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Thursday, April 22, 2021

पितरों का स्मरण करने से खत्म होते हैं दोष: दीनबन्धु

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बडीगुफा जानकीकुण्ड में कथा वाचक दीनबन्धु दास ने वर्चुअल आॅनलाइन रामचरित्र मानस कथा सुनाते हुए कहा कि मानस कथा का उत्सव संपन्न होने जा रहा है। इस वर्ष ठाकुर जी ने घर में जा जाकर दर्शन दिए है। जिसका कारण वैश्विक महामारी है। भगवान से प्रार्थना करते है कि कोरोना महामारी को तत्काल समाप्त करे। इस रामकथा यज्ञ के माध्यम से आहुति दी है। पवित्र जगह मंदिर में भगवत चर्चा में सुख मिलता है। भले ही श्रोता प्रत्यक्ष रूप मे न हो लेकिन रघुवीर सरकार, हनुमानजी, मंदाकिनी मैया, संत रणछोडदास ने खुद अपनी कथा सुनी। महाराज ने कहा कि भगवान के जन्म के पश्चात अवध में महीनों बधाई उत्सव चला। वैष्णवों को उत्सव में अत्याधिक सुख प्राप्त होता है। यदि घर में ठाकुर जी है तो वर्ष में एक उत्सव अवश्य मनाए, क्योकि भगवान को उत्सव बहुत प्रिय है। प्रसन्नता पूर्वक जो मनाया जाए वह उत्सव है। उत्सव में वैष्णव प्रेमी जनों को आमंत्रित किया जाना चाहिए। भगवान तभी प्रसन्न होते है। उत्सव किसी भी प्रकार का चाहे जन्म, श्राद्ध कर्म, करणभेदन, अन्नप्रासन आदि प्रयोजनों को लेकर भगवान का उत्सव मनाना चाहिए। रामनवमी के

कथावाचक दीनबन्धु दास।

रूप में भगवान राम का उत्सव मनाया गया। बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि आज रामचरित्र मानस का प्राक्टय उत्सव भी है। बताया कि भगवान के जन्म होने पर रोने की आवाज सुनकर सभी रानी यानि 700 राजा दशरथ की रानियां माता कौशिल्या के निवास में आयी। रामजन्म से दशरथ जी की प्रसन्नता एैसे हुयी मानो ब्रहानंद की प्राप्ति हो गई। प्रकटे है चारों भईया अवध में बाजे बधइया। एैसा प्रतीत हो रहा है कि हर घर में रामजन्म हुआ है। जिनकी कृपा से फल की प्राप्ति हो उनका पहले धन्यवाद देना चाहिए। इसीलिए महाराजा दशरथ ने गुरू वशिष्ठ को कुटुम्ब सहित बुलवाया। गुरू वशिष्ठ ने जन्म के समय के सभी संस्कार विधिवत कराये। अपनी शास्त्रीय परंपरा नही भूलनी चाहिए। कोई भी उत्सव में भगवान एवं पितरों का स्मरण सबसे पहले करे तो सारे दोष समाप्त हो जाते है। भगवान के जन्म के समय सूर्यनारायण रूक गये, सूर्य के घोडों की गति रूक गई। मास दिवस का दिवस भा, मरम न जाने कोय रथ समेत रवि थाकयो निशा कवन विधि होय। सूर्य नारायण की प्रसन्नता का एक कारण यह भी है कि आज उनके कुल में भगवान राम का जन्म हुआ है। इस प्रकार बाल लीला से लेकर गुरू कुल, वनवास, सीता हरण, रावण वध की कथा सुनाकर रामनवमी के दिन विश्राम लिया। कथा की समाप्ति नही होती, क्योंकि हरी अनंत हरी कथा अनंता। भगवान अनंत है तो कथा भी अनंत होगी। आनंद केवल भगवान के स्वरूप में ही मिलेगा। आनंद के सिंधु है परमात्मा इस सिंधु से एक बूंद आनंद की सबको बंाटा गया है। कितना आनंद आया होगा इसका अनुभव सभी स्वयं कर सकते है। कथा समाप्ति के बाद वैश्विक महामारी को समाप्त करने के लिए हवन यज्ञ भी किया गया।


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