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Tuesday, April 20, 2021

महानगरों में लॉकडाउन लगते ही दोआबा लौटने लगें प्रवासी

एक बार फिर जीविका छोड़ लौटने को हुए मजबूर

साधन बन्द होने व पैदल लौटने का दंश आया याद

फतेहपुर, शमशाद खान । दिल्ली, मुम्बई, गुजरात जैसे राज्यों के महानगरो में मजदूरी करने को गये प्रवासी मजदूर एक बार फिर से इन राज्यों के महानगरों में बढ़ते कोरोना संकट के कारण होने वाले लॉकडाउन से एक बार फिर से घर वापसी को मजबूर हो गये है। दूसरी बार कोरोना संकट गहराने की वजह से अपना सब कुछ छोड़छाड़ कर घर लौटने और दोबारा जीविका शुरू करने के बाद दूसरी बार फिर से वापस लौटन ही मजबूरी के बीच प्रवासियों की घर वापसी का सिलसिला बढ़ने लगा है। कोरोना महामारी के पहले ही दौर में अपना सब कुछ छोड़कर मजदूरों को घर वापसी ले लिया लंबी जद्दोजहद कंरनी पड़ी थी। संसाधनों के अभाव में लोगों को पैदल ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके घर लौटना पड़ा था। कुछ खुशकिस्मत लोगो में किसी को वापसी के लिये ट्रकों का तो किसी को ऑटो रिक्शा और बाइक का सहारा मिल गया। एक वर्ष पूर्व लगे लॉकडाउन में कामकाज ठप होने के

आदर्श रेलवे स्टेशन से बाहर आते प्रवासी मजदूर।

कारण लोगों को भूखों मरने की नौबत आ गयी थी जिसके बाद लोगों ने साधन के अभाव में ही घर लौटना शुरू कर दिया था। एक बार फिर से कोरोना के हालात बेकाबू है और महानगरों में रात्रि कफ्र्यू के बाद लॉकडाउन लगाने की शुरुआत हो चुकी हैं। महानगरों में मजदूरी को गये इन मजदूरों के मन में लॉकडाउन को लेकर तरह तरह की संकाएं भी है और खुद व परिवार को चिंता भी ऐसे में घर वापसी ही सर्वोत्तम विकल्प मानकर मजदूरों ने एक बार फिर से घर वापसी करना शुरू कर दी है। देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को लॉकडाउन लगाए जाने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों के साथ जनपद के मजदूरों ने भी दोआबा की धरती स्थित अपने गांव की वापसी में और तेजी दिखानी शुरू कर दी। सोमवार की रात्रि को लॉकडाउन लगने की सूचना मिलते ही दिल्ली के अंतर्राज्यीय बस स्टैंड आनंद बिहार बस स्टैंड नई व पुरानी दिल्ली रेलवे पर अपने गांव की वापसी के लिये प्रवासी मजदूरों का हुजूम उमड़ पड़ा और जिसे जो भी साधन मिल सका। उसी पर सवार होकर होकर खुद को व अपने परिवार को बचाने के लिये निकल पड़े। जनपद पहुंचने वाले प्रवासियों में सबकुछ छोड़कर आने का दुख भी दिखा और भूख और महामारी से बचने के लिये सुरक्षित घर वापसी की खुशी भी दिखाई दी।


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