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Tuesday, April 20, 2021

ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत का बढ़ा सिलसिला

जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन सुविधा का अभाव, निजी अस्पतालों के सहारे मरीज

सीएमएस का नम्बर रहता स्विच ऑफ, सीएमओ बोले जिला अस्पताल हमारे अंडर में नहीं

समय से नहीं चेते तो जनपद में महानगरो जैसे बेकाबू हो सकते हालात

फतेहपुर, शमशाद खान । देश में गहराते कोरोना संकट के बीच प्रदेश के कई शहरों में कोरोना मरीजों की सँख्या बेकाबू होती जा रही है। महानगरों व उसके आस पास के जनपदों में न तो कोरोना से महामारी से लड़ने के लिये अस्पतालों के पास संसाधन बचे हैं बेड और ऑक्सीजन तक नहीं है। ऐसे में प्रदेश में मौत की सुनामी सी आ गयी है। कोरोना के कहर का लगातार बढ़ना जारी है और इसकी चपेट में आने से जनपद भी अछूता नहीं रह सकता। बद से बदतर होते हालातों के बीच जनपद में भी महानगरो जैसे स्थिति कभी भी खड़ी हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से सांस लेने में दिक्कत होने वाले मरीजों की सँख्या बढ़ी है। सांस लेने की तकलीफ से अचानक होने वाली मौत की घटनायें भी बढ़ी है। इन आकस्मिक हो रही मौतों को लेकर जनपदवासी परेशान नजर आ रहे है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर और कोविड संक्रमण को देखते हुए जिला अस्पताल समेत सीएच सीएचसी व पीएचसी में ओपीडी तक बन्द है और इन हालात में बीमारों का कोई पुरसाहाल नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे ही है।

आक्सीजन सिलेण्डर।

हालात ऐसे बन गये है कि गंभीर हालात में जिला चिकित्सालय लाने वाले मरीजों को ऑक्सीजन न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। ऐसे मरीजों को निजी चिकित्सालय या कानपुर जनपद के लिये रिफर किया जा रहा है। निजी अस्पतालों का खर्चा वहन करने में असमर्थ लोगों की इलाज के अभाव में मौत हो रही है। इलाज के अभाव में अपनों को तड़पता देखना और उसके बाद आंखों के सामने होने वाली मौत देखकर किसी की भी रूह तक कांप सकती है लेकिन इसके बाद भी न तो हालातों से सबक लिया जा रहा है और न ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कोई पहल ही हो रही है। हर रोज जिला चिकित्सालय में सांस लेने में परेशानी का सामना करने वाले दर्जनों मरीजों को ऑक्सीजन न होने का बताकर अस्पताल से रिफर किया जा रहा है। किस्मत के धनी कईओ को निजी अस्पताल व गैर जनपद के सहारा मिल जाता है लेकिन बहुतों को ऑक्सीजन की कमी की वजह से अपनी जान तक गवानी पड़ रही है। केंद्र एव प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना जांच, वैक्सीनेशन और कोविड महामारी नियंत्रण अभियान के बीच मात्र ऑक्सीजन न मिलने की वजह से मरीजों की हो रही मौत चिंता का विषय है। मात्र ऑक्सीजन की व्यवस्था न होने के कारण किसी की जान चली जाय इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। वहीं जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों को लौटाये जाने और ऑक्सीजन न मिलने से मरीजों की हो रही मौत को लेकर सीएएम डॉ प्रभाकर से बात करने की कोशिश की गयी तो उनका नम्बर स्विच ऑफ बताता रहा जबकि सीएमओ ने फोन पर ही सीएमएस के नम्बर बन्द होने की शिकायत दर्ज कराने और जिला चिकित्सालय का उनके अंडर में न होना बताया। स्वास्थ्य विभाग के मुखिया का दुर्भाग्यपूर्ण बयान आम जनता को मिल रही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को समझने के लिये काफी है। प्रदेश के साथ साथ जनपद में बढ़ रहे कोरोना मरीजों की संख्या और हालातों से निपटने की जगह बदइंतजामी और इसके बीच सीएमओ का जिम्मेंदारी से पल्ला झाड़ देना कोविड से निपटने की सीएम योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे की तैयारियों पर पलीता लगाना ही कहा जायेगा। जनपद में कोरोना मरीजों की बढ़ रही संख्या के बाद भी यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गयी तो सरकारी व्यवस्थाओं के भरोसे रहने वाला आम आदमी कहां जायेगा और आने वाले समय में इस बद इंतेजामी की वजह से जनपद के हालात भी महानगरों की तरह बेकाबू हो सकते है।


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