इंसान ही इंसान को मार रहा है ? ......... - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Thursday, April 29, 2021

इंसान ही इंसान को मार रहा है ? .........

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार )

सरकार को कोसने वाले जरा इन शब्दों पर एक नजर अवश्य डालें आज का इंसान किस तरह से कालाबाजारी कर रहा है इंजेक्शन को ब्लैक में प्राप्त हो रहे हैं 20 एवम् 25 हजार के क्योंकि इस देश की आदत है कोई भी चीज की कमी का एहसास होने के लिए इतना स्टाक कर लेते हैं काले बाजार वाले जिससे वह 10 गुना पैसा देकर ले मजबूर इंसान उन जीवन रक्षक दवाइयों को लेता है। इस तरह मानवता इंसानियत नष्ट हो रही है और सरकार को दोष देने से पहले आप अपने गिरेबान में झांकओ कि आप कितना सही हो कितना गलत है इसका आंकलन इस समाचार को लेख को पूरा पढ़े और समझे हकीकत सामने स्पष्ट हो जाएगी  आपको वर्तमान में ही जीने की आदत पड़ी हुई है !! 

आज जितने लोग Hospital Hospital चिल्ला रहे हैं और सरकार से अनंत Hospital खोलने की demand कर रहे हैं , वह सब अपने लिए ही बहुत बड़ा गड्ढा खोद रहे हैं । 

बच्चे हैं यह । वर्तमान में जीने वाले । 

यह वही लोग हैं जो वर्तमान में pizza burger दारू, 4 बज गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है  और अन्य junk food  खाकर 2 मिनट के जीभ के स्वाद के लिए अपने भविष्य के आधा जीवन Hospitals और doctors के पैरों में नाक रगड़ कर बर्बाद करते हैं और फिर System को दोष देते हैं । 

ये भविष्य नहीं देख पाते । 

आपको क्या लगता है कि जितना आप सरकार से Hospital बढाने की माँग कर रहे हैं , वह आप बुद्धिमत्ता वाला काम कर रहे हैं ?अरे ! अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं आप ! आपको स्वयं नहीं पता कि आप क्या कर रहे हैं

आप भावनाओं में बह रहे हैं ।

Hospitals जब खुलेंगे तो क्या लग रहाहैआपकोकियेअपनेmaintenance या रख रखाव का खर्चा कहाँ से निकालेंगे ?एक साधारण से Hospital के maintenance का खर्चा करोड़ रुपये आता है । 

चलो अभी तो कोरोना है , और जब सब कुछ शांत हो जाएगा तब ?? तब ये Oxygen plant क्या करेंगे ?

जितनी दवाईयों की company खुली हैं , वह क्या करेंगी ? जितने भी Medical Bed , Medical Equipments बनाने वाली कंपनियाँ क्या करेंगी ?जितने भी Hospitals हैं , वह क्या करेंगे ?? क्या अपना कारोबार समेट लेंगे ? नहीं ! बिल्कुल नहीं !! उनको customer चाहिए और वह customer आप ही होंगे । चाहे उसके लिए उनको कुछ भी करना पड़े । 

चाहे मीडिया का सहारा लेना पड़े , चाहे राजनेताओं का , चाहे सरकारी तंत्र का , उन्हें आपको अपना customer बना कर ही रखना है । जैसे पहले से कर रहे हैं वह !  कोल्ड drinks , Packed juices , और तरह तरह के ऊल जुलूल चीजों को लेकर जिस तरह इन्होंने आपके दिमाग को भरा है ताकि आप बीमार होकर इनके पास आये और customer बने रहें। 

ये एक Cycle है । प्रत्येक इंडस्ट्री एक दूसरे से एक chain से जुड़ी है । आज सभी जानते हैं , सरकार भी जानती है कि ciggarette , तम्बाकू , दारू cancer और तमाम तरह के शारीरिक और मानसिक रोग करता है लेकिन किसी सरकार की हिम्मत नहीं कि इन industries को बंद कर दे ।बल्कि इस तरह आपके brain को condition किया जाता है कि रजनीगंधा , पान पराग , दारू पीना , cigarette पीना एक शान की तरह दिखाया और परोसा जाता है।  आप क्या सोचते हैं कि जब हर Hospital 50 लाख का Oxygen Plant सरकार के कहने पर Set Up करेगा , वह  कोरोना शांत हो जाने पर आपको ऐसे छोड़ देगा ?

