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Wednesday, February 3, 2021

मां दुर्गे की कृपा से संकट सारे दूर होते है.........

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

(उत्तर प्रदेश महासचिव)

(ऑल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन )

.................. मां दुर्गा महा शक्तिमान की कृपा से सारे विरोधियों का अंत होना स्वयं मां दुर्गा सुनिश्चित कर देती हैं मां दुर्गा की कृपा से विरोधी शक्तियां अपने मां दुर्गे के भक्त सच्चे भक्तों को बचाने के लिए हर मां दुर्गा  मां भवानी की कृपा बनी रहती है,धर्म ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार नवरात्र माता भगवती की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्र तीन देवियों महाकाली (शौर्य की देवी), महालक्ष्मी (धन की देवी) तथा महासरस्वती (ज्ञान की देवी) को समर्पित है। जगत की उत्पत्ति, पालन एवं प्रलय तीनों व्यवस्थाएं जिस शक्ति के अधीन संपादित होती हैं वही भगवती आदिशक्ति हैं। 'ऐं' कारी बन सृष्टि का सृजन करने से इन्हें सृष्टिरूपा बीज कहा जाता है। 'ह्नीं' कारी देवी को प्रतिपाली एवं 'क्लीं' कारी कामरूपा शक्ति जगत का लय कर अपने आश्रय में ले लेती हैं। इनके अनंत रूप हैं लेकिन प्रधान नौ रूपों में नवदुर्गा बनकर आदि शक्ति सम्पूर्ण पृथ्वी लोक पर अपनी करुणा की वर्षा करती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शनिवार से शुरू हो चुके हैं। जपें,  नमो देव्यै महादेेव्यै। शिवायै सततं नम:।। अर्थात देवी महादेवी भगवती दुर्गा को शतत् नमन। 

अष्टमी और नवमी को घर-घर में देवी की पूजा कन्या के रूप में होती है। इस दिन कन्याओं का विधिवत व पूर्ण श्रद्धा से पूजन करने पर घर के सारे रोग-शोक दूर हो जाते हैं। कहते भी हैं कि देवी किसी पत्थर की मूर्ति में नहीं वह तो केवल नारी में विराजमान है।  वाह देवी ही हमें माता के रूप में जन्म देती है। पत्नी के रूप में सुख व पुत्री बनकर आनंद का प्रसाद बांटती है। आओ, हम भी शोक-मोह-भय को दूर करती देवी का पूजन करें और उनसे शक्ति का आशीर्वाद मांगें।श्रीमद्देवीभागवत में लिखा है कि देवी ही ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं। देवी सारी सृष्टि को उत्पन्न तथा नाश करने वाली परम शक्ति है। देवी ही पुण्यात्माओं की समृद्धि एवं पापाचारियों की दरिद्रता है। जगत माता दुर्गा सुकृती मनुष्यों के घर संपत्ति, पापियों के घर में दुर्बुद्धिरूपी अलक्ष्मी, विद्वानों के हृदय में बुद्धि व विद्या में श्रद्धा व भक्ति तथा कुलीन महिलाओं में मर्यादा के रूप में निवास करती है।


मार्कण्डेयपुराण कहता है कि 'हे देवी! तुम सारे वेद-शास्त्रों का सार हो। संसाररूपी महासागर को पार कराने वाली नौका तुम हो। भगवान विष्णु के हृदय में निरंतर निवास करने वाली माता लक्ष्मी तथा शशिशेखर भगवान शंकर की महिमा बढ़ाने वाली माता गौरी भी तुम ही हो।' आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना तथा जीवन शक्ति संसार में जहां भी दिखाई देती है, वहां देवी का ही दर्शन होता है। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के व्रत, पाठ और हवन द्वारा धन, बल, विद्या और बुद्धि की अधिष्ठाता देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की आराधना की जाती है। सप्तशती का पाठ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करता है।......सर्व मंगल्य मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।...शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।। संकटों से छुटकारा पाने के लिए मंत्र का जाप करें,...रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्ड विनाशिनी।....रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विशो जहि।। व्याधियों को यह श्लोक मंत्र अंत कराता है ....स्तुवद्भयो भक्तिपूर्वत्वां चंडिके व्याधिनाशिनी।...रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि,जीवन में सफलता के लिए इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए....विद्यासु शास्त्रेषुविवेकदीपस्वाद्येशु.. वाक्येशु च का त्वदन्या।,ममत्वगर्तेऽति महान्धकारे विभ्रामयत्येतदतीव विश्वम्। जीवन में तरक्की के लिए इस मंत्र का जाप आवश्यक है..वन्दिताप्राधियुगे देवि देव सौभाग्यदायिनी।रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

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