मशरूम उत्पादन से मिल सकता है चार गुना फायदा: कुलपति - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Saturday, February 13, 2021

मशरूम उत्पादन से मिल सकता है चार गुना फायदा: कुलपति

प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन सहित दी गई विभिन्न जानकारियां

बांदा, के एस दुबे । मशरूम व्यवसाय विभिन्न समस्याओं जैसे प्राकृतिक विषमताएं, बेरोजगारी व पलायन, ग्रामीण क्षेत्रो में महिलाओं व बच्चों में कुपोषण और गरीबी, लोंगो की कम आय इत्यादि के निराकरण मे एक प्रमुख भूमिका निभा सकता हैं। मशरूम  व्यवसाय से दो से चार गुना फायदा त्वरित पाया जा सकता है और इसके लिए लिए जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तरीय विभिन्न वित्तीय एजेंसियों से वित्तीय सहायता प्राप्त करना भी आसान है। मशरूम व्यसाय बहुत ही अच्छा उद्यम साबित हुआ है, कम प्रयासों से इससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार व उनके सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए काफी आमदनी होती है। 

प्रशिक्षण के समापन पर प्रशिक्षार्थियों को प्रमाण पत्र देते कुलपति

इसी क्रम में बेरोजगार युवाओं, ग्रामीण लोगों, किसानो एवं महिलाओं को मशरूम व्यवसाय के द्वारा स्वरोजगार प्रदान करने हेतु बाँदा कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशरूम उद्यमिताः स्वरोजगार का साधन विषय पर दस दिवसीय शुल्क आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डा. यू. एस. गौतम के मार्गदर्शन में 3 फरवरी से शुरू किया गया और 12 फरवरी को सफतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण उपरान्त कुलपति ने प्रशिक्षित युवाओं को उज्जवल भविस्य के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि सभी लोग अपने क्षेत्र में मशरूम उद्यम शुरू करें और अगर भविष्य में इसमें कोई भी तकनीकी समस्या आएगी तो उसके निराकरण में विश्वविद्यालय यथासंभव सहयोग करेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सयोंजक और पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया की इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को मशरूम उद्यमी बनाना है जो भारत सरकार की संकल्पना किसानो की दोगुनी आय व आत्म निर्भर भारत को सफल बनाने में मदद करेगा। यह दस दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मशरूम यूनिट के प्रभारी व इस कार्यक्रम के आयोजन सचिव डा. दुर्गा प्रसाद के देखरेख में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। डा. प्रसाद ने बताया की इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 10 जिलों बाँदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, झाँसी, कानपुर, रायबरेली, गोंडा, लखनऊ और मिर्जापुर से आये 45 प्रतिभागिओं को
प्रयोगिक प्रशिक्षण में सहभाग करते प्रशिक्षार्थी।

मशरूम व्यवसाय से सम्बंधित समस्त पहलुओं जैसे उत्पादन प्रक्षेत्र की संरचना, संवर्धन एवं संरक्षण, स्पान उत्पादन तकनीक, प्रमुख खाद्य व औषधीय मशरुम की उत्पादन तकनीक, मशरूम के प्रमुख रोग, कीट एवं विकार के लक्षण एवं रोकथाम, विभिन्न व्यंजन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन व विपणन इत्यादि पर इससे सम्बंधित 14 वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के द्वारा लगभग 40 से ज्यादा सम्बंधित भिन्न भिन्न टापिक पर वृहद् ढंग से प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दस दिवसीय प्रशिक्षण उपरांत प्रशिक्षणार्थी मशरूम को एक उद्यम के रूप में शुरू कर सकेंगे और यह व्यवसाय उनके लिए एक अच्छा स्वरोजगार साबित होगा। इस कार्यक्रम में मशरूम से सम्बंधित कोई क्षेत्र छूट ना जाय इसके लिए राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष मशरूम वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का ऑनलाइन व्याख्यान भी कराया गया। इस क्रम में डा. मंजीत सिंह, पूर्व निदेशक, मशरूम अनुसन्धान निदेशालय, सोलन ने औधोगिक बटन मशरूम प्रक्षेत्र संरचनाय डा. के.के. मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक, विवेकानन्द पर्वतीय अनुसंधान संस्थान अल्मोडा ने औषधीय मशरूम (गैनोडर्मा, शिटाके एवं कार्डिसेप्स) की खेतीय डा. दयाराम, प्राध्यापक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर, बिहार और डा. निर्मला भट्ट, सह-निदेशक, पिथौरागढ़ ने मशरूम के मूल्यवर्धक उत्पाद और ग्वालियर की युवा उद्यमी सुश्री निशा निरंजन ने भारत सरकार द्वारा प्रायोजित स्टार्ट-अप प्रोग्राम के सहयोग से मशरूम उधम पर प्रशिक्षणार्थिओं को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर ये भी बताया गया कि विश्वविद्यालय की मशरूम यूनिट इसी महीने के अंत में महिलाओं को मशरूम व्यवसाय के क्षेत्र में उद्यमी बनाने हेतु इससे सम्बंधित एक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा ।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages