दी गई और धनराशि जमा करने को कहा गया। वादी का कहना है कि फर्जी तरीके से जारी आर सी निरस्त किया जाए।
जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी की गई जल संस्थान के द्वारा अपना जवाब दिया गया कि कानूनन वसूली नहीं रोकी जा सकती।  वादी का वाद प्रत्येक दशा में निरस्त किए जाने योग्य हे।  जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष तूफानी प्रसाद और सदस्य अनिल कुमार चतुर्वेदी दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनी और पत्रावली लगे समस्त कागजी कार्रवाई को देखा और  अध्ययन किया ।
जिला उपभोक्ता सरक्षण आयोग ने परिवादी का परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि विपक्षी संख्या 1 जल संस्थान द्वारा परिवादी के ऊपर जारी आरसी 10126 रुपए निरस्त की जाती है ।इसके अलावा परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए ₹3000 और ₹2000 अदा करने का 1 माह का समय दिया गया। फोरम द्वारा दी गई समय अवधि व्यतीत होने पर यदि जल संस्थान के द्वारा निर्णय का अनुपालन नहीं किया जाता तो परिवादी को नियमानुसार जल संस्थान से निर्णित धनराशि ₹5000 वसूल करने का अधिकार होगा।  उक्त मुकदमे में वादी की ओर से रजनीश मोहन श्रीवास्तव अधिवक्ता ने पैरवी किया।

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