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Friday, April 16, 2021

निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवहेलना................

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(वरिष्ठ पत्रकार )

.......... आइए हम आज बात करते हैं जिला पंचायत की चुनाव के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में महिलाओं की चुनाव ड्यूटी नहीं लगाई गई और कुछ जनपदों में महिलाओं की और पुरुष की ड्यूटी लगाई गई जबकि दोनों सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं कोई पति पत्नी अध्यापक हैं और अन्य कोई किसी विभाग में कार्यरत हैं उनकी ड्यूटी लगाई है जबकि निर्वाचन आयोग के निर्देश थे कि अगर पति पत्नी दोनों कार्य पर हैं नौकरी पर हैं तो उसमें से एक व्यक्ति की ड्यूटी नहीं लगेगी लेकिन बहुत सी जगह में जानना चाहा औरैया में भी खामियां मिली इटावा में भी खामियां मिली और हमारे संवाददाताओं ने मिर्जापुर जौनपुर और उसके बाद बुंदेलखंड आता है बुंदेलखंड में झांसी में बहुत ही ज्यादा जो निर्वाचन आयोग के निर्देश दे उस आधार पर ड्यूटी या नहीं लगी जिन लोगों ने फर्जी ट्रीटमेंट के पर्चे बनवाए और अपनी रिपोर्ट लगाई उनको झांसी में ड्यूटी काटी गई और जो वास्तव में परेशान थे बीमार थे जिनके छोटे-छोटे बच्चे थे गोदी में और ऐसी जगह ड्यूटिया लगाई है जिनके पति पत्नी दोनों शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं हम बात करते हैं बड़ी बड़ी लंबी चौड़ी लेकिन जब नियमों का पालन निर्वाचन आयोग के दिए हैं निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है जब मैंने एक झांसी में सक्षम अधिकारी से बात की तो उन्होंने स्पष्ट कहा अगर पति पत्नी की दोनों की ड्यूटी लगी है तो उनको जाना पड़ेगा यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी जी के हैं महोदय मुझे लगता है वह अधिकारी इस बात को गलत कह रहा है कि मुख्यमंत्री जी देश के कानून के मानने वाले हैं कानून का पालन करने वाले हैं कानून का पालन कराने वाले हैं मैंने किसी समाचार पत्रोंयह किसी में यह चीज नहीं पड़ी कि योगी जी ने कहा कि अगर पति पत्नी की ड्यूटी लगी है तो दोनों करेंगे आज झांसी में काल्पनिक नाम रामाश्रय पत्नी विद्या देवी की ड्यूटी लगी जबकि दोनों पति पत्नी सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं एक की ड्यूटी मऊरानीपुर लगी और पत्नी की ड्यूटी मोड में लगी है वह सब जगह अपनी बात को कहा लेकिन किसी ने नहीं सुना एक स्पष्ट तौर पर अगर योगी जी की सरकार ने नियमों के प्रति और अधिकारियों के प्रति ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैंने जा जा कर यह समीकरण देखें चुनाव के 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव है उस चुनाव के आधार पर कर्मचारियों की जो मानसिकता है वह भाजपा विरोधी होती जा रही है इस विरोध को भाजपा कैसे रोकती है इस आधार पर रूकती है क्योंकि भाजपा का वोट जो है वह सिर्फ हिंदुत्व के लिए एक प्रखर मजबूत व्यक्ति जो हमारे योगी जी हैं और नरेंद्र मोदी जी हैं इसलिए


