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Monday, May 3, 2021

दो दिन और बढ़ाया गया लाकडाउन, मुसीबत में गरीब

कोरोना महामारी के मद्देनजर अब गुरुवार सुबह तक लाकडाउन रहेगा प्रभावी

रोज कमाने खाने वालों के सामने पेट भरने की उत्पन्न हुई समस्या 

 बांदा, के एस दुबे । कोरोना महामारी के मद्देनजर जहां लोग अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं, वहीं लाकडाउन के चलते अब गरीब भूखों मरने की नौबत पर पहुंच रहा है। रोज कमाने खाने वाला मजदूर तबका भी अब सिसकने को मजबूर हो रहा है। शासन स्तर से जारी किए गए आदेश के तहत अब लाक डाउन मंगलवार और बुधवार को भी प्रभावी रहेगा। इसके मद्देनजर लोगों को अब परेशानियों का सामाना करना पड़ रहा है। 

गौरतलब हो कि 83 घंटे का लाकडाउन मंगलवार की सुबह खत्म होना था। लेकिन ऐन वक्त पर शासन ने लाकडाउन की अवधि को और बढ़ा दिया है। इसके चलते अब लाकडाउन मंगलवार और बुधवार को भी प्रभावी रहेगा। गुरुवार की सुबह सात बजे लाकडाउन की अवधि खत्म होगी। ऐसी हालत में आम जनता तो परेशान है ही, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत अब गरीब और मजदूर तबके को हो रही है। रोज कमाकर अपना और परिवार का पेट भरने वाले मजदूरों के सामने रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह शासन स्तर से लाकडाउन की अवधि बढ़ाई जाती रही तो पेट भरने के लाले पड़ जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण में आई तेजी के कारण लाकडाउन की अवधि बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि कोरोना के मद्देनजर लाकडाउन का पालन सख्ती के साथ कराया जाएगा। किसी भी दशा में लापरवाही नहीं होने दी जाएगी। मालुम हो कि शहर में एक तबके के सैकड़ों लोग ऐसे भी हैं जो मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। अफसोस की बात यह है कि लाकडाउन के चलते कोई रोजगार भी नहीं मिल पा रहा है। निर्माण कार्य भी पूरी तरह से ठप पड़े हुए हैं। ऐसी हालत में मजदूर तबके को काम नहीं मिल पा रहा है। अगर उनको काम नहीं मिला तो उनके घर का चूल्हा ठंडा पड़ा रहता है। इन दिनों लाकडाउन में मजदूर तबके के लोगों के सामने रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। 

लाकडाउन के तीसरे दिन सोमवार को सड़क पर पसरा सन्नाटा

समाजसेवी अभी चुप 

बांदा। कोरोना महामारी के इस दौर में लाकडाउन के दौरान गरीबों और मजदूरों का पेट भरने वाले समाजसेवी भी अभी हाथ बांधे चुप बैठे हुए हैं। गरीब है कि समाजसेवियों की ओर टकटकी लगाए हैं। खास बात तो यह है कि अभी तक शासन स्तर से भी लाकडाउन के दौरान गरीबों का पेट भरने और उनकी जान बचाए जाने के लिए कोई आदेश नहीं आया है, ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर भी अभी कोई राहत नहीं मिल रही है। लंच पैकेट या राशन सामग्री भी गरीबों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे वह अपना पेट भर सकें। हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। लाकडाउन की अवधि तो बढ़ रही है लेकिन अभी तक गरीबों और मजदूर तबके के लोगों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। 

मवेशी भी रंभाते घूम रहे 

बांदा। लाकडाउन के दौरान गरीब तबके के लोगों के साथ ही बेजुबान अन्ना मवेशियों की भी भूख भी नहीं मिट पा रही है। ऐसी दशा में मवेशी भूख और प्यास के चलते रंभाते घूम रहे हैं। शासन के द्वारा अन्ना मवेशियों के लिए गौशालाएं तो बनाई गई हैं, लेकिन जिम्मेदार ठीक तरह से संचालन नहीं कर रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में अन्ना मवेशी सड़क पर इधर उधर घूमते देखे जा सकते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। 


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