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Tuesday, February 23, 2021

कथा सुनने से भटकेंगें नहीं बच्चे, भटकों को दिखाएगें रास्ता: शास्त्री

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर नंदोत्सव मनाया गया। इस दौरान श्रोतागण बधाईयां सुन मंत्रमुग्ध रहे। कथा व्यास अमरकृष्ण शास्त्री ने कहा कि रामचरित मानस को घर में सिर्फ रखना ही नही है उसे पढ़े और जीवन में उतारें। कथा सुनकर बच्चे भटकेगें नहीं, अपितु भटके को रास्ता दिखाएगें।

मुख्यालय के बस स्टैन्उ स्थित केशरवानी धर्मशाला में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चैथे दिन कथा व्यास अमरकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा का रसपान कराया। बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अधर्मियों का नाश करने के लिए हुआ। नगरी में उत्सव मनाया गया। उन्होंने नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की गीत सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बताया कि भगवान श्रीराम ने बाली को मारा। बाली ने उनसे वध का

कथा रसपान कराते व्यास अमरकृष्ण शास्त्री।

कारण पूछा तो प्रभु ने बाली के अधर्म के मार्ग पर चलने की बात कही। इस पर बाली ने पुत्र अंगद का हाथ पकड़कर प्रभु श्रीराम की सेवा करने के लिए कहा। इसी प्रकार माता-पिता अपने पुत्र का हाथ पकड़कर भगवान के चरणों में लगाए। जिससे जीवन का कल्याण हो। जहां जीवन में पैसा कमाना है वह कार्य सही नहीं है। कहा कि शिक्षा ग्रहण कर धन कमाना लक्ष्य न रख सन्मार्ग पर चलने का ध्येय बनाना चाहिए। इस मौके पर यजमान मनोज द्विवेदी, अमित द्विवेदी, सुमित्रा देवी, अमरनाथ द्विवेदी, माघेन्द्र द्विवेदी, राधेश्याम तिवारी, शिवराम प्रसाद मिश्रा, राकेश मिश्रा आदि श्रोतागण मौजूद रहे। 


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