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Saturday, October 23, 2021

सिंचाई विभाग कर्मी ने आयुक्त कार्यालय में खाया जहर

जिला अस्पताल में भर्ती, किया जा रहा उपचार 

पेंशन की समस्या निस्तारण की मांग को लेकर आया था 

बांदा, के एस दुबे । चित्रकूटधाम मंडलायुक्त के कार्यालय में पेंशन की समस्या का निस्तारण कराने के लिए पहुंचे सिंचाई कर्मी, जो खुद को बीआरएस लेने की बात कहता है, ने आयुक्त कार्यालय में जहरीला पदार्थ निगल लिया। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इधर, आयुक्त का कहना है कि उसे पहली नवंबर को पेंशन अदालत में आने के लिए कहा गया था। वह बाहर से ही जहरीला पदार्थ खाकर कार्यालय आया था। बताया कि वर्ष 2016 से वह अपने कार्यालय गया ही नहीं और बीआरएस लेने की बात कह रहा है। आयुक्त ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। 

अस्पताल में भर्ती राजवीर

मिली जानकारी के अनुसार बबेरू कोतवाली क्षेत्र के कोर्रही गांव का रहने वाला राजवीर सिंह (40) पुत्र गंगा प्रसाद अपने परिवार के साथ डीएम कालोनी इलाके में रहता है। वह सिंचाई विभाग में क्लर्क के पद पर तैनात रहा है। राजवीर के अनुसार वर्ष 2018 में उसने बीआरएस ले लिया था। लेकिन इसके बावजूद उसकी अभी तक पेंशन नहीं मिली। इसके चलते वह आर्थिक तंगी का शिकार हो गए। शनिवार को राजवीर चित्रकूटधाम मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह के कार्यालय पहुंचा और आयुक्त से मिलकर पेंशन की समस्या का निस्तारण करने की मांग की। आयुक्त ने पहली नवंबर को पेंशन अदालत में आने की बात कही। राजवीर के मुताबिक आयुक्त ने जब उसे फिर तारीख दी तो उसने आयुक्त के सामने ही जहरीला पदार्थ खा लिया। इसके बाद आयुक्त कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसका उपचार किया जा रहा है। राजवीर ने बताया कि पेंशन न मिलने की वजह से उस पर काफी कर्ज भी हो गया है, जिसकी अदायगी के लिए दबाव बनाया जा रहा है। 

इधर, आयुक्त दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि राजवीर बाहर से जहरीला पदार्थ खाकर उनके कार्यालय आया था। बात करने के बाद वह गिर गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आयुक्त ने कहा कि राजवीर ने उनके कार्यालय में जहर नहीं खाया। बताया कि वर्ष 1998 में राजवीर को उसकी पिता की मृत्यु के बाद नौकरी मिली थी। राजवीर अपनी माता की देखरेख नहीं करता था। इस पर मां ने उच्च न्यायालय से फरियाद की थी, बाद में न्यायालय ने राजवीर की तनख्वाह से तीन हजार रुपए देने के आदेश दिए थे। आयुक्त ने यह भी बताया कि 3 अगस्त 2016 से वह अपनी ड्यूटी पर नहीं गया। 


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