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Tuesday, February 23, 2021

सभी संत सामने आएं तो जीवित हो सकती हैं जलधाराएंः साध्वी कात्यायिनी

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। कितने संत मंदाकिनी सफाई की बात करते हैं,लेकिन मंदाकिनी तो गंदी है। इसका मतलब की चित्रकूट के संत केवल मंदाकिनी की सफाई की बात करते हैं वह कभी मंदाकिनी, पयस्वनी, सरयू के संरक्षण और संवर्धन की बात नही करते। अगर यहां के सभी साधू संत माताएं और आम लोग इन पवित्र धाराओं को पुर्नजीवन देने के लिए साफ कराने के लिए सामने आ जाएं तो मंदाकिनी क्या सभी नदियां पुर्नजीवित हो जाएंगी। यह उदगार श्रीराम सेवा मिशन की ओर से श्रीकामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर स्थित ब्रहम कुंड शनि मंदिर में आयोजित मानस मंथन अनुष्ठान के आठवें दिन की कथा सुनाते हुए साध्वी कात्यायिनी ने कहीं।


उन्होंने कहा कि मुझे मालूम हुआ है कि पूर्व में एक बार चित्रकूट के संतों ने यहां के विकास के लिए अनशन किया तो मुख्यमंत्री आ गए, अगर वास्तव में यहां के संत चित्रकूट का भला चाहते हैं तो जिस मंदाकिनी को अपनी मैया कहते हैं तो वह एकजुट होकर सामने आएं। निश्चित तौर पर सरकार तो जागेगी साथ ही आम लोग भी मंदाकिनी व अन्य नदियों के प्रति संवेदित होंगे।  

उन्होंने कहा कि प्रकृति माता की गोद में बैठकर कथा सुन रहे हैं। इनको ही समर्पित कर रहे हैं। हम इनके पुनरोद्वार की बात कर रहे हैं। हमें अपना भाव भी स्पष्ट करना होगा कि हम उनको नष्ट कर रहे हैं या बचा रहे हैं। बहुधा लोग अपनी संपत्ति मानते हैं, जबकि यह भाव मानना गलत है। अपना मानना व अपनी संपति मानना गलत है। जमीन को लेकर सोचते हैं कि जमीन खरीदी तो हमारी हो गई, जबकि यह गलत है। रूपयों को लेकर सोचते हैं कि लखपति करोड़पति हो गए, लेकिन यह भाव भी गलत है। यह भूमि मेरी है तो इसे मेरी मां के स्वरूप् में देखना है। हम मां के पति बनना चाहते हैं। हम उतावले होकर खुद भूमि पति बनना चाहते हैं। यह लालसा और लालच में पड़े रहते हैं। जब हम प्रकृति को भगवान की संपति मानेंगे तो केयर टेकर बन जाएंगे तो फिर हम प्रकृति का संरक्षण करेंगे। हमें दास के भाव से प्रकृति की सेवा करनी होगी। अगर हम भगवान के दास हैं तो हम प्रकृति के दास हैं। हमें उसे बेंचना नही है। लोग नदी को बंेंच रहे हैं, पत्थरों को बेंच रहे हैं। यह भाव गलत है। आपने प्रकृति को बेंच कर माया को घर में लेकर आ गए। संक्षिप्त रूप में जाने तो प्रकृति भगवान की संपति है, इसका संरक्षण करना हमारा परम धर्म है परम कर्तव्य है। इस दौरान कथा के व्यवस्थापक सत्यनारायण मौर्य, संतोष तिवारी, रामरूप पटेल, गंगा सागर महराज आदि मौजूद रहे।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने की साध्वी कात्यायिनी से मुलाकात

भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश खरे व वरिष्ठ भाजपा नेता राजा करवरिया ने अपने मि़त्रों के साथ कथा पंड़ाल में पहुंचकर कथा वक्ता साध्वी कात्यायिनी से मुलाकात की। इस दौरान साध्वी ने सभी को धर्म उपदेश देने के साथ महामंत्र का कीर्तन कराया।

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