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Thursday, April 29, 2021

डॉक्टरों ने किया किनारा, जनता को मेडिकल स्टोरों व झोलाछाप का सहारा

दवाइयों के लिये लोगो की उमड़ती भीड़

फतेहपुर, शमशाद खान । कोरोना महामारी के दौरान एक ओर संक्रमण लोगों के लिये चिंताजनक बना हुआ है वहीं सरकारी अस्पतालो की ओपीडी बन्द है। इन डॉक्टरों की देखादेखी प्राइवेट डॉक्टरों ने भी ओपीडी बन्द कर दी है। जिससे छोटी-छोटी समस्याओं पर डॉक्टरों से सलाह लेने वाले बुजुर्गों से लेकर नौनिहाल बच्चों तक को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान चारों ओर समस्याओं से घिरे हुए लोगो के लिये मेडिकल स्टोर्स व झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक सबसे बड़ा सहारा बनते हुए देखे जा सकते है। 

मेडिकल स्टोरों में दवाई लेते मरीज व तीमारदार।

आम तौर पर किसी रजिस्टर्ड डॉक्टरों के पास लंबे समय से बतौर मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे लोग अपना खुद का क्लीनिक शुरू करते है। किसी तरह की डिग्री न होने के कारण इन्हे फर्जी या झोलाछाप कहते है। वहीं मेडिकल स्टोर्स में फार्मिसिस्ट द्वारा मरीजों को देखकर दवाइयां दिए जाने का प्रवधान था। कोविड 19 के दौरान बीमार पड़ रहे लोगों को अब सरकारी संस्थाओं द्वारा ओपीडी इलाज नहीं मिल रहा है। ऐसे लोगों के सामने झोलाछाप का ही विकल्प दिखाई दे रहा है। वहीं हल्के फुल्के मामलों में लोग केवल मेडिकल स्टोर जाकर खांसी, जुखाम, दर्द, उल्टी आदि की समस्या बताकर दवाई लाते है। कोरोना के इस आपदा के दौर में डॉक्टरों की नियमित सलाह के अभाव में मरीजों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जनपद की सभी तहसील व ब्लाक स्तर पर तमाम फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। कोरोना की इस आपदा के दौर में  झोलाछाप डॉक्टरों का इलाज एक अच्छे चिकित्सक की तरह लोगों के स्वास्थ्य को सहारा देने के काम में लगा हुआ है। वहीं इलाज कराने आये लोगों का कहना रहा कि असपतालों में डॉक्टर नहीं है ऐसे में छोटे डॉक्टरों से दवाई की एक दो खुराक से ही लोग ठीक हो जा रहे है। जबकि मेडिकल स्टोर्स पर भी यही हाल है।


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