नहीं अब देखिएगा , आगे आने वाले ज्यादा नहीं 10 वर्षों में श्वांस के मरीज कैसे बढ़ेंगे । अभी तो hospital जाकर सबको किसी भी दिक्कत में Glucose चढ़ा दिया जाता है न , अब देखिएगा , हर एक patient को अब Oxygen वाले बेड पर लाकर oxygen लगाया जाएगा । आपके दिमाग को ऐसे डराया जाएगा कि आप मना नहीं कर पाएंगे । 


पूरी Lobby काम करेगी और सभी doctors , लेख , media reports , medical journals ऐसे विडंबना बनायेंगे कि आपको लगने लगेगा कि Oxygen चढ़वाना आवश्यक है । 

आप क्या सोच रहे हैं कि 500 bed आपने आज जबरदस्ती कहकर सरकार से और private hospitals से बढ़वा दिया तो क्या अब ये आपको छोड़ेंगे ?नहीं , ये आपको ही हर बार इस पर लेटाएँगे । ये क्यों अपना बेड खाली रखें ? क्या free में आता है Hospital का bed ? क्या बिना खर्चे और रख रखाव के होगा ये bed ?जिन जिन ने demand की थी न , वही इनके customer होंगे।  जैसे आज diabetes को लेकर है।  

सन 1999 में WHO ने DIABETES reading की criteria मात्र 1 पॉइंट से बढ़ा दिया । क्या आपको पता है मात्र एक पॉइंट बढ़ने से कितने करोड़ की जनसंख्या इसके अंदर आ गयी ?? 

कितना फायदा हुआ असंख्य pharma companies को ?? Medical device companies को ?? 

ऐसे ही Blood Pressure को लेकर !! लेकिन आप कहाँ समझेंगे ??? 

आपको तो दवाईयों का ग़ुलाम बना दिया गया है।  आपको pizza , burger , cold drinks , Refined Oil और packed edibles खाने से फुर्सत कहाँ !! आपके भोजन श्रृंखला तक को दूषित कर दिया गया , विषाक्त कर दिया गया ताकि medical industries , pharma industries और इनसे सम्बंधित उद्योग चलते रहे । 

इन्होंने आपको Urea, chemical fertilizers दिया आपके भूमि को , फसल को विषाक्त करने के लिए , जल , वायु , भूमि सब विषाक्त कर दिया ताकि आप दवाई के गुलाम बने रहें ।

और तो और आपको Hybrid सब्जियाँ , फल और अनाज तक पकड़ा दिए कि ये हमारे customer बने रहें । 

और आप बच्चों की तरह उछलते रहे कि और कुकुरमुत्ते की तरह Hospitals खोले जायें । 

मतलब स्वतंत्र नागरिक जैसे मूर्ख बनकर यह मांग करता है कि और जेल बनाये जायें , ठीक उसी तरह आप लोग कर रहे हैं । एक मूर्ख को पढ़ रहा था कि इस बार मैं ऐसी सरकार चुनूँगा जो मन्दिर इत्यादि पर न लड़कर Hospital बनवाये । हाय रे दुर्भाग्य इस भारत का !मतलब ये चाह रहा है कि हम सदा सदा बीमारियों में ही अपना जीवन व्यतीत करें।  अगर आप Hospital की जगह यह कहते कि मैं ऐसी सरकार चुनूँगा जो Hospitals को बढ़ावा न देकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर , भोजन शैली के प्रति जागरूक कर , रोगों से दूर रखकर Hospitals का ख़ात्मा करे , तो बात कुछ और होती ।लेकिन तुम बीमार लोगों को Hospital ही चाहिए क्योंकि तुम लोगों ने यह अपने भाग्य में लिख लिया है कि हम सदा सदा बीमार रहेंगे और दवाईयों के गुलाम रहेंगे । मेरा यह लेख कहीं save करके रख लेना । 

यह मेरा लेख तब याद आएगा जब इन्हीं 5 से 10 वर्षों में घर घर प्रत्येक व्यक्ति बीमार होकर hospitals का गुलाम बनेगा।  ज्यादा नहीं आपको यह 3 से 10 वर्षों के अंदर दिखाई पड़ने लगेगा जब घर घर Ventillator लगेगा जैसे आज प्रत्येज मरीज को Doctor Glucose की बोतल लटका देते हैं। 

आज हो सकता है यह बात न समझ आये , लेकिन एक दिन अवश्य आएगा , जब आएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी । मेरी बात मानिये !Hospitals की Demand करने की बजाय आप हम अपने स्वास्थ्य को क्यों न सुधारें ? 

