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Tuesday, April 20, 2021

मानवता इंसानियत नष्ट होती .....

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार)

........ आज हम देख रहे हैं की सत्य के पथ पर चलने वाला व्यक्ति हमेशा परेशान रहता है जितना कुकर्मी अत्याचारी वैमनस्यता इंसानियत नष्ट हो चुकी है वह लोग भाग सुखीहैं, जब कोई अपने पद का झूठ का सहारा लेकर किसी का हित कर देता है और इंसानियत मानवता को भूलकर सिर्फ अपने स्वार्थ में अंधा हो जाता है, ऐसे लोग किसी भी व्यक्ति या संस्था के वफादार नहीं होते हैं सिर्फ वह मौकापरस्त होते हैं उन लोगों के कारण बहुत से लोगों का नुकसान हो जाता है लेकिन उनका कुछ नहीं होता इसी को कहते हैं इंसान की इंसानियत खत्म हो गई है आज भी हम लकीर के फकीर है ,कब तक लकीर के फकीर बन कर निर्णय देते रहेंगे कितने लोगों का नुकसान करेंगे कितने लोगों का जीवन ले लेंगे कितने लोगों को बीमारियों से ग्रस्त करेंगे बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो पीड़ादायक होती है,जब व्यक्ति की इंसानियत मानवता नष्ट हो जाती है वह व्यक्ति अपने स्वार्थ में अंधा हो जाता है और उस