आदमी दुख तकलीफ से को सह लेता है परंतु वोट भाजपा योगी जी को देता है। भाजपा को वोट देता है लेकिन जब अधिकारी जो भारतीय जनता पार्टी के लिए रात-दिन एक करके लड़ते रहे जिन्होंने बहुत सारे समाचार लिखे आर्टिकल लिखे उन्हें धमकी मिली उन पत्रकारों को या भारतीय जनता पार्टी के पत्रकार हैं अगर कोई कोई व्यक्ति सच्चाई लिखता है तो सच्चाई को लोग कहते हैं कि यह भारतीय जनता पार्टी का पत्रकार है,और जब किसी अधिकारी के पास जाया जाता है अधिकारी हां में हां तो करता है लेकिन लीगल भी कोई काम होता है वह भी नहीं किया जाता ऐसा बसवा में होता था बसपा में किसी का काम नहीं होता था सिर्फ काम होता था तो किस माध्यम से होता था वह माध्यम में लिख नहीं सकता सपा यह कैसी पार्टी है समाजवादी पार्टी में मैंने देखा एक छोटा कार्यकर्ता भी जिले स्तर से काम करने में सक्षम होता है और काम करवाता है लेकिन जाती पाती और विकास भ्रष्टाचारी को देखते हुए भाजपा को लोगों ने चुना है जब जिला स्तर से कोई भी कार्य छोटे तबके के लोगों की बात को सिर्फ लॉलीपॉप देकर टरका दिया जाता है वह व्यक्ति दो चार बार तो विभागों के चक्कर काटता है उसके बाद थक कर यही कहता है इससे अच्छी तो समाजवादी पार्टी थी यह मैंने अपने कानों से सुना है कई बार लोगों के मुख से उसमें हमारे काम तो हो जाते थे यहां तो कोई सुनता ही नहीं है यह मैंने अपने कानों से सुना है सर्वे किया और 4एवम्5 जिले के लोगों से मैंने जानकारी जुटाई है उस आधार पर मैं लिख रहा हूं। निर्वाचन आयोग चुनाव के समय सबसे बड़े पावरफुल में होता है जो लोग हार्ट के पेशेंट हैं जिनकी लीवर किडनी में परेशानी है कालेज व्यक्ति ऐसा आया इसकी ड्यूटी लगी थी वह लेटा हुआ था उसके ऊपर पंखा डोला रहे थे मैं वही पर था तो मैं गया मैंने कहा क्या हो गया तेरा 600 दिन से बुखार आ रहा अरे मैंने कहा इनको जल्दी ले जाओ टेस्ट कराओ को रोना रोना क्यों आप खिलाओगे निर्वाचन आयोग इतने लोग भीड़ में यहां ड्यूटी पोलिंग पार्टियां जा रही हैं उसी समय जिलाधिकारी महोदय आए सीडीओ आए अपर जिलाधिकारी आहे उन्होंने क्या कहा क्या ना कहा थोड़ी देर में बोलो मेरे संज्ञान में नहीं आया वह लोग लेकर चले गए मैंने जानना चालक मुझे स्पष्ट पता नहीं चल सका लेकिन वह व्यक्त ड्यूटी शायद उसकी कट गई है वह चला गया यह सब चीजें जब सामने होती हैं तो जिलाधिकारी न्याय करते हैं लेकिन जब कोई अपनी फरियाद लेकर जाता है उस समय एक मुखिया के तौर पर न्याय की उम्मीद व्यक्त करता है। जब मैंने एन आई सी के झांसी के प्रमुख लोगों से बात की उन्होंने कहा अगर पति पत्नी की ड्यूटी लगी है कटेगी नहीं दोनों को नौकरी करनी है मैं वहां करीब 10 मिनट बैठा 10 मिनट में करीब चार-पांच लोग ऐसे आए जिनकी पति पत्नी दोनों की ड्यूटी लगी थी और वह परेशान थे एक हमारी काट दो बच्चे छोटे हैं पति की भी ड्यूटी लगी है तो हम घर में रह सके परंतु किसी ने नहीं सुना कि आप जाइए यहां से भगा दिया गया सभी पत्रों में सभी दैनिक पेपरों में और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में भी समाचार आए थे की दो नो पति पत्नी अगर ड्यूटी पर है तो उसकी एक ही ड्यूटी लगेगी महोदय जब निर्वाचन आयोग का जो निर्देश होते हैं उसको बड़ी सख्ती से पालन करने की जरूरत होती है क्योंकि जिस जगह चुनाव होते हैं वहां की सरकार शुन्य हो जाती है सारा 52 निर्वाचन आयोग को हो जाता है और उस निर्वाचन आयोग की बात की अवहेलना की जाती है तो फिर हम आप क्या कर सकते हैं अगर कुछ करने की सोचेंगे तो उस व्यक्ति का अहित करने में कतई नहीं झुकते हैं ऐसे अधिकारी बैठे हुए हैं मैं यह बात गृह सचिव उत्तर प्रदेश तक रखने का प्रयास करूंगा और यह समाचार माननीय