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Thursday, May 6, 2021

जिले की संसद का अध्यक्ष पद हथियाने के लिये शुरू होगा खेल

नोटों की गड्डियो से बिछेगी कुर्सी की बिसात

सत्ताधारी दल के सदस्यों की संख्या नकाफी, निर्दलियों के भरोसे पूरा होगा सिंघासन का सपना

फतेहपुर, शमशाद खान । विकास की गंगा बहाने के नाम पर जनता के बीच जाकर वोट मांगने वाले नेता चुंनाव जींतने के बाद जनता के विकास की जगह खुद के विकास को प्रमुखता देने में लग जाते है। जिले की संसद कहे जाने वाले जिला पंचायत के बोर्ड में इस बार चुनाव जीतकर आने वाले अधिकतर नये सदस्य हैं। विकास के नारे के साथ जनता के बीच से आये हुए सदस्य अब अपने बीच से अध्यक्ष का चुंनाव करेगे। जिले के सबसे बड़े पद को हथियाने के लिये एक बार फिर से जोड़ तोड़ धन बल का सहारा लिया जाना शुरू होगा। धन बल की चकाचैंध के बीच नये सदस्यों से अपने लिये बेहतर भविष्य का सपना देखना शुरू कर दिया है। अध्यक्षी पद के लिये अभी तक एक दावेदार सामने भी आ चुके हैं। इस बार के चुंनाव में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के दस सदस्य निर्वाचित हुए है जबकि समाजवादी पार्टी के सात सदस्य, वहीं कांग्रेस पार्टी के छह सदस्य निर्वाचित होकर आए हैं। इसके अलावा 26 सदस्य निर्दलीय हैं। जिन्हें अपने पाले में करने के लिये जद्दोजहद कंरनी होगी। इस बार अध्यक्ष

 जिला पंचायत कार्यालय।

पद के लिये भाजपा नेता व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं डॉ निवेदिता सिंह के पति अभय प्रताप सिंह स्वयं टेनी वार्ड से जीतकर आये है और अध्यक्ष पद के सबसे दावेदार मानये जा रहे हैं। उन्हें बस भारतीय जनता पार्टी द्वारा अध्यक्ष पद के लिये हरी झंडी मिलने भर का इन्तेजार है। दूसरी तरफ अध्यक्षी पद के लिये समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विपिन यादव की पत्नी आरती यादव भी उम्मीदवार मानी जा रही है। भाजपा के बागी सदस्य और एझी वार्ड से सदस्य बने बड़े कारोबारी मनोज गुप्ता भी अध्यक्षी पद के मटेरियल माने जा रहे हैं। इसके अलावा मौहार वार्ड से जिला पंचायत सदस्य बनी प्रीति सिंह को भी अध्यक्षी पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों की माने तो इन्हें तीनो के बीच मे से अध्यक्षी का मुख्य पात्र निकलना तय है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिये हर बार की तरह इस बार भी कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद दिखाई दे रही है। सदस्यों के बीच इस बात को लेकर असमजंस की स्थिति बनी हुई है। अध्यक्षी की तस्वीर भले न साफ हो लेकिन तय है कि जो बड़ा दावेदार बनकर उभरता है सदस्यों के लिये उतनी ही बड़ी बोली तय होगी। ऊंट बैठता किस करवट है? यह तो बात की बात है लेकिन नये बने सदस्यों को भी इस बार पिछले बार से अधिक मोल मिलने की उम्मीद बनी हुई है। 46 सीटों के जिला पंचायत बोर्ड में अध्यक्ष पद के लिये 24 सदस्यों की जरूरत होती है। हर बार की तरह इस बार भी जोड़ तोड़ धन बल का सहारा लेना तय है। बालू, मौरंग घाटों पर अवैध खनन के अलावा अवैध बैरियरों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली जिला पंचायत के सदस्य का पद ग्लैमरस भरा हुआ होने के साथ अपना अलग रसूख रखता है। जिले की संसद की हैसियत रखने वाली जिला पंचायत के अध्यक्ष का अपना अलग ही रुतबा गालिब है। ऐसे में जिले के सर्वोच्च पद के लिये लिये जी तोड़ कोशिश में पैसों की चमक ही अपनी विशेष भूमिका अदा करेगी। किसके सर सजेगा अध्यक्षी का ताज यह तो समय ही तय करेगा लेकिन अध्यक्षी की इस जंग में मोहरों को नोटों की रोशनी में नहाना तय माना जा रहा है।


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