व्यक्ति की पद का लाभ उठाते हुए अपने छोटे कर्मचारियों का इंसानियत मानवता भूलकर झूठ का सहारा लेकर और उन लोगों का नुकसान कर देते हैं। आज जो लोग इंसानियत भूल गए हैं मैंने पत्र के माध्यम से एक जानकारी प्राप्त हुई इंसानियत मानवता क्या है जो उस संस्थान के लोग हैं फील्ड में ताकत रखने वाले लोग उन्हें हम मैनेजर भी कह सकते हैं वह उस संस्थान के विपरीत स्वयं अब अभीकर्ताओं के साथ मिलकर उस कंपनी के नाम धन संबंधी मुकदमा करवाते हैं तरीका बताते हैं इस तरह काम करोगे तभी आपका कल्याण होगा इस तरह के लोग आज संस्था में इंसानियत मानवता को भूलकर चलने वाले लोग अपने रोजी रोटी का जो सहारा है उसके साथ गद्दारी करते हुए धन संबंधी प्राप्ति के लिए मुकदमा लिख वाते हैं जैसे उपभोक्ता फोरम लोअर कोर्ट और अन्य प्रकार के द्वारा नोटिस भिजवाने का कार्य करते हैं उनका एक ही रवैया होता है चोर से कहो चोरी करें और साहूकार से को जागते रहे ऐसे लोग भी असफल है लेकिन ऐसे लोगों की सफलता का समय बहुत कम होता है जब ईश्वर अन्याय को देखता है यह मानो कि इंसानियत मर चुकी है स्वार्थ में अंधा हो गया है वह कहीं ना कहीं से ईश्वर उसको दंड देता है मनुष्य की इंसानियत के संबंध में मैंने कुछ इतिहास के बारे में देखा बहुत से पन्नों को बड़ा और उसके बाद आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं इंसानियत और मानवता क्या है मनुष्य को इंसानियत यानी मानवता जैसी भावनाओ को अपने दिलों में रखना चाहिए। आजकल मानवता इतनी शर्मसार हो गयी है कि लोग अपनों का नुकसान करने में पीछे नहीं हटते है। परोपकार और भलेमानस के गुण लोगोमनुष्य को इंसानियत यानी मानवता जैसी भावनाओ को अपने दिलों में रखना चाहिए। आजकल मानवता इतनी शर्मसार हो गयी है कि लोग अपनों का नुकसान करने में पीछे नहीं हटते है। परोपकार और भलेमानस के गुण लोगो को मानवता की राह पर ले जाते है।मानवता जैसे भाव रखने वाले लोग इस समाज को एक दूसरे के संग जोड़कर रखते है। ऐसे लोग बिना स्वार्थ के लोगो का भला करते है। ऐसे लोग समाज में प्रेम और भाईचारे का पाठ पढ़ाते है। मनुष्य को ईश्वर ने बोलने की शक्ति प्रदान की है। मनुष्य अपने मन के हर तरह के भावो को प्रकट कर सकता है।इसलिए मनुष्य को अपने आप में इंसानियत हमेशा जिन्दा रखनी चाहिए। ज़रूरतमंदो की मदद करनी चाहिए और अपनों को सहारा देना चाहिए। आजकल मनुष्यो में संवेदनहीनता और मानवीयता की कमी देखी गयी है। दुनिया में अनगिनत समस्याएं और परेशानियां है, इसलिए मनुष्य को परोपकारी होना ज़रूरी है। संसार को मानवता की आवश्यकता है।कई देशो में गरीब लोगो और बच्चो पर अत्याचार किये जाते है। गरीबो का शोषण नहीं करना चाहिए। गरीब और गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले लोगो के प्रति दया भाव रखना चाहिए, क्योकि वह भी इंसान है।लोग आजकल अपने स्वार्थ और अशिक्षा के कारण गैर कानूनी कार्य कर रहे है। बाल शोषण, चोरी डैकती, खून खराबा इत्यादि अपराध हो रहे है। ऐसे में इस दुनिया को मानवता की ज़रूरत है। गरीब मज़दूरों को ज़रूरत से ज़्यादा काम करवाया जाता है, उन्हें पूरे पैसे भी नहीं मिलते है।उनकी हालत दयनीय हो गयी है। आजकल धन वान लोगो ने भी जैसे मानवता खो दी है। उद्योगों के मालिकों में गरीब मज़दूरों के प्रति रहम होना चाहिए, मगर ज़्यादातर मामलो में मानवता की कमी देखी गयी है।कई स्थानों पर मज़दूरों से पशुओं की तरह कार्य करवाया जाता है। समाज में आये दिन हत्या, लूटपाट जैसे अपराधो का सिलसिला बढ़ता चला जा रहा है। इससे पता चलता है कि मानवता समाप्त हो रही है। कई मनुष्यो ने जानवरो के प्रति बुरा बर्ताव करके भी इंसानियत खो देने का काम किया है।आयेदिन लोगो का अधिकार छीनकर लोग रिश्वतखोरी जैसे अपराधो में संलग्न हो रहे है। जिस प्रकार समाज में अपराधों की संख्या बढ़ रही है, उससे यह समझा जा सकता है कि दुनिया से मानवता खत्म होती जा रही है।महिलाओं के साथ अपराधो की गिनती रुकने का नाम नहीं लेती है। बलात्कार, हत्या, यौन शोषण, इत्यादि घिनौने अपराध हर मिनट हो रहे है। इंसानियत जैसे शर्मसार हो गयी है।दुनिया में मिटती हुयी मानवता चिंता का विषय बन गयी है। क्यों लोग अपना संयम खोकर गलत अपराध कर रहे है और मासूम लोगो को नुकसान पहुंचा रहे है।अगर रास्ते में कोई आदमी जख्मी हालत में पड़ा है तो उसे तुरंत अस्पताल में दाखिल करवाना मानवता की पहचान है। मानवता जताने के लिए गरीब भूखे इंसान को खाना खिलाया जाता है। अगर कोई वृद्ध इंसान रास्ता पार नहीं कर पा रहा है तो उसे सड़क पार करवा सकते है।मनुष्य समाज में रह रहे लोगो की मदद करके अपनापन जता सकते है। ऐसे उदाहरणों से मानवता का परिचय मिलता है। जिन्दगी में बेबस लोगो की सहायता करके, हम अपने मन में संतुष्टि ला सकते है और इंसानियत को जगा सकते है। सफल जीवन और सभ्य समाज के निर्माण के लिए मानवता की ज़रूरत है।

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