108 वें श्री तारा नेत्रदान यज्ञ का सदगुरु ट्रस्ट में शुभारम्भ - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Monday, November 8, 2021

108 वें श्री तारा नेत्रदान यज्ञ का सदगुरु ट्रस्ट में शुभारम्भ

श्री रणछोड़दास जी महाराज की जयंती पर अध्यक्ष विशद मफतलाल ने किया पूजन


चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरी -  मानव सेवा के कार्यों के लिए विख्यात संत रणछोड़दास जी महाराज की पावन जन्म जयंती कार्तिक शुक्ला चतुर्थी को 108 वें श्री तारा नेत्रदान यज्ञ का शुभारम्भ श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अध्यक्ष विशद मफतलाल ने किया | ट्रस्टी डॉ.बी.के.जैन ने बतलाया कि आज का दिन समस्त सदगुरु परिवार के लिए बहुत


महत्वपूर्ण दिवस है, आज पूज्य गुरुदेव की जन्म जयंती है, इस दिन देश –विदेश में रहने वाले सभी गुरु भाई बहन चित्रकूट आते हैं और नेत्रयज्ञ में सम्मिलित होते हैं साथ ही आज ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष तथा गुरुदेव के अनन्य भक्त  स्व. सेठ श्री अरविन्द भाई मफतलाल की पुण्यतिथि भी है | आज ही के दिन श्रद्धेय श्री अरविंद भाई ने वर्ष 2011 में साकेत गमन किया था | गुरुदेव के वचनों और मानव सेवा के पुनीत लक्ष्य को आगे बढाने का कार्य सेठ श्री अरविंद भाई ने अपने जीवनकाल में किया था | वर्ष 1967 में रंका बिहार में आये भीषण अकाल के समय वो गुरुदेव के परिचय में आये और उन्होंने पूरे मनोयोग से सेवा और राहत कार्य किया, इसीलिए गुरुदेव ने उनकी लगन और निष्ठा देखते हुए वर्ष 1968 में श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट की स्थापना कर उन्हें ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में बागडोर सौंपी थी |


नेत्रयज्ञ की परंपरा वर्ष 1950 से चित्रकूट में प्रारंभ है

 रणछोड़दास जी महाराज ने नेत्रयज्ञ की शुरुवात चित्रकूट के प्रमोदवन में वर्ष 1950 में की थी तब से अब तक प्रतिवर्ष नेत्रयज्ञ का आयोजन होता आ रहा है | पहले नेत्रयज्ञ में गुरुदेव ने मुंबई से चिकित्सक और स्टाफ की टीम,दवाई इत्यादि मंगवाया था और प्रमोदवन चित्रकूट के पुराने ब्रिटिश बैरक में आयोजित किया था, लोग बताते हैं कि, सड़क,पानी या बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भी उस ज़माने में 950 मोतियाबिंद के ओपरेशन सफलता पूर्वक हुए थे | धीरे-धीरे क्रम बढ़ता गया और नेत्रयज्ञ के साथ प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य भी गुरुदेव


आयोजित करते रहे | चाहे बाढ़ हो,सूखा हो, अकाल हो, भूकम्प या अन्य कोई आपदा, गुरुदेव का राहत कार्य और नेत्रयज्ञ साथ-साथ अनवरत जारी था | गुरुदेव ने चित्रकूट के साथ, आनादपुर, बैनाडा, शुजालपुर, गुना, सतना आदि अनेक स्थानों पर नेत्रयज्ञ किया और लाखो लोगों तक नेत्र ज्योति पहुंचाई | इस वर्ष नेत्रयज्ञ की श्रुंखला में 108 वां तारा नेत्रदान यज्ञ चित्रकूट में आयोजित हो रहा है | चिकित्सा पद्धति के आधुनिकीकरण के उपरान्त भी आज भी ट्रस्ट में उसी सेवाभाव से रोगियों की सेवा की जाती है | प्रति वर्ष यहाँ 8 लाख से अधिक मरीज नेत्र जाँच के लिए आते हैं और लगभग एक लाख चलेस हजार से अधिक ओपरेशन कुशल चिकित्सको द्वारा संपन्न किये जाते हैं |

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages