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Wednesday, February 10, 2021

मल्टीनेशनल कंपनी मैं आज भी काला कानून ...... ........

(आमजा भारत समाचार )

.....सहारा के साथ धन संबंधी अनियमितताओं के चलते सुप्रीम कोर्ट से भी की तकरार 7 वर्षों से चल रही है आज तक कोई निर्णय नहीं हो सका है उसके बावजूद भी जो फील्ड में वरिष्ठ अधिकारी हैं उनकी तानाशाही उनका अन्याय उनको गलत सही तरीके से कार्य करने की पूरी छूट प्राप्त है, आज सहारा  इंडिया में दिक्कतों में आने का मुख्य कारण है कर्मचारियों का शोषण काला कानून व काला कानून जो नीचे से लेकर ब्रांच मैनेजर जो लिख देता है वहीं पर मुहर लगते लगते एक दिन उसके साथ अहित होता है, सहारा कंपनी के बहुत बड़े पद पर कार्यरत एक अधिकारी जिन्होंने मुझे जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि सहारा कंपनी में अधिकारियों का कोई कुछ नहीं कर सकता है,सिर्फ होता है सिर्फ कर्मचारी को दंडित किया जाता है यह आपको मालूम नहीं है इसलिए शांत हो जाओ जब तक करना है करो और नहीं छोड़ दो बेहतर है बहुत सी जगह है काम करने के लिए यहां न्याय अन्याय का कोई महत्व नहीं है, पैसा लाने वाला व्यक्ति मूर्ख हो चाहे उसकी जितनी भी गलती हो उसको सब छूट है , बुंदेलखंड के वरिष्ठ सारा कार्यालय में छत के ऊपर स्टेशनरी भरे हुए फार्म वाउचर जलाए गए क्यों जलाए गए यह एक संदेश व्यक्त करता है, तथा संज्ञान में आया कि 15एवम्  20 दिन से कागज सहारा के बहु अधिक मात्रा में सभी चलाए जा रहे हैं, क्या यह सब सेबी के समक्ष साथ मिटाने के लिए किया जा रहा है इस संदर्भ में अभी इसके बारे में


सूचना उपरोक्त तक पहुंचाई गई है।आज सहारा इंडिया परिवार वहां पर पैसों की धोखाधड़ी के आरोप झेल रही है, सहारा  अखबारों में विज्ञापन देकर सफाई दी कि सभी लोगों के पैसे लौटाए जाएंगे,ब्याज समेतसाथ ही सेवी(सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) पर निशाना साधा, कहा कि  सेवी ने पिछले एक साल में पैसे लौटाने का विज्ञापन नहीं दिया हैदरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को लोगों का फंसा हुआ  पैसालौटाने का आदेश दे रखा है. सहारा पर 20 हजार करोड़ रुपये का बकाया है,जब से सहारा का केस शुरु हुआ है, वह लगातार विज्ञापनों के जरिए सफाई दे रहा है. साथ ही सरकारी जांच एजेंसियों पर हमलावर हैं.आइए, जानते हैं क्या है सहाराकीपूरीकहानीआईपीओ इस प्रक्रिया के जरिए कोई कंपनी पहली बार पैसा जुटाने के लिए अपनी कुछ हिस्सेदारी जनता को बेचती है, इसके जरिए कोई निजी कंपनी सार्वजनिक कंपनी बन जाती है, यह एक बायोडाटा होता है, इसमें शेयर मार्केट से पैसा उठाने वाली कंपनी की पूरी जानकारी होती है. जैसे,कंपनी का नाम, पता, कितने पैसे है, वह क्या काम करती है,ओएफसीडी जनता से पैसे उधार लेने का एक तरीका, जिसमें बदले में ब्याज चुकाया जाता है. साथ ही इसके जरिए निवेशक कंपनी के हिस्सेदार भी बन सकते हैं.  के कुछ नियम भी हैं. अगर 50 से कम लोगों को  जारी होता है, तो कंपनी रजिस्ट्रार से अनुमति लेनी होती है50 से ज्यादा लोगों को देने के लिए सेबी से पूछना पड़ता 2009 में सहारा ग्रुप की एक कंपनी के शेयर मार्केट में जाने की इच्छा से मामला शुरू होता है. शेयर मार्केट में जाने से पहले सेवी से अनुमति लेना होता है. ऐसे में सितंबर 2019 में सहारा प्राइम सिटी नाम की कंपनी ने सेवी को  लाने के लिए डीआरएचपी भेजा. यानी मार्केट से पैसा उगाहने के लिए अपना बायोडाटा भेजा. सेबी कंपनी का बायोडाटा जांच रही थी,इसी दौरान सहारा की दो कंपनियां- सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड  कटघरे में आ गईं. सेवीको लगा कि इन्होंने गलत तरीके से जनता से पैसे उगाहेयह सब चल रहा था, तभी सेवी को इन कंपनियों के बारे में एक शिकायत मिली. इसमें कहा गया कि ये कंपनियां गलत तरीके से जारी कर रही हैं। जाने स हारा इंडिया के कानूनी कार्रवाई के संदर्भ में,जिस कारण आज दिक्कतों का सामना करना पड़ा है अगर एक बार सुप्रीम कोर्ट चले जाते तो यह परेशानियां नहीं आ सकती थी, क्योंकि सारा इंडिया के अधिकारी लोग सहारा इंडिया के मालिक को गलत राय देते रहे इसका परिणाम यह हुआ सुप्रीम कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया 2 साल के ऊपर सहाराश्री जी जेल में रहे माता जी के देहांत के बाद उन्हें पैरोल पर छोड़ा गया आज भी पैरोल पर है। जब सारा इंडिया के संदर्भ मेंसेबी ने जांच शुरू की. सामने आया कि करोड़ लोगों से 24,000 करोड़ रुपये इकट्ठे किए साल तक यह सिलसिला चलता रहा सहारा ने इसके लिए सेबी से अनुमति नहीं ली. सेबी के तत्कालीन बोर्ड मेंबर डॉ. केएम अब्राहम ने पूरी जांच की, उन्हें पता चला कि सहारा के कई निवेशक फर्जी थे और बाकियों का कंपनी से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं था. आसान भाषा में कहें, तो सहारा ने इन दो कंपनियों के जरिए लोगों से पैसे लिए. साथ ही कहा कि वह इस पैसे से देश के अलग-अलग शहरों में टाउनशिप बनाएगा, लेकिन सहारा ने न तो टाउनशिप बनाई, न लोगों के पैसे गड़बड़ी सामने आते ही सेबी ने सहारा के नए  जारी करने पर रोक लगा दी. लोगों के पैसे 15 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया, सहारा इस आदेश पर भड़क गया, वह इलाहाबाद हाईकोर्ट गया और सेबी पर केस कर दिया. दिसंबर, 2010 में कोर्ट ने सेबी के आदेश पर रोक लगा दी, लेकिन 4 महीने बाद सेबी को सही पाया और सहारा को भुगतान करने को कहा.सहारा फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया. यहां से उसे सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल जाने को कहा गया. यह ट्रिब्यूनल कंपनियों के मामलों को सुलझाती हैयहां भी सहारा को राहत नहीं मिली और सेबी के आदेश को सही करार दिया. सहारा ने गलती नहीं मानी. मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। क्योंकि सारा इंडिया में कर्मचारियों का मौत का सिलसिला जारी है इतना अधिक डिप्रेशन में कर्मचारी है संख्या दर संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है, इस तरह की कर्मचारियों  ने   बताया है। सहारा इंडिया में आज ज्योति कितने आ रही हो अधिकारियों के आकार के कारण नहीं एक बार अगर सुप्रीम कोर्ट सहाराश्री चले गए होते तारीख पर तो यह स्थिति आज नहीं बिगड़ती है, चापलूसी में उनको नहीं जाने दिया जिस कारण आज 7 वर्षों से दिखते हैं के रूप में चल रही है और कर्मचारियों के प्रति अधिकारियों का अहिंकार आज भी उसी तरह है जैसे 7 वर्ष पूर्व था। अगर सहारा  लीगल के विभाग के लोग सही बता देते और सारा श्री एक बार सुप्रीम कोर्ट चले गए होते तारीख को तो यह आज स्थित नहीं बिगड़ती जब हाईकोर्ट ने डिसीजन दिया पैसा वापस करने का उसी समय संज्ञान में लेकर अपने अहंकार को दबाकर उससे पूरा किया जाता तो आज जो बहुत बड़ी मुश्किल में सहारा इंडिया परिवार के मुखिया है शायद आज यह दिन इतना खराब नहीं होता पर सहारा में हावी है चापलूस लोगों के बहकावे में ना आकर अपने विवेक से निर्णय किया होता तो आज स्थिति बहुत अच्छी होती परंतु चापलूसी के कारण आज  सहारा इंडिया गर्त में है। जिसका श्रेय चापलूस लोगों को जाता है जो आज सत्ता छोड़ कर चले गए हैं सहारा को मुश्किल में डाल कर फिर भी आज कान दिमाग सत्य पर आधारित नहीं है। क्योंकि चापलूसी संस्था में हावी है।

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