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Wednesday, May 5, 2021

बुंदेलखंड में मधुमक्खी पालन व्यवसायिक रूप में विकसित हुआ

गर्मी के मौसम में बुन्देलखण्ड में मधुमक्खी पालन का प्रबन्धन: कृषि वैज्ञानिक

बांदा, के एस दुबे । बुन्देलखण्ड की परिस्थितियां शुष्क एवं अधिक तापमान वाली है। इस पर फसल के साथ-साथ अन्य कृषि उपक्रमों में विशेष प्रबन्धन की आवश्यकता है। बुन्देलखण्ड में मधुमक्खी पालन व्यवसायिक रूप में विकसित हुआ है। वर्तमान करोना महामारी में शहद का महत्व हर ओर बढ़ा है, जिससे मांग भी बढ़ी है। भविष्य में इसकी मांग और बढ़ने वाली है। एैसे में मधुमक्खी पालन करने वाले सभी कृषक बन्धुओं को यह सलाह दी जाती है कि ग्रीष्मकाल में मधुमक्खी के बाक्स सुरक्षित रखने के लिए उनका वैज्ञानिक ढंग से प्रबन्धन आवश्यक है। कृषि विश्वविद्यालय, बांदा सहायक प्राध्यापक एवं मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डा. अखिलेश कुमार सिंह ने मधुमक्खी पालको कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिये है। 


मधुमक्खी पालन में  मधुमक्खी परिवारों का उनकी आवश्यकतानुसार उचित प्रबन्ध करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य मधुस्त्राव से पूर्व मधुक्खियों की संख्या में अधिक से अधिक वृद्धि करना तथा प्रतिकूल मौसम में परिवारों को कमजोर होने या खत्म होने से बचाना है। बुन्देलखण्ड में सबसे प्रतिकूल मौसम गर्मियों का होता है जब तापमान 45 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और मकरन्द व पराग की अत्यधिक कमी होती है। इस मौसम में कालोनियों को सुरक्षित रखने के लिए नीचे दी गई बातें ध्यान मंे रखनी चाहिये। इसमें मुख्य रूप से कालोनियों को घने छायादार स्थान पर रखनी चाहिए। शिशुकक्ष में हवा के आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिये। पानी की आवश्यकता को देखते हुए कालोनियों के नजदीक पानी का उचित प्रबंध होना चाहिये। मई, जून के महीनों मंे दिन मंे 2 बार बक्सों के उपर रखी बोरियों को पानी से अवश्य भींगाना चाहिए। कालोनियों का निरीक्षण 7-10 दिन के अंतराल पर करते रहना चाहिये। मधुमक्खी कालोनी मंे आवश्यकतानुसार कुछ शहद कालोनी मंे होना चाहिये। यदि शहद की मात्रा नही है तो आवश्यकता पड़ने पर कृत्रिम भोजन (चीनी अथवा चीनी का घोल) देने की व्यवस्था करनी चाहिए। कमजोर वंशों को आपस में या मजबूत वंश से मिला देना चाहिये। मधुमक्खियों के शत्रुओं जैसे मोमी पतंगा, अष्टपदी, चींटियों व बीमारियों का उचित प्रबन्ध करना अति आवश्यक है। खाली फ्रेमों (चैखटों) को इक्ट्ठा करके अलग संग्रहण करना चाहिये।

डा0 सिंह ने बताया कि मधुमक्खी पालन व्यवसाय से शहद व मोम के अलावा अन्य उत्पाद भी प्राप्त होते है जैसे राज अवलेह, पराग, प्रोपोलिस व मौन विष आदि। इन उत्पादों को बेच कर पैसा कमाया जा सकता है। मधुमक्खियां फूलों से मधुरस व पराग एकत्र करने के लिए जाती हैं। इसी दौरान इनके शरीर पर चिपके परागकण फूल के पर गिर जाते है, इस प्रकार पर-परागण किया होती है। फूलों में बीज बनना शुरू हो जाता है। फल या बीज बनने के लिए परागण प्रक्रिया आवश्यक होती है। मधुमक्खी पालन एवं इससे संबंधित जानकारी एवं प्रबंधन के लिए कृषि विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक एवं मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डा. अखिलेश कुमार सिंह से उनके मोबाइल नंबर 9402679767 पर सुबह 10 बजे से 11 बजे तक संपर्क स्थापित किया जा सकता है। 


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