Hospital जाने की नौबत ही क्यों आये ?क्यों न हम सरकार से यह मांग करें कि प्राकृतिक चिकित्सालय या भोजन नियम संयम इत्यादि को लेकर को संस्थान खोला जाय और जन जन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाए ?क्यों हम जड़ को नहीं पकड़ रहें हैं ?क्यों हम आग में घी डालने का काम कर रहे हैं ?क्यों हम आग को घी डालकर बुझाना चाह रहे हैं ?

कई लोगों के सिर के ऊपर से बात गुजर रही होगी , जिन लोगों के सिर के ऊपर से बात गुजर रही हो , वह समझ जाएं  कि बस  वही है Customer Hospital के ICU का पीएम, सीएम, सांसद, विधायक,पार्षद सबको गाली दे लीजिए लेकिन हम, यह जो 700- 800 का ऑक्सीमीटर 3000+ में बेच रहे यह हम हैं!जो ऑक्सीजन की कालाबाजारी कर रहे यह हम हैं! 

यह जो रेमडेसीविर को 20000+ प्लस में बेच रहे 

यह हम हैं! यह जो श्मशान की लकड़ियों में बेईमानी कर रहे

 यह हम हैं!नारियल पानी हो फल, सब्जी, अंडा, चिकन, दाल में लूट करने से लेकर अस्पतालों में बेड दिलाने तक का झांसा यह सब लोग जिन्होंने लूट मचा रखी है 

यह हम हैं,जिस देश में जिसको जहां मौका मिला तो लूटने में लग गया। यहाँ कोई भी व्यक्ति सिर्फ तब तक ही ईमानदार है जबतक उसको चोरी करने का या लूटने का मौका नही मिलता।अरे भाई।कुछ खुद को भी टटोलो।

हम कितनें मासूम हैं..जो डॉक्टरों द्वारा विटामिन सी  अधिक लेने की कहने पर 50 रुपये प्रति किलो का नींबू 150 रुपये प्रति किलो बेचने लगते हैं.जो 40-50 रुपए का बिकने वाला नारियल पानी ₹100 का बेचने लगते हैं,जो मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी सुनते हैं, तो ऑक्सीजन की इतनी कालाबाजारी हो रही है किसी को ऑक्सीजन नहीं मिल रही है और किसी के यहां सीजन के सिलेंडरों का अंबार लगा हुआ है कालाबाजारी शुरू कर देते हैं,जो दम तोड़ते मरीजों की दुर्दशा देखते हैं तो रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करनी शुरू कर देते हैं।जो अपना ईमान बेच कर इंजेक्शन में पैरासिटामोल मिलाकर बेचने लगते हैं।जो डेड बॉडी लाने के नाम पर पानीपत से फरीदाबाद तक के ₹36000 मांगने लगते हैं,जो मरीज को दिल्ली गाजियाबाद मेरठ नोएडा स्थित किसी हॉस्पिटल में पहुंचाने की बात करते हैं तो एंबुलेंस का किराया 10 से 15 हजार किराया मांगने लगते हैं,क्या वास्तव में हम बहुत मासूम हैं.. या लाशों का मांस नोचने वाले गिद्ध... गिद्ध तो मरने के बाद अपना पेट भरने के लिए लाशों को नोचता है पर हम तो अपनी तिजोरियां भरने के लिए जिंदा इंसानों को ही नोच रहे हैं, कहाँ लेकर जाएंगे ऐसी दौलत या फिर किसके लिए ,कभी सोचा है आपने?एक बार सोचना जरूर,एक दिन हिसाब सबको देना पड़ेगा, जनता की अदालत में नहीं तो ईश्वर की अदालत में,हिंदुस्तान को आज कोरोना नहीं मार रहाइंसान इंसान को मार रहा है। सेम रक्षा करो दूसरों की भी रक्षा करोोोोो इंसानियत मानवता को जिंदा रखो इसकीी आवश्यकता है।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages