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Saturday, October 23, 2021

ए भाई ज़रा संभलकर हाइवे पर अन्ना मवेशियों का है कब्ज़ा

गौशालाओं के नाम पर प्रतिमाह लाखों हो रहे खर्च फिर भी छुट्टा पशु सड़कों पर

संरक्षण के नाम पर 900 रुपए प्रति पशु डकारने का हो रहा खेल

अन्ना पशुओं को सड़कों से हटाकर गौशालाओं में भेजने में प्रशासन क्यों हो रहा नाकाम?

फतेहपुर, शमशाद खान । प्रदेश की योगी सरकार बनने के बाद अन्ना मवेशियों की दुर्दशा सुधारने के लिए गौशालाओं का निर्माण कर उन्हें आश्रय देने की योजना पर कार्य शुरू किया गया। गौशालाओं की स्थापना तो गई। सरकार ने अन्ना मवेशियों को पालने के लिए जन सहभगिता के तहत 900 रुपये प्रतिमाह पालने वालों को देने की भी घोषणा की लेकिन आज भी अन्ना मवेशियों का ठिकाना गौशाला नहीं बल्कि हाइवे और शहर के अंदर सड़क ही है। कानपुर-इलाहाबाद मार्ग हो या फ़तेहपुर-बांदा सागर मार्ग, जगह जगह अन्ना मवेशियों के झुंड सड़कों पर विचरण

खागा बाईपास हाईवे पर अन्ना मवेशियों का कब्जा।

करते हुए व सड़क के बीचों बीच आराम करते हुए देखे जा सकते है। सड़कों पर अन्ना मवेशियों के झुंड को देखकर अक्सर स्थानीय निवासी लोगों से सड़क पर अन्ना मवेशियों का कब्ज़ा होने के कारण संभलकर चलने को कहते हुए सुने जा सकते है। हाइवे पर चलने वाले तेज़ रफ़्तार वाहन अक्सर इन पशुओं के झुंड से टकराकर लोग घायल एवं वाहन क्षतिग्रस्त होते रहते है। मवेशियों से टकराकर बाइक सवार एवं चार पहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से जानमाल का नुकसान होता है। अन्ना पशु गौशालाओं से निकलकर सड़क पर रहने को मजबूर हैं या फिर गौशालाओं में उन्हें भेजा ही नहीं जा रहा। सवाल उठता है कि यदि मवेशी सड़कों पर जीवन बिता रहे है तो उनके नाम पर गौशालाओं को चारे पानी के लिये मिलने वाली राशि कौन हड़प रहा है। धन किसके खाते में जा रहा है। इसका जवाब ढूढ़ने से भी नहीं मिलने वाला। अन्ना मवेशियों के पुनर्वास के लिए आमजन के पालने पर भी सरकार ने 9 सौ रुपये प्रतिमाह देने की योजना चला रखी है। जनपद में दर्जन भर से अधिक गौशालाएं बनाई गई हैं। जिसके संचालन के लिए लाखों रुपये भी खर्च किये जा रहे हैं तो फिर हाइवे व सड़कों पर घूमने वाले अन्ना मवेशी किसके हैं और कहां से आ गये। अन्ना मवेशियों के पालन पोषण के लिये प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिमाह भारी भरकम राशि खर्च किये जाने के बाद भी पशुओं की दयनीय स्थिति देखी जा सकती है। जानकारों की माने तो गौशालाओ में रखे जाने वाले मवेशियों के लिये पर्याप्त चारे पानी का प्रबंध नही होता, सरकार द्वारा आवंटित धन का बंदर बांट हो जाने के कारण पशुओं के भूखे मरने की नोबत आ जाती है। ऐसे में मवेशी भोजन की तलाश में गौशाला से निकलकर सड़कों पर आ जाते है। सड़कों पर विचरण कर रहे इन अन्ना मवेशियों से टकराकर आए दिन लोग चोटहिल होते रहते हैं। अक्सर अन्ना मवेशियों के बीच में आ जाने के कारण चार पहिया वाहनों के साथ बड़े हादसे भी पेश आ चुके है। जिसमे लोगों को उनके अपनों को खोना पड़ा। बड़े वाहन भी अक्सर इन्हें बचाने के लिये हादसों का शिकार होते रहते है लेकिन इसके बाद भी ज़िम्मेदार अफसरों ने पशुओं को उनके संरक्षण केंद्र गौशालाओं तक भेजने की न तो सुधि ली जा रही है और न ही लोगों की जानमाल की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें हाइवे से हटाने का प्रबंध किया जा रहा है।


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