मां पयस्वनी का प्रकटीकरण ही है कथा का लक्ष्यः साध्वी कात्यायिनी - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Sunday, February 21, 2021

मां पयस्वनी का प्रकटीकरण ही है कथा का लक्ष्यः साध्वी कात्यायिनी

 मानस मंथन अनुष्ठान ( षष्टम दिवस)

चित्रकूट, उदित सिंह। श्रीराम सेवा मिशन द्वारा आयोजित श्रीकामदगिरि परिक्रमा पथ पर ब्रहमकुंड शनि मंदिर प्रांगण पर चल रहे मानस मंथन अनुष्ठान के छटवें दिन की कथा में मुम्बई से आईं साध्वी कात्यायिनी ने कहा कि सतसंग का भी लाभ मिल सकता है जब हमारे हृदय में संकल्प पक्का हो। मां पयस्वनी, मंदाकिनी के लिए जो हमारे दिल में संकल्प है, उसकी प्रार्थना भी साथ में कर रहे हैं, उनक हम दर्शन कर सकें तो हमारी साधना हमारा सतसंग सफल हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति एक हो जाए यह आवश्यक नही है, व्यक्ति एक मानसिकता के साथ काम करे तो वह सफलता है। सतसंग तो वर्षों से एक हो रहे हैं पर संकल्प को पूरा करने वाले एक हों तो बात बन सकती है। यहां पर कथा केवल राम कथा नही बल्कि माता पयस्वनी, मंदाकिनी व सरयू को जीवांत बनाने के लिए हो रही है। इसलिए


हमारे संकल्प जलधाराओं को जीवन देने के लिए है। जूठे हाथ से थाली नही छूते। मान्यता है कि अगर जूठे हाथ से छूने पर थाली झूठी हो जाती है,  यानि जूठे हाथ से भोजन दूषित हो जाता है। चित्रकूट में भगवान राम साढे ग्यारह साल रहे एक दिन भी उन्हें किसी व्यक्ति से कोई शिकायत नही हुई। कोल भील तो उनके आने को धन्य मानते थे। शिकायत तो जयंत से हुई लेकिन वह चित्रकूट से नही देवताओं की भूमि से था। चित्रकूट की भूमि इतनी पावन है कि यहां पर रहने वाले अपने आप साधू बन जाते हैं। इस भूमि पर रहकर भी अगर एकत्रीकरण एकीकरण की भावना नही आती है तो फिर आपकी निष्ठा में कमी है। प्रेम शक्ति का बल, संतों का एकत्व, भेदभाव को मिटना चाहिए, हमारे अंदर यह भाव आना चाहिए कि हम एक ही कार्य कर रहे हैं। परमार्थ के काम में कोई हर्ष विषाद नही होता। स्वार्थ का काम होने पर हम कुछ न कुछ चाहते हैं, पर अगर हम यह चाहते हैं कि केवल मां पयस्वनी का प्रकटीकरण हो, तो हमें हर्ष या विषाद का अनुभव नही होगा। राम जी सब कुछ कर सकते। हम तो यह भावना रखें कि यह भी रामजी का काम है और राम जी सब कुछ कर सकते हैं। उन्होंने भगवान श्री रामजी व माता सीता जी के वैवाहिक लीला की कथा का वर्णन करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। सामाजिक चिंतक गणेश मिश्रा, शिवसागर सिंह राजपूत गौरक्षकदल पहाड़ी प्रमुख, विमल जी, विनोद सागर, प्रहलाद द्विवेदी, श्री संतोष कुमार पटेल आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कथा की व्यवस्था का काम सत्यनारायण मौर्य, संतोष तिवारी, रामरूप पटेल आदि कर रहे हैं। 

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages