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Tuesday, February 16, 2021

फलसफा दो का बताया तो बुरा मान गए...

मौलाना जुनैद चतुर्वेदी ने दिया इंसानियत का पैगाम

शाहपुर-फतेहपुर, शमशाद खान । हथगाम अब गांव के शाहपुर ग्राम पंचायत के इदरीशपुर गांव में बिहार से आए मौलाना जुनैद चतुर्वेदी ने अपनी तकरीर में दीनी और दुनियावी संदेश दिया। जहां उन्होंने मां की अजमत का विस्तार से बखान किया वहीं वतनपरस्ती को इस्लाम की बुनियाद बताया। शायरों ने नाते पाक से महफिल को भक्ति भाव से भर दिया।

युवा शायर मोहम्मद ताजुद्दीन के संयोजन में इदरीशपुर नाथूपुर में एक जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें सहरसा बिहार से आए मौलाना चुने चतुर्वेदी ने संस्कृत इंग्लिश और उर्दू में तकरीर की। उन्होंने इस्लाम को इंसानियत के पैमाने पर सबसे बड़ा धर्म उन्होंने कहा कि हमारे नबी ने फरमाया है कि जिस मुल्क में रहो वहां का

जलसे में तकरीर करते मौलाना।

हर हाल में वफादार बन कर रहो। उन्होंने हिंदुस्तान को सबसे अजीम मुल्क बताया और यहां की खूबसूरती का बखान किया। वतनपरस्ती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सीमा पर लगा दो वे न केवल सरहद की हिफाजत के लिए मर मिटेंगे बल्कि इस्लामाबाद में भी झंडा गाड़ देंगे। हमें आपस में इत्तेहाद और भरोसे की जरूरत है। मौलाना ने वेद और रामायण से कई उदाहरण दिए। जिसमें इंसानियत और भाईचारे की बात कही गई है। हमें मैं कि नहीं हम की जरूरत है। ह से हिंदू और म से मुस्लिम होता है। मौलाना जुनैद चतुर्वेदी ने मां की अजमत का बखान करते हुए कहा कि जो शख्स अपनी मां को मोहब्बत से देख लेता है उसे जन्नत नसीब होती है। मां की खिदमत के बिना कितनी भी इबादत कर ली जाए कुछ भी नहीं मिलता। मौलाना ने नफरत के बीज बोने वालों को हिंदुस्तान से नेस्तनाबूद करने और मोहब्बत का दरिया बहाने का पैगाम दिया। जो देशभक्त होगा वह यहां भी कामयाब रहेगा और वहां भी। मध्य प्रदेश के नरोजाबाद से पधारे नाथको इश्तियाक आलम ने महफिल को भक्तिमय कर दिया दाई हलीमा पहले इन्हें जान लीजिए, महबूबे एक किबरिया हैं ये पहचान लीजिए, जन्नत मिलेगी हश्र में पढ़ते रहो नमाज, अल्लाह और नबी का कहा मान लीजिए। शैदा मुआरवी ने पढ़ा रास्ता हक का दिखाया तो बुरा मान गए, फातिहा हमने दिलाया तो बुरा मान गए, एक एक को तुम आज भी कहते ग्यारह, फलसफा दो का बताया तो बुरा मान गए। हामिद रजा हथगाम ने कितनी अच्छी कितनी प्यारी ये सुहानी रात है, जश्न है मेरे नबी का नूर की बरसात है। अख्तर रजा रहमानी ने पढ़ा तेरे टुकड़े पे पलें गैर की ठोकर में न डाल। इस मौके पर कारी इकराम, बशीरुद्दीन सहित अनेक अकीदतमंद मौजूद रहे। जिनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं।


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