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Saturday, April 24, 2021

रमजान का दूसरा शुरू, भरपूर करें जकात-कारी फरीद

फतेहपुर, शमशाद खान । रमजान माह के ग्यारह रोजे मुकम्मल हो गये हैं। जिसके साथ ही रमजान का दूसरा अशरा भी शुरू हो गया है। दूसरे अशरे पर काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कहा कि मगफिरत वाले इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा इबादत करके अपने परवरदिगार को याद करें और रोजदार गरीब, मोहताजों को भरपूर जकात देकर अपने माल को पाक-साफ बनायें। क्योंकि पैगम्बरे इस्लाम ने इरशाद फरमाया शाबान मेरा महीना है और रमजान अल्लाह तआला का महीना है। लिहाजा जो बंदा पूरे माह के रोजे रखता है तो अल्लाह तआला उसके गुनाहों को बक्श देता है और रोजदार जन्नत (स्वर्ग) का हकदार हो जाता है। 

काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन।

काजी-ए-शहर श्री कादरी ने कहा कि बचे हुए दूसरे और तीसरे अशरे में मुस्लिम समाज के लोग खूब इबादत करके अल्लाह तआला को राजी करें और अपने गुनाहों की गिड़गिड़ा कर माफी तलब करें। शहरकाजी ने कहा कि जो आकिल (अक्लमंद) बालिग मुसलमान रोजा नहीं रखता वह गुनेहगार है और रमजान का रोजा एक भी जान बूझकर छोड़ता है तो वह पूरी जिन्दगी रोजा रखे तो भी छोड़े हुए एक रोजे की भरपाई नहीं कर सकता। क्योंकि पैगम्बरे इस्लाम ने इरशाद फरमाया कि जो मुसलमान बगैर शरई उज्र के एक भी रोजा छोड़ता है तो वह गुनेहगार होगा उन्होने अवाम से अपील किया कि इस मुकद्दस माह का अदबो एहतराम करते हुए नमाज की पाबंदी के साथ-साथ रोजे भी पाबंदी से रखें। क्योंकि इस माह में अल्लाह के नजदीक रोजे से बढ़कर कोई इबादत नहीं है। रमजान माह में जन्नत यानी (स्वर्ग) के दरवाजे अल्लाह के बंदों के लिए खोल दिये जाते हैं। शहरकाजी ने कहा कि मकान मालिक व मालदारों को चाहिए कि वह मोलाजमीन से काम कम ले ताकि वह भी इतमिनान के साथ रोजा रख सके। बेवा, गरीब, यतीम, मिस्की जो अपने बच्चों के खाने-पीने का अच्छा इंतजाम नहीं कर सकते उन पर खुसूसी तवज्जो दे।


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