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Saturday, February 13, 2021

धार्मिक स्वामी जी विजय पुरी जी का आकस्मिक निधन...................

देवेश प्रताप सिंह राठौर

................... बड़े दुख के साथ यह लिखना पड़ रहा है हमारे गुरु हमारे मार्गदर्शक हमें दुख सुख में राह बताने वाले हमारे परम प्रिय गुरु स्वामी विजय पुरी जी का इलाहाबाद में सत्संग पाठ करते रहे पाठ करने के बाद 11:00 बजे रात को साधना में बैठे थे, उसी समय वह चिर निंद्रा में सो गए जब यह बात उनके धर्मपत्नी हमेशा उनके साथ परछाई की तरह रहती थी जब उन्होंने देखा वह एकदम स्तब्ध रह गई और उन्होंने सत्संग के कार्यक्रम में इलाहाबाद में लोगों को बताया सब बहुत स्वामी विजय पुरी जी के निधन पर आंसुओं की धाराएं बहने लगी और वह हम सबको छोड़कर इस दुनिया से ब्रह्मलीन हो गए, वह भारत देश के अपने किसी गुरु भाई का दिल नहीं तोड़ते थे उनका निरंतर सत्संग पाठ ईश्वर के प्रति विश्वास और आस्था के वचन को समाज में भाईचारा के लिए और दुख सुख में व्यक्त को किस तरह अपने जीवन को संभावना है संभालना है सब इतने प्यार से बताते थे मुझे याद है जब मैं उनके गृह राज हिमाचल प्रदेश कांगड़ा गया था मैं अपने को बहुत धन्य मानता हूं मैंने बहुत सारी परेशानियां बताएं स्वामी जी मैं बहुत ही अच्छा करता हूं परंतु मुझे वुराही ही प्राप्त होती है ऐसा क्यों, उन्होंने बड़े शहज मन से मुझे बताया बच्चे जब तुम परेशान हुआ करो मुझे फोन किया करो मैं हमेशा उनको जब ज्यादा मानसिक पीड़ा में होता था मैं उन्हें फोन करके वह मेरे अलावा की तरह मुझे मार्गदर्शन करते थे आज मेरे एक गुरु एक पिता तुल्य हमारे संरक्षक आज हमसे मुंह मोड़ कर चले गए जब यह खबर हम को प्राप्त हुई हम बहुत विचलित हुए और हम सोचने लगे अभी 2 महीने पहले मैंने उनको चरणों पर नमन करके उनसे आशीर्वाद लिया था और मुझे उन्होंने कहा था सरदार दीपू सरदार देवेश तुझे कांगड़ा आना है और कांगड़ा में एक हफ्ते मेरे साथ रहना है मैं तुम्हें वह ज्ञान दूंगा गुरु जी की कृपा से आप अच्छे व्यक्ति तो हो ही और अच्छे बनोगे लेकिन मेरा दुर्भाग्य है मेरे कांगड़ा जाने से पहले ही वह इस दुनिया में चले गए ब्रह्मलीन हो गए, मुझे हमेशा सरदार कहकर बुलाते थे कहते थे सरदार देवेश तू बहुत अच्छा लगता है मेरा बेटा गोपालपुरी इंग्लिश की पड़ी पेपर का हिमाचल प्रदेश का ब्यूरो चीफ है। आप उससे बात किया करिए और समझाएं आप बड़े हैं अच्छा लिखते हैं अभी वह नया है उसे कोई दिक्कत हो तो बात कर लिया करना मार्गदर्शन करते रहना जो मुझे मार्गदर्शन करता था आज वह नहीं है मेरी आंखें नम है इलाहाबाद से उनकी


मृत शरीर उनकी पत्नी के साथ और गुरु भाई लोग हिमाचल प्रदेश कांगड़ा ग्रह पर ले गए आज मैं सोचता हूं कितने अच्छे अच्छे व्यक्त होते हैं इन सबको जाना होता है व्यक्ति किस समय किस हाल में किस जगह कब क्या हो जाए कोई भरोसा नहीं। आज मेरा पूरा परिवार मेरे बच्चे विजय पुरी जी के निधन से बहुत दुखी है 79 साल की उम्र में उनकी मृत्यु यह है ब्रह्मलीन हुए हैं लेकिन वह इस दुनिया से शरीर तो छोड़ कर चले गए हैं लेकिन उनकी दी हुई विचार और उनके द्वारा जो एक भजन गाते थे। स्वामी जी का यह भजन इसकी दो लाइन मुझे याद है मैं सुनाता हूं यह भजन उनके मुख से मुझे बहुत सुंदर लगता था जब भजन गाते थे मैं भाव विभोर हो जाता था उसके बोल हैं....... रोते ही आए थे, रोते चले जाना,.. लोगों को मिलने गया तेरा सहारा , मन नहीं लगता ....... रोते को मिल गया तेरा सहारा..... भाव विभोर भजन वह जब इस भजन को गाते थे सभी लोग भाव विभोर हो जाते थे भजन की जो भाव हैऔर प्रभु के प्रति जो भाव थे वह स्पष्ट चेहरे पर दिखाई देते थे। आज स्वामी विजय पुरी जी ब्रह्मलीन हो गए हैं लेकिन उनकी यादें उनके दिए यह वचन उनके दिए गए सत्संग में प्रभु के प्रति आस्था एवं विश्वास जिस तरह जगाया है उस लव को कभी बुझने नहीं देंगे आज विजय पूरी जी ब्रह्मलीन हो गए हैं। शत शत नमन प्रणाम ओम शांति। जो साथ लेकर जाने की बात करती हैं,

मिला तो तूझे भी यहाँ आकर ही सबकुछ है

उसे भी सौंपकर किसी और को

वापस जाना तूझे खाली हाथ ही हैं।


अबतक जो पाया इस जीवन में तूने

सब रह जायेगा यही इसी जग में,

सिर्फ बनाई थीं जो पहचान खुद की

कायम रहेगी वो ही हर एक सदी में।


फिर तू क्यों न इसपें यकीन है करता

हर चीज़ को क्यों है बस समेटते रहता,

जब जीने के लिए ही दुनिया की हर चीज़ बनी हैं

तो उसे क्यों मरने बाद की है चीज़ समझता।

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