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Friday, April 16, 2021

पापा मम्मी को प्यार नही करते ?

सी पी रॉय की कलम से 

मम्मी पापा और सब भाई बहन बस यही तो दुनिया है इस परिवार की ।जो भी है मिल बांट कर खा पी लेना और सब सुख दुख मिल बांट कर जी लेना । अचानक दुख का पहला बडा पहाड टूट पड़ा परिवार पर और बडा इसलिए कि बाकी दुख तो पता ही नही चले थे कि कब निकल गये माँ और पिता के प्यार तथा संबल और भाई बहनो के आपसी समर्पण और सद्भाव मे ।पर इसबार तो जीवन का आधार ही हिल रहा था ।माँ ही बीमार पड़ गई थी । पिता और बड़े भाई डा को दिखाने से लेकर दवाई लाने तक सब करते तो बाकी भाई बहन भी माँ की देख भाल मे कोई कसर नही छोड रहे थे । पर उस दिन सचमुच का पहाड टूट पड़ा था विपत्ति का जब माँ की सांसे थम गई थी । सब बुला रहे थे, हिला रहे थे और लगातार कोई हाथ मल रहा था तो कोई पैर तो कोई सर सहला रहा था पर माँ थी कि जिद कर चुकी थी कि अब नही बोलूंगी तो नही ही बोलूंगी देखू कोई क्या कर लेता है 


तभी पापा की आवाज आई कि उठाओ इन्हे और अब जमीन पर लिटा दो । सब एक साथ कितना जोर से चीख पड़े थे पापा पर कि क्या बात करते है कि माँ को जमीन पर लिटा दे ,क्या हो गया आप को ? तब पापा थोडा कठोर होते हुये मुश्किल से बोल पाये थे कि बच्चो अब माँ नही रही अब इन्हे जमीन पर ही लेटाना होगा सब इन्तजाम कर ले जाने से पहले । सब फिर चीख पड़े कहा ले जायेंगे ? माँ हमे छोडकर कैसे जा सकती है ? तो फिर थोडा और कठोर स्वर गूंजा कि बच्चो अब अन्त हो गया माँ के जीवन का और अब अन्तिम संस्कार के लिए ले जाना होगा और बेटो का नाम लेकर बोले कि जमीन पर लेटा कर तुम जावो अन्तिम संस्कार का सामांन फला दुकान से ले आओ और तुम लोग रिश्तेदारों को और पडोसियो की खबर कर दो । तब अचानक कितना जोर से सब रो पड़े थे एक साथ पर पापा बिल्कुल नही रोए थे और सब इन्तजाम मे खुद भी लग गये । बडा झटका लगा था सभी बच्चो को कि इतने साल जिस माँ के साथ रहे जिन्हीने कितनी सेवा किया पर पापा उनसे प्यार ही नही करते ।देखो कैसे पत्थर जैसे बने हुये है ,एक बूंद आसू नाम के लिए भी नही । लोग इकट्ठे हो गये जो रिश्तेदार आ सकते थे और आसपास के कुछ लोग और बिस्तर पर सोने वाली माँ को आज कैसे कैसे बास और उसके टुकड़ो का बिस्तर बना उस पर लेटा कर बांध दिया गया और फिर कन्धो पर उठा कर चल डिए सब लोग । माँ बताती थी की वो जब शादी होकर इस घर मे आई थी तो कोई गाडी वाड़ी नही थी बल्कि कहार पालकी मे लेकर आये थे । और आज अपने लोग लेकर जा रहे थे खुरदरे से बनाये गये बिस्तर पर और कितना प्रेम से सज़ा कर लायी गई थी इस घर मे और आज सब कुच उतार कर जला दी जायेंगी । क्यो बनाया है भगवान ने ये व्यवस्था ? जीवन क्यो और जीवन तो दुख क्यो। दुख भी ठीक तो अपनो को छोडकर जाने वाली ये मौत क्यो ? 

पता नही क्या क्या विचार आ रहे थे मन मे पर आँखो से बहती नदी लगातार उफान ले रही थी सभी की आंखो से और चीख रुकने का नाम नही ले रही थी ।कितनी औरते थी जो सम्हालने की कोशिश कर रही थी पर सब नाकाम थी । सब सोच रहे थे की ये सब तो गैर है अभी आ गये है फार्मलटी के लिए जो हम लोगो पर बीत रही है ये क्या जाने । बार बार ख्याल आता पापा तो जरा भी नही रोए । क्यो नही रोए ? क्या बिना किसी भावना के इतने सालो से मम्मी के साथ रह रहे थे ? क्या उनका प्यार झूठा था और बस दिखावा था ?  दिन बीतने लगे अकसर भाई बहन यही बात करते की पापा नही रोए ? वो मम्मी की प्यार नही करते थे ।इस बात पर सब भाई बहन एकमत होते गये और पिता के प्रती विचार थोडे बदल से गये और व्यव्हार भी । उस दिन काम जल्दी खत्म हो गया था तो सभी बहन ने तय किया की चल कर छत पर बैठा जाये ,अच्छी हवा चल रही है । छत की आखिरी सीढ़ी पर पहुचे ही थे की जोर जोर से हिचकी की आवाज आ रही थी और लग रहा था कि कोई अपना रोना दबाने की कोशिश कर रहा हो ।

अरे ये तो पापा है ।सव दौड कर पास पहुचे तो देखा कि मुह मे तौलिये का एक छोर दबाए हुये वो रो रहे थे । सबने पूछा कि क्या हो गया पापा ? बहुत देर तक कोई जवाब नही मिला ।सब बिल्कुल पास आ गये और अपने अपने तरीके से पापा का हाथ पैर सर सहलाने लगे तो लगा की जैसे रुका हुआ बांध अचानक टूट गया हो । बड़ी मुश्किल से सबने मिल कर सम्हाला था पापा को । फिर सब जानने को उत्सुक थे कि आज क्या हो गया । बड़ी मुश्किल से बोले थे पापा "वो बीच रास्ते छोडकर चली गई ,जब तक संघर्ष था चट्टान बन कर साथ खडी रही और थोडा वक्त ठीक हुआ  अकेला कर गई मुझे । सब बच्चे भी साझीदार हो गये आज फिर गम मे कि पापा आप इतना प्यार करते थे माँ को पर कभी बोला क्यो नही ? हम सब पता नही क्या क्या सोचने लगे थे । दरार भर गई थी ,बाध के बहाव के साथ बहुत कुछ बह गया था और फिर सुख दुख साथ झेल लेने वाली मुट्ठी मजबूत हो गई थी ।

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