मुख्यमंत्री तक पहुंचे उनके संज्ञान में आए क्योंकि 2022 के चुनाव में अगर यही स्थिति रही कर्मचारी और महिलाएं की नाराजगी व्याप्त रही तो वोट बैंक का असर भारतीय जनता पार्टी पर अधिक पड़ेगा क्योंकि एक कर्मचारी के साथ कई लोग परिवार में जुड़े होते हैं वोट बैंक की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है इसलिए मुझे लगता है सरकार ध्यान देगी और जो लीगल है जो सही है उनका कार बिना शिफारस के आज होने की जरूरत है शिफारस जाती है अगर इनलीगल भी है तो कार एक दो लोग वर्चस्व रखने वाले लोगों का हो जाता है सब तो वर्चस्व रखने वाले लोग हैं नहीं हमारे देश में सबसे ज्यादा गरीबी है निम्न दर्जे के लोग हैं मध्यम वर्गीय वह सब इतने बड़े-बड़े इतने इतने सालों से उनका संपर्क नहीं स्थापित है जिस कारण हुआ है अपनी व्यथा और कथा और दुख हो बता सकतेयह सब चीजें हैं यह सब चीजें गलत संदेश जाती हैं भारतीय जनता पार्टी का नुकसान कराने के लिए यह सब जो मानवता है वह खत्म होती जा रही है जिससे कर्मचारियों में आज के कर्मचारियों में है योगी जी को चाहते तो बहुत हैं लेकिन जब कार्य नहीं होता है तब माथा पे सर रख कर बैठ जाते हैंनिर्वाचन आयोग ने सरकारी नौकरी करने वाले दंपत्ति को चुनाव की ड्यूटी से एक को छूट देने का आदेश जारी किया है. अब अगर दंपत्ति में पति पत्नी दोनों लोगों की चुनाव में ड्यूटी लगती है तो किसी एक व्यक्ति की ड्यूटी कैंसिल कर दी जाएगी, जो एक बड़ी राहत मानी जा रही है. यह छूट दंपत्ति के छोटे बच्चों का ख्याल करते हुए दिए जाने की व्यवस्था की गई है.अपर निर्वाचन आयुक्त ने दिए हैं आदेशराज्य निर्वाचन आयुक्त वेद प्रकाश वर्मा की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि यदि सरकारी नौकरी में कार्यरत पति पत्नी दोनों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है और उनमें से किसी एक व्यक्ति की छुट्टी कैंसिल करने के संबंधित जिलों में आवेदन दिए जाते हैं तो उन्हें राहत दी जाएगीऐसा पहली बार होगा जब ‘पंचायत चुनाव’ कराने के लिए कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की पड़ोसी जिले में भी ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसा एक जिले में एक ही दिन चुनाव कराने के निर्णय की वजह से होगा। अधिकारियों-कर्मचारियों और जवानों को पड़ोस के जिस जिले में संख्या कम होगी वहां ड्यूटी पर भेजा जाएगा।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल कभी भी बज सकता है। पंच-प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य पदों की आरक्षण सूची जारी कर दी गई है। आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियां आने के बाद उनका निस्तारण होगा और उसके बाद कभी भी चुनाव आचार संहिता लागू कर दी जाएगी। चुनाव तिथियों की घोषणा हो जाएगी और चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चुनाव कार्यों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि इस बार एक जिले में एक ही दिन चुनाव कराया जाएगा। चाहे जिस चक्र में जिस जिले नम्बर आए। ऐसी स्थिति में कुछ ऐसे जिले हैं जहां अधिकारियों-कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की पर्याप्त संख्या नहीं है। वहां पड़ोस के जिलों के अधिकारियों-कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई जा सकती है। झांसी के जिलाधिकारी महोदय ने चुनाव के संदर्भ में बहुत हीी अच्छ कार्यशैली के साथ चुनााव संपन्न कराया व्यवस्थाएंं भी जहां तक ठीक रही है। अब मत पार्टियों की सब की जीत काााा निर्णय बंद होो गया है अब जीत हार सामने कुछ दिनों में आएगी।

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